“बिहार में बी.एड. कॉलेज की संबद्धता और छात्रों के भविष्य पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला”

 


परिचय

यह मामला बिहार के सुरेंद्र बी.एड. टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, पटना से संबंधित है, जिसने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (AKU) से संबद्धता (affiliation) प्राप्त करने और अपने छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दिलाने के लिए पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

कॉलेज का कहना था कि उसने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) से मान्यता प्राप्त कर ली थी, लेकिन यूनिवर्सिटी ने उसे संबद्धता देने से इनकार कर दिया। इसके कारण 2016-17 सत्र के छात्रों को परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया

इस विवाद पर पहले एकल पीठ (Single Judge Bench) ने कॉलेज के पक्ष में फैसला दिया और विश्वविद्यालय को संबद्धता देने का निर्देश दिया, लेकिन छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले के खिलाफ कॉलेज और यूनिवर्सिटी दोनों ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) में अपील की


मामले की पृष्ठभूमि

  1. कॉलेज की स्थापना और मान्यता:

    • सुरेंद्र बी.एड. टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज पटना के खगौल स्थित नेउरा में स्थित है और सुरेंद्र हेमंत एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित है।
    • कॉलेज ने बी.एड. कोर्स के लिए NCTE से 2016-17 सत्र के लिए मान्यता प्राप्त की थी
  2. यूनिवर्सिटी से संबद्धता का विवाद:

    • AKU (आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी) ने कॉलेज को संबद्धता देने से इनकार कर दिया।
    • यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि कॉलेज ने संबद्धता के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं की थीं।
    • इसके बावजूद कॉलेज ने छात्रों को बी.एड. कोर्स में दाखिला दे दिया, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया।
  3. छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति न मिलने की समस्या:

    • जब छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी गई, तो कॉलेज ने पटना हाई कोर्ट में न्यायिक समीक्षा (writ petition) दायर की

एकल पीठ का फैसला (Single Judge Judgment)

  • न्यायमूर्ति ने यूनिवर्सिटी को कॉलेज को संबद्धता देने का आदेश दिया।
  • लेकिन छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी गई।
  • कॉलेज पर जुर्माना लगाया गया और छात्रों को उनकी फीस वापस करने का आदेश दिया गया
  • कॉलेज इस फैसले से संतुष्ट नहीं था, इसलिए उन्होंने उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील की

खंडपीठ में अपील (Letters Patent Appeal – LPA)

कॉलेज और यूनिवर्सिटी दोनों ने अपील दायर की:

  1. कॉलेज की अपील (LPA No. 1184/2017) – कॉलेज ने मांग की कि छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
  2. यूनिवर्सिटी की अपील (LPA No. 1217/2017) – यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि वे कॉलेज को संबद्धता देने के लिए बाध्य नहीं हैं, क्योंकि कॉलेज ने सभी नियमों का पालन नहीं किया।

खंडपीठ का आदेश:

  • 4 सितंबर 2017 को अंतरिम आदेश (Interim Order) दिया गया, जिसमें छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, लेकिन यह आदेश अंतिम निर्णय के अधीन था।
  • कॉलेज की अपील 2018 में प्रॉसिक्यूशन की कमी (lack of prosecution) के कारण खारिज कर दी गई
  • इसके बाद कॉलेज ने पुनर्विचार याचिका (IA No. 6852/2018) दाखिल की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट में अपील (SLP No. 28177/2018) भी खारिज कर दी गई।

खंडपीठ का अंतिम फैसला (Final Division Bench Judgment, 22-08-2019)

खंडपीठ ने निम्नलिखित आदेश दिए:

  1. कॉलेज को संबद्धता देने के एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा गया।
  2. लेकिन छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
  3. कॉलेज को छात्रों की फीस वापस करने का निर्देश दिया गया।
  4. यूनिवर्सिटी को स्वतंत्र रूप से कॉलेज को संबद्धता देने या न देने का अधिकार दिया गया।

फैसले के प्रमुख बिंदु

  • यूनिवर्सिटी को संबद्धता देने का अधिकार:

    • खंडपीठ ने कहा कि यदि NCTE मान्यता देती है, तो यूनिवर्सिटी संबद्धता देने से इनकार नहीं कर सकती
    • लेकिन यूनिवर्सिटी को यह जांचने का अधिकार होगा कि कॉलेज आवश्यक शर्तें पूरी कर रहा है या नहीं।
  • छात्रों के हितों की सुरक्षा:

    • चूंकि कॉलेज ने बिना संबद्धता के छात्रों को दाखिला दिया था, इसलिए कोर्ट ने कॉलेज को दोषी ठहराया और छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी
    • छात्रों को उनकी फीस लौटाने का आदेश दिया गया।
  • यूनिवर्सिटी का अधिकार:

    • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी अपने नियमों के अनुसार संबद्धता देने या न देने का फैसला ले सकती है
  • कॉलेज की गलती:

    • कोर्ट ने पाया कि कॉलेज ने बिना संबद्धता के छात्रों को दाखिला देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया

इस फैसले का प्रभाव

बी.एड. कॉलेजों को संबद्धता प्राप्त करने की प्रक्रिया पर स्पष्टता मिली।
छात्रों को जागरूकता मिली कि बिना संबद्धता वाले कॉलेज में दाखिला न लें।
यूनिवर्सिटी को यह अधिकार मिला कि वह नियमों के अनुसार संबद्धता देने या न देने का निर्णय कर सके।
कॉलेजों को यह सख्त संदेश मिला कि वे बिना संबद्धता के दाखिला न दें।


निष्कर्ष

यह मामला बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण है। पटना उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि:
यदि NCTE किसी कॉलेज को मान्यता देती है, तो यूनिवर्सिटी को संबद्धता देने से मना नहीं करना चाहिए।
कॉलेज बिना संबद्धता के छात्रों को दाखिला नहीं दे सकते।
छात्रों के हितों की सुरक्षा करना अदालत की प्राथमिकता है।

इस फैसले से भविष्य में निजी बी.एड. कॉलेजों पर बेहतर नियंत्रण स्थापित होगा और छात्रों के हितों की रक्षा होगी।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MyMxMTg0IzIwMTcjMSNO-86vHBXt0M48=

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