“सरकारी नौकरी में पात्रता का विवाद: पटना उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय”


मामले का सारांश:

यह मामला पटना उच्च न्यायालय में दायर नागरिक रिट याचिका संख्या 18675/2021 से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता अपूर्वा कुमारी ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को अंतिम चयन सूची में शामिल न करने के खिलाफ अपील दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय से BPSC के 24 अगस्त 2021 के अंतिम चयन सूची को रद्द करने और उसे इंटरव्यू के लिए बुलाकर चयन प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश देने की मांग की थी।


मामले की पृष्ठभूमि:

  1. विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया:

    • BPSC ने विज्ञापन संख्या 02/2017 के तहत असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।
    • आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 अप्रैल 2017 निर्धारित थी।
  2. योग्यता विवाद:

    • आवेदन के समय, याचिकाकर्ता ने तीन वर्षीय इंजीनियरिंग कोर्स पूरा किया था, जिसे उसने डिप्लोमा के समकक्ष बताया।
    • लेकिन BPSC के नियमानुसार, आवेदन के समय अभ्यर्थी के पास सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा होना आवश्यक था।
    • अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता आवेदन की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करती थी, इसलिए उसकी उम्मीदवारी वैध नहीं मानी जा सकती।
  3. चयन प्रक्रिया और याचिकाकर्ता की दलील:

    • याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में भाग लिया और इंटरव्यू के लिए भी बुलाया गया।
    • उसका तर्क था कि एक बार परीक्षा और इंटरव्यू में भाग लेने के बाद, उसे चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित है।
    • उसने दावा किया कि जब BPSC ने उसे परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी, तो यह उसके पात्र होने का संकेत था और अब उसे बाहर करना अन्यायपूर्ण है।
  4. न्यायालय का दृष्टिकोण:

    • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि BPSC परीक्षा के प्रारंभिक और मुख्य चरणों में लाखों उम्मीदवार भाग लेते हैं और योग्यता की जांच प्रारंभिक स्तर पर पूरी तरह से नहीं हो पाती।
    • यह याचिकाकर्ता की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी अयोग्यता को जानते हुए आवेदन न करे।
    • अदालत ने कहा कि किसी भी अभ्यर्थी को केवल इस आधार पर चयन का अधिकार नहीं मिल सकता कि उसे गलती से प्रक्रिया में आगे बढ़ा दिया गया था।

न्यायालय का निर्णय:

  • पटना उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वह आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक योग्यता नहीं रखती थी।
  • अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने आयोग को गुमराह किया कि वह इस पद के लिए योग्य है, जबकि वह आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करती थी।
  • अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार को गलत सूचना देकर परीक्षा में शामिल होने का कोई विशेष अधिकार नहीं मिल सकता।

मामले का व्यापक प्रभाव:

यह निर्णय सरकारी भर्तियों में पात्रता मानदंडों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को उजागर करता है। अदालत ने यह संदेश दिया कि:

  1. योग्यता पूरी न करने वाले उम्मीदवारों को स्वयं आवेदन करने से बचना चाहिए।
  2. किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अंतिम रूप से चयनित होने के लिए सभी मानदंड पूरे करना अनिवार्य है।
  3. नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।

इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर चयन प्रक्रिया में जगह नहीं बनाई जा सकती। 

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTg2NzUjMjAyMSMxI04=-QhhaCNZvcbw=

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