पटना उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण फैसला आया है जो रेलवे कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़ा है। मामला एक रेलवे कर्मचारी श्री सुरेश ठाकुर से संबंधित था, जिनकी ग्रेच्युटी और पेंशन का कम्युटेड मूल्य रेलवे प्रशासन ने रोक दिया था। रोक का कारण उनके खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामला था। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने 21 अगस्त 2018 को रेलवे को भुगतान करने का आदेश दिया था, जिसे रेलवे ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
रेलवे का तर्क था कि रेलवे सेवा (पेंशन) नियम, 1993 के नियम 10(1)(c) के तहत न्यायिक कार्यवाही के समाप्त होने तक ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। वहीं कर्मचारी का कहना था कि आपराधिक मामला उनके काम से जुड़ा नहीं था और रेलवे को कोई नुकसान नहीं हुआ था। उनका तर्क था कि ग्रेच्युटी एक मूल्यवान अधिकार है जिसे आसानी से नहीं रोका जा सकता।
उच्च न्यायालय ने रेलवे के पक्ष में फैसला देते हुए CAT का आदेश रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि नियम 10(1)(c) बिल्कुल स्पष्ट है और इसके तहत न्यायिक कार्यवाही के समाप्त होने तक ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि कर्मचारी आपराधिक मामले में सकारात्मक निर्णय आने के बाद रेलवे प्रशासन से भुगतान की मांग कर सकते हैं।
यह निर्णय रेलवे प्रशासन और कर्मचारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसने स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही के दौरान ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है, लेकिन यह रोक अस्थायी होगी। मामले के सकारात्मक निपटारे के बाद भुगतान किया जा सकता है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है और इससे दोनों पक्षों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
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