निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाई कोर्ट ने बिहार में एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा विज्ञापन संख्या 12/2019 के तहत की गई नियुक्तियों से संबंधित था।
इस विज्ञापन के तहत 100 पद लैब टेक्नीशियन और 500 पद एएनएम (NUHM) के लिए निकाले गए थे। तीन याचिकाकर्ताओं ने इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि चयन प्रक्रिया में अनियमितता की गई और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का परिणाम अलग से प्रकाशित नहीं किया गया।
विज्ञापन की शर्तें
विज्ञापन की धारा 12 और 13 में स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि—
- 50 अंक कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के होंगे।
- 50 अंक शैक्षणिक योग्यता के आधार पर दिए जाएंगे (प्रत्येक प्रतिशत पर 0.5 अंक)।
- अंतिम मेरिट लिस्ट 100 अंकों के आधार पर बनेगी।
- टाई होने पर उम्र और शैक्षणिक योग्यता को प्राथमिकता दी जाएगी।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि—
- सबसे पहले सीबीटी का परिणाम प्रकाशित होना चाहिए था।
- उसके बाद शैक्षणिक अंक जोड़कर मेरिट लिस्ट बननी चाहिए थी।
- लेकिन राज्य स्वास्थ्य समिति ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई और सीधा मेरिट लिस्ट बना दी।
उनका आरोप था कि चयन पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ।
राज्य स्वास्थ्य समिति का पक्ष
समिति ने कोर्ट में कहा कि—
- चयन प्रक्रिया पूरी तरह से विज्ञापन के अनुरूप हुई।
- कहीं भी यह प्रावधान नहीं था कि सीबीटी का रिजल्ट अलग से प्रकाशित होगा।
- नियम यह था कि सीबीटी + शैक्षणिक अंक = कुल 100 अंक के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी।
- कोविड-19 की वजह से दस्तावेज़ सत्यापन (document verification) की तारीखें आगे बढ़ाई गईं।
- अंततः 05.01.2021 को अंतिम चयन सूची प्रकाशित की गई और चुने गए उम्मीदवार अपनी नियुक्ति पर ज्वॉइन कर चुके हैं।
हाई कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने सभी दस्तावेज़ों और विज्ञापन की धाराओं को देखने के बाद कहा:
- अलग से सीबीटी रिजल्ट प्रकाशित करने का कोई नियम ही नहीं था।
- चयन प्रक्रिया बिल्कुल वैसी ही हुई जैसी विज्ञापन और दिशा-निर्देशों में लिखी गई थी।
- याचिकाकर्ताओं ने अंतिम चयन सूची को चुनौती ही नहीं दी और न ही चयनित उम्मीदवारों को पार्टी बनाया।
- कोर्ट ने कहा कि सफल उम्मीदवार आवश्यक पक्षकार (necessary parties) होते हैं। उनके बिना चयन प्रक्रिया रद्द नहीं की जा सकती।
- इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले Public Service Commission बनाम ममता बिष्ट (2010) और रंजन कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) का हवाला दिया गया।
अंतिम आदेश
हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका निराधार और त्रुटिपूर्ण है।
- भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
- आवश्यक पक्षकारों को शामिल न करने से याचिका तकनीकी रूप से भी दोषपूर्ण है।
इसलिए याचिका को खारिज कर दिया गया।
निर्णय का महत्व और प्रभाव
नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए
- अगर विज्ञापन में स्पष्ट रूप से मेरिट लिस्ट की प्रक्रिया लिखी है, तो उसी का पालन होगा।
- केवल सीबीटी रिजल्ट अलग से प्रकाशित करने की मांग को कानूनी समर्थन नहीं मिलेगा।
- भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते समय चयनित उम्मीदवारों को पार्टी बनाना अनिवार्य है।
सरकार और भर्ती एजेंसियों के लिए
- यह फैसला सरकार और भर्ती एजेंसियों को मजबूती देता है कि वे विज्ञापन के नियमों का पालन करके चयन करें।
- भविष्य में पारदर्शिता के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश देना जरूरी है।
विधिक दृष्टिकोण से
- यह निर्णय “आवश्यक पक्षकार सिद्धांत (Doctrine of Necessary Parties)” को दोहराता है।
- कोर्ट ने फिर से स्पष्ट किया कि बिना सफल उम्मीदवारों को सुने, उनके खिलाफ आदेश पारित नहीं हो सकता।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बिंदुवार)
- क्या सीबीटी रिजल्ट अलग से प्रकाशित करना जरूरी था?
- नहीं। विज्ञापन में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
- क्या चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई?
- नहीं। प्रक्रिया विज्ञापन और दिशा-निर्देशों के अनुरूप हुई।
- क्या याचिकाकर्ताओं की याचिका सफल हो सकती थी बिना चयनित उम्मीदवारों को पक्षकार बनाए?
- नहीं। आवश्यक पक्षकारों को जोड़े बिना राहत नहीं दी जा सकती।
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- Public Service Commission v. Mamta Bisht, (2010) 12 SCC 204
- Ranjan Kumar v. State of Bihar, (2014) 16 SCC 187
मामले का शीर्षक
Sudha Devi & Ors. v. The Principal Secretary, Health & Family Welfare Dept. & Ors.
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 7401 of 2020
उद्धरण (Citation)
2021(2) PLJR 97
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह (दिनांक 26-02-2021)
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: श्री संजीव कुमार झा, अधिवक्ता
- राज्य की ओर से: श्री राजेश्वर सिंह, GA-10 और श्री मनोज कुमार यादव, AC to GA-10
- प्रतिवादी संख्या 2 और 3 की ओर से: श्री के. के. सिन्हा एवं श्री शशि शेखर, अधिवक्ता
निर्णय का लिंक
MTUjNzQwMSMyMDIwIzEjTg==-iYNeaoDrxag=
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