“सरकारी शिक्षक भर्ती में काउंसलिंग विवाद: पटना उच्च न्यायालय का अहम फैसला”

 


मामले का सारांश:

यह मामला पटना उच्च न्यायालय में दायर नागरिक रिट याचिका संख्या 5512/2020 से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता चंद्र भूषण चौबे ने पंचायत शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपील की थी।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय से 17 दिसंबर 2012 और 27 मार्च 2019 को जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकरण और राज्य अपीलीय प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें उनकी नियुक्ति संबंधी दावों को खारिज कर दिया गया था।


मामले की पृष्ठभूमि:

  1. शिक्षक भर्ती और काउंसलिंग प्रक्रिया:

    • ग्राम पंचायत बरवा सेमरा घाट, मझौलिया ब्लॉक, पश्चिम चंपारण में पंचायत शिक्षकों की भर्ती के लिए पहली काउंसलिंग 28 फरवरी 2009 को आयोजित की गई थी।
    • इसके बाद, कुछ शिकायतों के कारण 15 फरवरी 2011 को दोबारा काउंसलिंग आयोजित की गई।
    • लेकिन यह प्रक्रिया ब्लॉक विकास पदाधिकारी (BDO) की अनुपस्थिति के कारण रद्द कर दी गई।
    • 12 अप्रैल 2012 को तीसरी काउंसलिंग आयोजित की गई, जिसमें याचिकाकर्ता अनुपस्थित रहे।
  2. याचिकाकर्ता की दलील:

    • याचिकाकर्ता का कहना था कि 12 अप्रैल 2012 की काउंसलिंग के लिए उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण वे उसमें भाग नहीं ले सके।
    • उनका दावा था कि वे पहले की दो काउंसलिंग में उपस्थित थे और उनके पास अन्य उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अंक और शिक्षक प्रशिक्षण की योग्यता थी
    • इसलिए, उन्हें नियुक्ति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
  3. सरकारी पक्ष की दलील:

    • जिला शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकरण और राज्य अपीलीय प्राधिकरण दोनों ने जांच के बाद पाया कि 12 अप्रैल 2012 की काउंसलिंग विधिवत रूप से अधिसूचित की गई थी
    • BDO ने काउंसलिंग की जानकारी पंचायत और ब्लॉक कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चिपकवाने का आदेश दिया था
    • काउंसलिंग प्रक्रिया नियमानुसार और BDO की निगरानी में पूरी की गई थी
    • अखबार में सूचना प्रकाशित करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए याचिकाकर्ता की यह दलील अस्वीकार्य थी।

न्यायालय का निर्णय:

  • पटना उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी
  • अदालत ने माना कि काउंसलिंग प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी और याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति उनकी खुद की जिम्मेदारी थी
  • न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को सतर्क रहना चाहिए था, क्योंकि उन्होंने पहले की काउंसलिंग में भाग लिया था और अगली तिथि की जानकारी रखने की जिम्मेदारी उनकी थी
  • चूंकि कोई ठोस प्रमाण नहीं था कि उन्हें जानबूझकर बाहर रखा गया था, इसलिए अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

मामले का व्यापक प्रभाव:

यह फैसला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में योग्यता, पारदर्शिता और उम्मीदवारों की सतर्कता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। अदालत ने यह संदेश दिया कि:

  1. किसी भी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को सतर्क रहना आवश्यक है।
  2. नियुक्ति प्रक्रिया में सूचना देने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, लेकिन उम्मीदवार को भी अपनी ओर से अपडेट रहना चाहिए।
  3. यदि कोई उम्मीदवार समय पर सूचना प्राप्त करने में असमर्थ रहता है, तो यह उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjNTUxMiMyMDIwIzEjTg==-YtsDQf6Kq5s=

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