हाई कोर्ट का फैसला: अपराधी को सजा
पटना उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति आदित्य कुमार त्रिवेदी ने आरोपी मिन्टू उर्फ तुलसी राय को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया। अभियुक्त पर 10 साल की कठोर कारावास की सजा और ₹5000 जुर्माना (जेल में दो महीने अतिरिक्त सजा की संभावना सहित) तथा आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की सजा और ₹2000 का जुर्माना लगाया गया।
मामला: जानलेवा हमला
24 मई 2014 को भोजपुर जिले के आघिया गांव में, अभियुक्त ने एक शादी समारोह के दौरान पीड़ित, बनारस राय, पर गोली चलाई। गोली पीड़ित के छाती के नीचे लगी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा। उसे तुरंत आरा सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (पीएमसीएच) रेफर किया गया।
अभियोजन पक्ष के मुख्य बिंदु
- पीड़ित बनारस राय ने आईसीयू में पुलिस को दिए बयान में घटना का जिक्र किया और अभियुक्त को गोली चलाने का आरोपी बताया।
- गवाहों में पीड़ित के बेटे, भाई, और पड़ोसी शामिल थे, जिन्होंने घटना की पुष्टि की।
- मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने से गंभीर चोट की पुष्टि हुई।
अभियुक्त का पक्ष
अभियुक्त ने दावा किया कि यह घटना जमीन विवाद के कारण उसे झूठा फंसाने का प्रयास है। उसने कहा कि बारात के दौरान दोनों पक्षों से हुई गोलीबारी में पीड़ित को गोली गलती से लगी।
न्यायालय की टिप्पणियां
- न्यायालय ने कहा कि घायल व्यक्ति का बयान महत्वपूर्ण होता है और घटना के समय उसकी मौजूदगी को साबित करता है।
- अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सबूत और गवाहों के बयान विश्वसनीय पाए गए।
- अभियुक्त के दावे को अस्वीकार करते हुए, न्यायालय ने पाया कि यह हमला जानबूझकर किया गया था।
निर्णय
अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा की पुष्टि की। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज में गंभीर प्रभाव डालती हैं, और सख्त सजा आवश्यक है।
यह निर्णय समाज में न्याय और अपराध पर नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करता है।
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