भूमिका
पटना उच्च न्यायालय में प्रस्तुत अभिषेक कुमार सिंह बनाम बिहार सरकार मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला आया। मामला बिहार कृषि समन्वयक (Agricultural Coordinator) पद की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता अभिषेक कुमार सिंह ने शैक्षणिक योग्यता की कट-ऑफ तिथि को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि उन्होंने B.Sc. (Honours) Agriculture की डिग्री पूरी कर ली थी, लेकिन उनका अंतिम परीक्षा परिणाम (Final Result) भर्ती की निर्धारित अंतिम तिथि के बाद घोषित किया गया। इसी आधार पर बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) ने उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था।
पटना उच्च न्यायालय ने BSSC के फैसले को सही ठहराया और याचिकाकर्ता की अपील को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि भर्ती में भाग लेने के लिए उम्मीदवार को अंतिम तिथि से पहले योग्यता पूरी करनी आवश्यक है।
मामले की पृष्ठभूमि
- बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) द्वारा 2015 में कृषि समन्वयक के पद के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया गया।
- इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि उम्मीदवारों के पास भर्ती की अंतिम तिथि (Cut-off Date) तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।
- इस भर्ती प्रक्रिया में अंतिम तिथि पहले 29 मई 2015 तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 8 जून 2015 कर दिया गया।
- अभिषेक कुमार सिंह, जिन्होंने केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से B.Sc. (Honours) Agriculture की पढ़ाई की थी, ने आवेदन किया।
- हालांकि, उनका फाइनल रिजल्ट 6 जुलाई 2015 को घोषित किया गया, जो कट-ऑफ तिथि (8 जून 2015) के बाद था।
- इस आधार पर, BSSC ने उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया, क्योंकि वह अंतिम तिथि तक आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं कर सके थे।
- याचिकाकर्ता ने BSSC के इस फैसले को पहले एकल पीठ में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी याचिका खारिज हो गई।
- इसके बाद, उन्होंने पटना उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील दायर की।
याचिकाकर्ता (अभिषेक कुमार सिंह) का पक्ष
याचिकाकर्ता के वकील ने निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए:
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शैक्षणिक योग्यता पूरी कर ली थी:
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और अंतिम परीक्षाएं भी दे दी थीं।
- केवल रिजल्ट घोषित होने में देरी हुई, जिससे उनकी उम्मीदवारी को खारिज करना अनुचित है।
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विश्वविद्यालय की देरी के कारण उम्मीदवार को दंडित नहीं किया जाना चाहिए:
- रिजल्ट घोषित करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की होती है, न कि छात्र की।
- अगर किसी विश्वविद्यालय की देरी के कारण उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाता है, तो यह अन्याय होगा।
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पात्रता की व्याख्या व्यापक रूप से की जानी चाहिए:
- याचिकाकर्ता के अनुसार, न्यायालय को यह मानना चाहिए कि जिसने कोर्स पूरा कर लिया है, वह योग्य है, भले ही रिजल्ट कुछ दिनों बाद घोषित हुआ हो।
बिहार सरकार और BSSC का पक्ष
राज्य सरकार और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) ने निम्नलिखित दलीलें दीं:
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भर्ती की अंतिम तिथि तक योग्यता पूरी करना अनिवार्य:
- सरकारी नियमों के अनुसार, जो उम्मीदवार अंतिम तिथि तक योग्य नहीं हैं, वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते।
- यदि अंतिम तिथि 8 जून 2015 थी, तो उम्मीदवार को उस दिन तक डिग्री प्राप्त कर लेनी चाहिए थी।
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रिजल्ट की तिथि ही योग्यता साबित करती है:
- याचिकाकर्ता केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से B.Sc. (Honours) Agriculture की डिग्री कर रहे थे, लेकिन उनका अंतिम रिजल्ट 6 जुलाई 2015 को घोषित हुआ।
- इसका मतलब यह था कि वे 8 जून 2015 तक औपचारिक रूप से डिग्री धारक नहीं थे।
- इसलिए, वे भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं थे।
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न्यायालय भर्ती नियमों को नहीं बदल सकता:
- सरकार ने तर्क दिया कि भर्ती की शर्तों को न्यायालय द्वारा नहीं बदला जा सकता।
- यदि न्यायालय योग्यता की अंतिम तिथि को बदलने की अनुमति देता है, तो इससे भविष्य में भर्ती प्रक्रिया में अराजकता फैल सकती है।
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नियम समान रूप से लागू होने चाहिए:
- यदि याचिकाकर्ता को शामिल किया जाता, तो उन सभी उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता जिन्होंने अंतिम तिथि तक अपनी योग्यता पूरी कर ली थी।
- इसलिए, नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
पटना उच्च न्यायालय का फैसला
न्यायमूर्ति राजन गुप्ता और मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने BSSC के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया और निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले:
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भर्ती प्रक्रिया की अंतिम तिथि अपरिवर्तनीय होती है:
- अगर किसी भर्ती के लिए कट-ऑफ तिथि तय कर दी गई है, तो उसके बाद किसी भी उम्मीदवार को पात्र नहीं माना जा सकता।
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विश्वविद्यालय की देरी उम्मीदवार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, लेकिन भर्ती नियमों का पालन आवश्यक है:
- हालांकि रिजल्ट घोषित करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की थी, फिर भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवश्यक था कि उम्मीदवार के पास अंतिम तिथि तक योग्यता हो।
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BSSC का निर्णय कानूनी रूप से सही था:
- किसी उम्मीदवार के लिए यह आवश्यक है कि वह भर्ती की अंतिम तिथि तक सभी शर्तें पूरी करे।
- याचिकाकर्ता 8 जून 2015 तक डिग्री धारक नहीं थे, इसलिए BSSC ने उन्हें बाहर करने का सही फैसला किया।
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अदालत भर्ती प्रक्रिया के नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती:
- भर्ती प्रक्रिया की अंतिम तिथि को बढ़ाने या उसकी व्याख्या बदलने का अधिकार केवल सरकार के पास है, न कि न्यायालय के पास।
इसलिए, पटना उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता भर्ती प्रक्रिया के नियमों के अनुसार अयोग्य थे।
इस फैसले का महत्व
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भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता:
- यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि भर्ती प्रक्रिया की शर्तें सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू हों।
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न्यायालय की सीमाएं:
- न्यायालय भर्ती नियमों में बदलाव नहीं कर सकता।
- अगर कोई उम्मीदवार अंतिम तिथि तक योग्य नहीं है, तो वह भर्ती में शामिल नहीं हो सकता।
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भविष्य के मामलों में मार्गदर्शन:
- यह फैसला भविष्य में उन मामलों के लिए मिसाल बनेगा, जहां उम्मीदवार रिजल्ट में देरी के आधार पर भर्ती में शामिल होने की मांग करेंगे।
निष्कर्ष
पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि भर्ती प्रक्रिया की शर्तें सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से लागू होती हैं। यदि कोई उम्मीदवार भर्ती की अंतिम तिथि तक आवश्यक योग्यता पूरी नहीं कर पाता, तो वह प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता, भले ही रिजल्ट में देरी विश्वविद्यालय की गलती हो।
यह फैसला भविष्य में सरकारी भर्तियों की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।
पूरा
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MyM0MTUjMjAyMSMxI04=-vYnb9J1phwo=


