“गोली कांड में दस वर्ष की सजा बरकरार: पटना हाई कोर्ट ने शादी समारोह में हत्या के प्रयास के मामले में अपील की खारिज”

 

यह एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामला है जो पटना उच्च न्यायालय में सुना गया। मामला बिहार के भोजपुर जिले के अगियाओं थाना क्षेत्र से संबंधित है, जहाँ मिंटू उर्फ तुलसी राय (अपीलकर्ता) को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी पाया गया था। घटना 24 मई 2014 की है, जब शिव पूजन राय की पौत्री की शादी के अवसर पर बनारस राय (पीड़ित) एक कुर्सी पर बैठे हुए थे। रात लगभग 8:30 बजे मिंटू राय ने पिस्तौल से बनारस राय पर गोली चला दी, जिससे उनके सीने के बाईं तरफ गंभीर चोट लगी। घायल बनारस राय को पहले सदर अस्पताल आरा और फिर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज किया गया।

मामले में कुल आठ गवाहों की गवाही ली गई, जिनमें पीड़ित के बेटे पंकज कुमार, जितेंद्र राय, सत्येंद्र राय, स्वयं पीड़ित बनारस राय, शिव पूजन राय, जाँच अधिकारी नागदेव, और दो डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार और संजय कुमार शामिल थे। मेडिकल रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि बनारस राय को गोली की गंभीर चोट लगी थी, जिसके कारण उनके पेट में दो लीटर खून जमा हो गया था और आंतों को भी नुकसान पहुंचा था।

बचाव पक्ष का तर्क था कि बारात के आने के दौरान दोनों तरफ से खुशी में गोलियां चलाई गई थीं और उसी दौरान बनारस राय को गलती से गोली लग गई। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनी विवाद के कारण मिंटू राय को झूठे मामले में फंसाया गया है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया क्योंकि गवाहों ने स्पष्ट रूप से बताया कि बारात के आने के समय कोई गोलीबारी नहीं हुई थी।

न्यायालय ने गवाहों की गवाही का विस्तृत विश्लेषण किया। हालांकि कुछ गवाहों ने कहा कि गोली पूर्व दिशा से चली थी जबकि पीड़ित ने दक्षिण दिशा से गोली चलने की बात कही, लेकिन न्यायालय ने इसे महत्वपूर्ण विसंगति नहीं माना। न्यायालय ने माना कि चूंकि कोई भी गवाह पीड़ित के बिल्कुल पास नहीं था, इसलिए सटीक दिशा का अनुमान लगाना उनके लिए मुश्किल था। पीड़ित की गवाही को सबसे महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि वे घटना के समय आरोपी के सामने थे।

न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि जाँच अधिकारी को घटनास्थल पर खून के धब्बे या खाली कारतूस नहीं मिले और पीड़ित के खून से सने कपड़े भी जब्त नहीं किए गए। लेकिन न्यायालय ने माना कि जाँच में कुछ कमियां होने के बावजूद अगर मुख्य गवाहों की गवाही विश्वसनीय है तो मामले को खारिज नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश आदित्य कुमार त्रिवेदी ने अपने फैसले में कहा कि दुश्मनी एक दोधारी तलवार की तरह है – यह झूठे मामले में फंसाने का कारण हो सकती है और साथ ही अपराध करने का मोटिव भी। इसलिए सिर्फ दुश्मनी के आधार पर किसी को दोषी या निर्दोष नहीं ठहराया जा सकता। मामले के सभी पहलुओं की जाँच करने के बाद ही सही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

न्यायालय ने घायल गवाह की गवाही को विशेष महत्व दिया क्योंकि यह माना जाता है कि जो व्यक्ति स्वयं घटना का शिकार हुआ है, वह झूठ नहीं बोलेगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि अगर एक गवाह की गवाही विश्वसनीय है तो उसके आधार पर भी दोषी ठहराया जा सकता है। साथ ही, रिश्तेदार गवाहों की गवाही को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वे पीड़ित के रिश्तेदार हैं।

न्यायालय ने पाया कि बिना किसी उकसावे के, जमीनी विवाद के कारण, एक शादी के अवसर पर जहाँ बारातियों की मौजूदगी थी, वहाँ जाकर गोली चलाना एक गंभीर अपराध है। इसलिए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया। मिंटू राय को धारा 307 के तहत 10 साल की सजा और 5000 रुपये जुर्माना (जुर्माना न भरने पर 2 महीने की अतिरिक्त सजा) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत 3 साल की सजा और 2000 रुपये जुर्माना (जुर्माना न भरने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा) बरकरार रखी गई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

इस प्रकार न्यायालय ने विस्तृत विश्लेषण के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में सफल रहा और अपील को खारिज कर दिया। अपीलकर्ता मिंटू राय जो हिरासत में है, को सजा पूरी होने तक जेल में ही रहना होगा।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:


https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MjQjMTkyMyMyMDE3IzEjTg==-U5W3Ek7Y6l0=

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News