मामला और पृष्ठभूमि
यह मामला रंजन कुमार और उनकी पत्नी प्रीति कुमारी के बीच भरण-पोषण विवाद का है। प्रीति कुमारी और उनके नाबालिग बेटे ने बेगूसराय के फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की थी। परिवार न्यायालय ने आदेश दिया कि रंजन कुमार हर महीने ₹15,000 की राशि पत्नी और बेटे के भरण-पोषण के लिए प्रदान करें।
याचिकाकर्ता की अपील
रंजन कुमार ने इस आदेश के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। उन्होंने निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए:
- उन्हें मामले में पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
- फैमिली कोर्ट ने यह नहीं दिखाया कि प्रीति कुमारी और उनके बेटे को स्वयं के भरण-पोषण का कोई साधन नहीं है।
- ₹15,000 का भरण-पोषण उनकी आय और आवश्यकताओं के अनुसार अधिक है।
अदालत की टिप्पणियां
न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और निचली अदालत के रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद निम्नलिखित टिप्पणियां की:
- पर्याप्त अवसर: अदालत ने पाया कि रंजन कुमार को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए थे। उन्होंने लगातार सुनवाई की तारीखों पर उपस्थित नहीं होकर अपनी ओर से लापरवाही दिखाई।
- भरण-पोषण का आधार: गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि प्रीति कुमारी और उनका बेटा आर्थिक रूप से निर्भर थे और उनके पास कोई आय का स्रोत नहीं था।
- राशि की उचितता: अदालत ने कहा कि ₹15,000 की राशि उचित और न्यायसंगत है, खासकर जब यह साबित हुआ कि रंजन कुमार हिंदाल्को में कार्यरत हैं और ₹45,000 प्रति माह कमाते हैं।
अंतिम निर्णय
पटना उच्च न्यायालय ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही, यह निर्देश दिया कि हिंदाल्को कंपनी रंजन कुमार की आय से ₹15,000 प्रतिमाह की कटौती कर अदालत में जमा करे। पिछले बकाया के लिए, कंपनी को ₹25,000 प्रतिमाह जमा करने का आदेश दिया गया।
यह निर्णय महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि परिवार के कमजोर सदस्य अपनी जरूरतों के लिए उचित सहायता प्राप्त करें।
पूरा
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/NyMzMzcjMjAxOCMxI04=-cwALZLUgFd4=


