मामला और पृष्ठभूमि
यह मामला बिहार के बेगूसराय जिले के बचवारा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें रामचंद्र महतो और सह-अभियुक्त प्रमोद राय पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने बचवारा थाना कांड संख्या 93/2016 के तहत छापेमारी के दौरान एक देशी कट्टा और पांच कारतूस बरामद किए। अभियुक्त को आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25(1-B)a/35 और 26/35 के तहत तीन साल की कठोर कारावास और ₹5000 जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले को जिला और सत्र न्यायालय ने भी सही ठहराया।
अभियुक्त की अपील
रामचंद्र महतो ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने यह दलील दी:
- तलाशी और जब्ती के दौरान स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया।
- बरामद हथियारों और कारतूसों को जब्त करने के बाद सील नहीं किया गया, जिससे उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना बनती है।
- कानूनन यह आवश्यक है कि तलाशी के दौरान गांव के स्वतंत्र लोगों को गवाह बनाया जाए।
अदालत की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने पाया कि पुलिस ने तलाशी और जब्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया। अदालत ने यह कहा:
- स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति और उनके बुलाने का प्रयास न करना, मामले को कमजोर बनाता है।
- बरामद हथियार और कारतूस बिना सील किए पुलिस थाने ले जाए गए, जिससे उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना रहती है।
- अभियोजन पक्ष द्वारा इस चूक की जिम्मेदारी को साबित करने में विफलता ने मामले को और कमजोर किया।
निर्णय
अदालत ने ट्रायल कोर्ट और अपील कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए रामचंद्र महतो को सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनकी जमानत को निरस्त कर दिया।
यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की अहमियत को रेखांकित करता है, खासकर जब कठोर कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है।
पूरा
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/NyMxNzYjMjAxOCMxI04=-fCO3c8z–am1–b–am1–s=


