परिचय
यह मामला चार्टर अवध एजुकेशनल ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच ऋण वसूली और संपत्ति जब्ती से संबंधित है। ट्रस्ट ने एक स्कूल बनाने के लिए बैंक से ऋण लिया था, लेकिन भुगतान न करने के कारण बैंक ने SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत संपत्ति जब्त कर ली। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
मामले के मुख्य तथ्य
-
ऋण स्वीकृति और स्कूल निर्माण
- चार्टर अवध एजुकेशनल ट्रस्ट ने SBI, बिक्रमगंज शाखा से ₹1.5 करोड़ का ऋण लिया।
- बाद में, मार्च 2016 में ट्रस्ट ने और अधिक धन की आवश्यकता जताई, जिस पर बैंक ने ₹3 करोड़ का अतिरिक्त ऋण स्वीकृत किया।
- इस ऋण से ट्रस्ट ने स्कूल भवन का निर्माण किया।
-
ऋण भुगतान में चूक और NPA घोषित
- समय पर ऋण की किस्तें न चुकाने के कारण बैंक ने इसे NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर दिया।
- बैंक ने ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT), पटना में मामला दर्ज किया।
- 02 फरवरी 2019 को DRT ने बैंक के पक्ष में निर्णय दिया और ₹3.5 करोड़ की वसूली का आदेश दिया।
-
SARFAESI अधिनियम के तहत कार्रवाई
- 05 अगस्त 2021 को SBI ने SARFAESI अधिनियम, 2002 की धारा 13(4) के तहत स्कूल की संपत्ति जब्त कर ली।
- बैंक ने ट्रस्ट को कोई अग्रिम सूचना नहीं दी और स्कूल को जबरन बंद कर दिया।
- ट्रस्ट ने इसे अन्यायपूर्ण और मनमाना बताते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं (ट्रस्ट) की दलीलें
- ट्रस्ट स्कूल का संचालन कर रहा था और छात्रों के भविष्य को नुकसान होगा।
- वे किश्तों में बकाया राशि चुकाने के लिए तैयार हैं और बैंक को समझौते का मौका देना चाहिए।
- बैंक की कार्रवाई अचानक और कठोर थी, जिससे छात्रों और स्टाफ को असुविधा हुई।
- बैंक ने कोई वैकल्पिक समाधान नहीं दिया, जो SARFAESI अधिनियम के उद्देश्यों के विपरीत है।
बैंक (SBI) की दलीलें
- ट्रस्ट ने कई वर्षों तक भुगतान नहीं किया और बकाया ₹3.5 करोड़ हो गया।
- SARFAESI अधिनियम के तहत बैंक को कानूनी अधिकार है कि वह बिना किसी अदालती आदेश के संपत्ति जब्त कर सकता है।
- ट्रस्ट को पहले से ही ऋण भुगतान की कई चेतावनियाँ दी गई थीं, लेकिन उन्होंने पालन नहीं किया।
- याचिका न्यायालय में सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि ट्रस्ट को धारा 17(1) के तहत DRT में अपील करनी चाहिए थी।
पटना उच्च न्यायालय का फैसला
- न्यायालय ने पाया कि ट्रस्ट ने कोई ठोस पुनर्भुगतान योजना प्रस्तुत नहीं की।
- SARFAESI अधिनियम के तहत बैंक की कार्रवाई वैध थी, और ट्रस्ट के पास DRT में अपील करने का विकल्प था।
- उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ट्रस्ट न्यायालय में याचिका दायर करने के बजाय पहले उचित प्रक्रियाओं का पालन कर सकता था।
- इसलिए, याचिका खारिज कर दी गई और ट्रस्ट को सलाह दी गई कि वह DRT में अपील दायर करे।
मामले से सीखने योग्य बातें
- SARFAESI अधिनियम, 2002 बैंकों को अधिकार देता है कि वे बकाएदारों की संपत्ति जब्त कर सकते हैं, बिना अदालती हस्तक्षेप के।
- यदि कोई उधारकर्ता बैंक की कार्रवाई से असंतुष्ट है, तो उसे पहले DRT में अपील करनी चाहिए।
- न्यायालय बैंकों के अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन बकाएदारों को समय पर भुगतान करने या कानूनी रूप से समाधान खोजने की जिम्मेदारी लेनी होगी।
- शिक्षा संस्थानों को वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता रखनी चाहिए, ताकि छात्रों और स्टाफ पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
निष्कर्ष
यह मामला दर्शाता है कि बैंकिंग कानूनों का पालन करना आवश्यक है। यदि कोई ऋणदाता भुगतान नहीं करता है, तो बैंक के पास कानूनी अधिकार होता है कि वह SARFAESI अधिनियम के तहत कार्रवाई करे।
चार्टर अवध एजुकेशनल ट्रस्ट ने न्यायालय से राहत की उम्मीद की थी, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन न करने के कारण उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए सही मंच और प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:
https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTk3MDMjMjAyMSMxI04=-9GY–am1–7CIrgd4=


