मामले का सारांश:
यह मामला पटना उच्च न्यायालय में दायर नागरिक रिट याचिका संख्या 585/2021 से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता रंजीता कुमारी ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा उनकी पेट्रोल पंप डीलरशिप की उम्मीदवारी रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी थी।
मुख्य विवाद:
BPCL ने याचिकाकर्ता की SC श्रेणी के तहत “कॉर्पस फंड योजना” में डीलरशिप के लिए आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वह पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करतीं।
न्यायालय ने BPCL के निर्णय को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि:
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पेट्रोल पंप डीलरशिप आवेदन प्रक्रिया:
- BPCL ने 25 नवंबर 2018 को NH-327E (रणीगंज से अररिया, जिला- अररिया) पर SC श्रेणी के तहत पेट्रोल पंप डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए।
- याचिकाकर्ता ने 22 दिसंबर 2018 को आवेदन किया और प्रारंभिक जांच में पात्र पाई गईं।
- 30 जुलाई 2019 को BPCL की भूमि मूल्यांकन समिति (Land Evaluation Committee) ने उनके द्वारा प्रस्तुत भूमि का निरीक्षण किया।
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याचिकाकर्ता की पात्रता पर विवाद:
- निरीक्षण के बाद, समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से यह पुष्टि करने को कहा कि क्या उक्त भूमि डीलरशिप मानकों को पूरा करती है या नहीं।
- याचिकाकर्ता ने बाद में NHAI का पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें पुष्टि की गई कि उनकी भूमि निर्धारित मानकों के अनुरूप थी।
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BPCL द्वारा उम्मीदवारी अस्वीकार करने के कारण:
- BPCL ने पाया कि याचिकाकर्ता के पति त्रिदेव सिंह पहले से ही HPCL के LPG वितरक हैं और याचिकाकर्ता भी उस व्यवसाय में 50% साझेदार हैं।
- BPCL की नीति के अनुसार, जो व्यक्ति या उनके परिवार का कोई सदस्य पहले से “A” या “CC” श्रेणी की डीलरशिप/डिस्ट्रीब्यूशन (कॉर्पोरेट फंड योजना के तहत) रखता हो, वह दूसरी बार इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर सकता।
- चूंकि याचिकाकर्ता का LPG व्यवसाय “B” या “DC” श्रेणी में आता था, इसलिए उन्हें केवल उसी श्रेणी के तहत नई डीलरशिप के लिए आवेदन करना था, न कि “A” या “CC” श्रेणी के तहत।
- इस आधार पर, BPCL ने 18 अगस्त 2020 को उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी।
याचिकाकर्ता के तर्क:
- याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उनके पति की LPG डीलरशिप “खुली श्रेणी” में है और “कॉर्पस फंड योजना” के तहत नहीं है, इसलिए वह SC श्रेणी की डीलरशिप के लिए पात्र हैं।
- उन्होंने BPCL की नीति को गलत तरीके से लागू करने का आरोप लगाया और अदालत से BPCL को डीलरशिप प्रदान करने का आदेश देने की मांग की।
BPCL का पक्ष:
BPCL के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि:
- BPCL की नीति स्पष्ट रूप से कहती है कि यदि किसी व्यक्ति के परिवार के पास पहले से “B” या “DC” श्रेणी की डीलरशिप है, तो वह “A” या “CC” श्रेणी में आवेदन नहीं कर सकता।
- याचिकाकर्ता के पति के पास पहले से ही एक LPG डीलरशिप थी और याचिकाकर्ता उसमें 50% साझेदार थीं।
- BPCL ने अपनी नीतियों के तहत सही निर्णय लिया था और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया।
न्यायालय का निर्णय:
पटना उच्च न्यायालय ने BPCL के तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया।
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BPCL की नीति स्पष्ट और तार्किक है:
- कोई भी व्यक्ति या उसके परिवार का सदस्य, जो पहले से “B” या “DC” श्रेणी की डीलरशिप रखता है, वह “A” या “CC” श्रेणी की डीलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकता।
- याचिकाकर्ता के पति और वे स्वयं LPG व्यवसाय में साझेदार थीं, इसलिए वे केवल “B” या “DC” श्रेणी में आवेदन कर सकती थीं।
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BPCL ने नियमों का सही पालन किया:
- BPCL ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया था, बल्कि कंपनी की 24 नवंबर 2018 की गाइडलाइंस के अनुसार निर्णय लिया था।
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याचिकाकर्ता इस श्रेणी की डीलरशिप के लिए पात्र नहीं थीं:
- यदि याचिकाकर्ता “B” या “DC” श्रेणी की डीलरशिप के लिए आवेदन करतीं, तो वे पात्र होतीं।
- लेकिन उन्होंने “A” या “CC” श्रेणी (कॉर्पस फंड योजना) में आवेदन किया था, जो नियमों के अनुसार अस्वीकृत कर दिया गया।
इस आधार पर, न्यायालय ने कहा कि BPCL का निर्णय पूर्णत: वैध था और इसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
मामले का व्यापक प्रभाव:
यह फैसला सरकारी और निजी कंपनियों द्वारा पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रियाओं को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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निष्पक्ष और स्पष्ट नियम:
- कंपनियों को अपनी नीतियों को पहले से स्पष्ट करना चाहिए ताकि कोई उम्मीदवार अनावश्यक कानूनी विवाद में न फंसे।
- डीलरशिप नियमों को पारदर्शी और स्पष्ट बनाने की जरूरत है।
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आवेदकों को नीतियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए:
- किसी भी डीलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले, उम्मीदवारों को सभी नियमों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
- गलत श्रेणी में आवेदन करने से बचने के लिए पूरी जानकारी होनी चाहिए।
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कानूनी प्रक्रियाओं की मजबूती:
- न्यायालय ने BPCL के नियमों को सही ठहराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनियों के पास अपने नीतिगत निर्णयों को लागू करने का अधिकार है।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjNTg1IzIwMjEjMSNO-cO66dHrRq8w=


