भूमिका
पटना उच्च न्यायालय में प्रस्तुत “निशांत कुमार बनाम बिहार सरकार” मामले में दो अभियर्थियों ने बिहार मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) भर्ती प्रक्रिया में अपनी योग्यता को मान्य कराने के लिए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं के पास B.Tech (मैकेनिकल या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग) की डिग्री थी, लेकिन बिहार सरकार के नियमों के अनुसार, सिर्फ डिप्लोमा धारकों को इस पद के लिए पात्र माना गया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह मांग की कि B.Tech डिग्री को भी न्यूनतम योग्यता माना जाए और उन्हें इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए। हालांकि, पटना उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी, यह कहते हुए कि सरकारी भर्ती नियमों को न्यायालय बदल नहीं सकता और केवल वे उम्मीदवार पात्र होंगे, जो विज्ञापन और नियमों के अनुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
- बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा 2020 में मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया।
- भर्ती नियमों के अनुसार, इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता:
- 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना।
- ऑटोमोबाइल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा।
- लाइट मोटर व्हीकल (LMV) और गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस।
- याचिकाकर्ता निशांत कुमार और प्रकाश कुमार सिंह के पास B.Tech (बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी) की डिग्री थी, लेकिन डिप्लोमा नहीं था।
- उन्होंने अदालत में दलील दी कि B.Tech डिग्री धारक, डिप्लोमा धारकों से अधिक योग्य होते हैं, इसलिए उन्हें भी इस भर्ती में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिकाकर्ताओं के वकील श्री वाई. वी. गिरि ने निम्नलिखित तर्क दिए:
- B.Tech डिग्री डिप्लोमा से उच्च योग्यता है:
- जब कोई उम्मीदवार डिप्लोमा से आगे की पढ़ाई कर चुका है, तो उसे डिप्लोमा धारकों से अधिक योग्य माना जाना चाहिए।
- अन्य मामलों में उच्च योग्यता को मान्यता दी गई है:
- याचिकाकर्ताओं ने “ज्योति के.के. बनाम केरल लोक सेवा आयोग” (2010) और “पुनीत शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड” (2021) मामलों का हवाला दिया, जिनमें अदालत ने उच्च योग्यता को मान्यता दी थी।
- सरकार को भर्ती नियमों में संशोधन करना चाहिए:
- उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि नियमों की व्याख्या इस तरह की जाए कि B.Tech डिग्री धारक भी इस भर्ती प्रक्रिया में पात्र माने जाएं।
बिहार सरकार और BPSC का पक्ष
राज्य सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अदालत में निम्नलिखित तर्क दिए:
- भर्ती प्रक्रिया सरकार के बनाए नियमों के अनुसार चलती है:
- सरकार ने Bihar Transport (Technical) Cadre Rules, 2003 (संशोधित 2019) के अनुसार भर्ती की प्रक्रिया तय की थी।
- इन नियमों में साफ़ तौर पर सिर्फ डिप्लोमा धारकों को पात्र माना गया था, B.Tech धारकों को नहीं।
- B.Tech डिग्री न्यूनतम योग्यता नहीं है:
- सरकार ने दलील दी कि B.Tech डिग्री “उच्च योग्यता” नहीं बल्कि “भिन्न योग्यता” है।
- डिप्लोमा कोर्स व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान प्रदान करता है, जबकि B.Tech अधिक सैद्धांतिक शिक्षा पर केंद्रित होता है।
- न्यायालय भर्ती नियमों को बदल नहीं सकता:
- सरकार ने “Nair Service Society बनाम T. Beermasthan” (2009) मामले का हवाला दिया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि न्यायालय सरकारी भर्ती नियमों को फिर से लिख नहीं सकता।
- सरकार की मंशा स्पष्ट है:
- अगर सरकार चाहती कि B.Tech धारक पात्र हों, तो वह इसे नियमों में शामिल करती।
- न्यायालय सरकारी नीति के स्थान पर नया नियम नहीं बना सकता।
पटना उच्च न्यायालय का फैसला
न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथ्री की एकल पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए निम्नलिखित निष्कर्ष दिए:
-
सरकार द्वारा तय न्यूनतम योग्यता अंतिम होती है:
- अगर नियमों में B.Tech को पात्रता में शामिल नहीं किया गया है, तो न्यायालय इसे जबरन जोड़ नहीं सकता।
-
B.Tech और डिप्लोमा अलग-अलग कोर्स हैं:
- अदालत ने माना कि डिप्लोमा और B.Tech में बड़ा अंतर है।
- डिप्लोमा को इस पद के लिए व्यावहारिक और तकनीकी रूप से अधिक उपयुक्त माना गया है।
-
न्यायालय भर्ती नियमों में हस्तक्षेप नहीं करेगा:
- अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है कि वह कौन-सी योग्यता को पात्र मानती है।
- इसलिए, B.Tech धारकों को इस भर्ती में शामिल करने के लिए न्यायालय कोई आदेश जारी नहीं करेगा।
अतः, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से याचिका खारिज कर दी और सरकार के नियमों को बरकरार रखा।
इस फैसले का महत्व
-
भर्ती नियमों की स्पष्टता:
- यह फैसला स्पष्ट करता है कि अगर किसी भर्ती में न्यूनतम योग्यता तय की गई है, तो सिर्फ “उच्च योग्यता” के आधार पर उम्मीदवार पात्र नहीं बन सकते।
-
न्यायालय की सीमाएं:
- न्यायालय ने दो टूक कहा कि भर्ती प्रक्रिया के नियमों को फिर से लिखना न्यायपालिका का काम नहीं है।
- यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में एक मिसाल बनेगा।
-
सरकार की नीति का सम्मान:
- सरकार को अपने नियम बनाने का पूरा अधिकार है, और न्यायालय सरकार की नीति में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
निष्कर्ष
पटना उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर किसी भर्ती प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से न्यूनतम योग्यता तय की गई हो, तो “अधिक योग्यता” होने का मतलब यह नहीं कि उम्मीदवार स्वचालित रूप से पात्र हो जाएगा।
यह फैसला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को बनाए रखने और भविष्य में ऐसे कानूनी विवादों को रोकने में मदद करेगा।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:
https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjOTc0OCMyMDIwIzEjTg==-Io6RYYOB0t0=


