मामले की पृष्ठभूमि
घटना 2 अप्रैल 2010 की रात की है, जब जहानाबाद के गांधी मैदान में मेले का आयोजन किया गया था। शिकायतकर्ता विकास कुमार अपने भाई विवेक कुमार के साथ मेले में गए थे। उसी दौरान वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद 30-35 लोगों ने, जो लाठी, डंडे, लोहे की रॉड, हॉकी स्टिक, पिस्टल और बम से लैस थे, विवेक कुमार पर हमला कर दिया। मुख्य आरोपियों में राज कुमार यादव, टीजू यादव, मुन्ना यादव और सत्यनारायण प्रसाद शामिल थे।
घटना का विवरण
जब विकास कुमार और विवेक कुमार मेले में थे, तब अचानक वहां बम फटने की आवाज़ आई और अफरातफरी मच गई। इसी दौरान मेले के प्रबंधक और अन्य लोगों ने विवेक कुमार पर हमला करने का आदेश दिया। इसके बाद:
- टीजू यादव और राज कुमार यादव ने लोहे की रॉड से विवेक के सिर पर वार किया।
- मुन्ना यादव ने लाठी से हमला किया।
- अन्य आरोपियों ने भी लात-घूंसों से मारा और उसके गहने और मोबाइल छीन लिए।
- इस हमले में विवेक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया।
मामले की जांच और अदालती कार्यवाही
पुलिस ने शुरू में इस मामले को हत्या के प्रयास के रूप में दर्ज किया, लेकिन विवेक कुमार की 9 अप्रैल 2010 को मृत्यु हो जाने के बाद इसे हत्या का मामला बना दिया गया। जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की, और मुकदमा चलाया गया।
मुकदमे के दौरान प्रस्तुत साक्ष्य
- प्राथमिक गवाहों की गवाही: विकास कुमार (शिकायतकर्ता) सहित कई चश्मदीदों ने बयान दिया कि विवेक पर योजनाबद्ध तरीके से हमला किया गया था।
- चिकित्सा प्रमाण: डॉक्टरों ने पुष्टि की कि विवेक की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई।
- पुलिस की जांच: पुलिस ने पाया कि यह हमला पूर्व नियोजित था, जिसमें कई लोगों ने एक संगठित समूह के रूप में भाग लिया।
अदालत का फैसला
ट्रायल कोर्ट ने राज कुमार यादव, टीजू यादव, मुन्ना यादव और सत्यनारायण प्रसाद को दोषी पाया और उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 147 (दंगा), और 149 (गैरकानूनी समूह द्वारा अपराध) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उच्च न्यायालय में अपील और उसका निर्णय
- दोषियों ने फैसले के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में अपील की।
- उनका तर्क था कि यह हमला पूर्व नियोजित नहीं था और घटना अचानक हुई थी, इसलिए यह हत्या नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या (IPC की धारा 304) होनी चाहिए।
- उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने FIR दर्ज करने और गवाहों के बयान लेने में देरी की, जिससे मामला संदेहास्पद बनता है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि हत्या पूरी तरह से योजनाबद्ध थी, और इस अपराध के लिए सभी दोषी थे।
निष्कर्ष
यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक सार्वजनिक आयोजन में सुरक्षा की अनदेखी और आपराधिक तत्वों की संलिप्तता एक निर्दोष व्यक्ति की मौत का कारण बन सकती है। न्यायालय ने दोषियों को कड़ी सजा देकर यह संदेश दिया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/NSM2NTEjMjAxMyMxI04=-Wd37lLdeMac=


