निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाईकोर्ट ने एक ठेकेदार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मामला निपटा दिया, क्योंकि याचिका के लंबित रहने के दौरान ही विभाग ने ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने भवन निर्माण विभाग, बिहार के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। उसका कहना था कि उसने विभागीय अनुबंध के अनुसार काम पूरा कर दिया, लेकिन उसका बकाया भुगतान अब तक नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार, विभाग पर ₹14,10,759 (चौदह लाख दस हज़ार सात सौ उनसठ रुपये) की राशि बकाया थी।
सुनवाई के दौरान विभाग ने कोर्ट को बताया कि यह पूरी राशि ठेकेदार को दे दी गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने भी इसकी पुष्टि की।
चूंकि भुगतान हो चुका था और याचिकाकर्ता का दावा पूरा हो गया था, इसलिए अदालत ने कहा कि याचिका जारी रखने की आवश्यकता नहीं है और इसे निपटा दिया गया।
यह आदेश 11 फरवरी 2021 को माननीय न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने पारित किया।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव
- ठेकेदारों और सप्लायरों के लिए: यह केस दिखाता है कि यदि बकाया भुगतान में देरी हो रही है तो हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने से विभाग पर दबाव पड़ता है और भुगतान जल्द हो सकता है।
- सरकारी विभागों के लिए: यह याद दिलाता है कि समय पर भुगतान न करने से विभाग को कोर्ट जाना पड़ सकता है, जिससे छवि और समय दोनों प्रभावित होते हैं।
- न्याय प्रणाली के लिए: यह मामला दर्शाता है कि कोर्ट का हस्तक्षेप अक्सर सरकारी विभागों को लंबित भुगतान करने के लिए मजबूर कर देता है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या याचिका जारी रह सकती थी जबकि पूरा भुगतान हो चुका था?
❌ नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता को उसकी पूरी राशि मिल गई, तो याचिका निरर्थक (infructuous) हो गई और इसे निपटा दिया गया।
मामले का शीर्षक
Krishna Kumar बनाम State of Bihar एवं अन्य
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 7398 of 2020
उद्धरण (Citation)
2021(1) PLJR 675
न्यायमूर्ति गण का नाम
- माननीय न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- श्री संजय कुमार सिंह — याचिकाकर्ता की ओर से
- श्री उदय शंकर शरण सिंह (GP-19) — राज्य की ओर से
निर्णय का लिंक
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