निविदा में तकनीकी खामियों पर पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने एक ठेकेदार द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि सरकारी निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों को सभी शर्तों और कानूनी औपचारिकताओं का पालन करना अनिवार्य है। इस मामले में, याचिकाकर्ता ने गया जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा उसकी तकनीकी बोली (Technical Bid) खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।

साल 2018 में एक निविदा निकाली गई थी जिसमें अस्पतालों की सफाई, कपड़े धोने का काम, और जनरेटर द्वारा विद्युत आपूर्ति जैसी सेवाओं का प्रावधान था। याचिकाकर्ता ने इस निविदा में हिस्सा लिया, परंतु उसकी तकनीकी बोली को तीन कारणों से खारिज कर दिया गया:

  1. वैध लेबर लाइसेंस (Labour License) की अनुपस्थिति,
  2. ईएसआई (ESI) से जुड़े कर्मचारियों की हिस्ट्री शीट की कमी,
  3. सेवा कर (Service Tax) की जानकारी अनुभव के अनुसार सही नहीं पाई गई।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि:

  • बोली के समय लेबर लाइसेंस आवश्यक नहीं था,
  • EPF रजिस्ट्रेशन होने से ESI की आवश्यकता नहीं थी,
  • सेवा कर की जांच निविदा समिति की जिम्मेदारी नहीं है।

हालाँकि, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पहले भी लेबर लाइसेंस धारक रह चुका था लेकिन उसने 2015 के बाद उसका नवीकरण नहीं कराया। कोर्ट ने यह भी कहा कि EPF और ESI अलग-अलग अधिनियमों के अंतर्गत आते हैं और दोनों का अनुपालन आवश्यक होता है। इसके अलावा, सेवा कर से जुड़ी जानकारियों और चालानों में भी याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत विवरण अनुभव के अनुरूप नहीं थे।

इस परिप्रेक्ष्य में, कोर्ट ने यह माना कि समिति द्वारा तकनीकी बोली खारिज करना उचित था। साथ ही, यह भी उल्लेखनीय था कि याचिकाकर्ता ने जिन ठेकेदारों को कार्यादेश दिया गया था, उनके खिलाफ कोई सीधा कानूनी चुनौती नहीं दी थी।

अतः, कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह निर्णय सरकारी विभागों के लिए यह स्पष्ट करता है कि निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए सख्ती से शर्तों का पालन कराना जरूरी है। ठेकेदारों को भी यह संदेश गया कि सरकारी अनुबंध प्राप्त करने के लिए सभी वैधानिक और तकनीकी शर्तों को गंभीरता से लेना होगा।

यह फैसला उन याचिकाओं पर भी अंकुश लगाता है जो सिर्फ कार्यादेश रद्द कराने के उद्देश्य से, बिना पर्याप्त कानूनी आधार के दायर की जाती हैं।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या तकनीकी खामियों के आधार पर बोली खारिज करना अनुचित था?
    ✔ कोर्ट ने माना कि खामियां वास्तविक थीं, निर्णय सही था।
  • क्या पुराने ठेकेदारों को लेबर लाइसेंस नवीनीकरण कराना जरूरी है?
    ✔ हाँ, पुराना अनुभव होने पर नवीकरण आवश्यक होता है।
  • क्या ESI और EPF में से एक होना काफी है?
    ❌ नहीं, दोनों अलग कानूनी प्रावधान हैं और निविदा में मांगे गए थे।
  • क्या याचिका बिना कार्यादेश रद्द करने की मांग के स्वीकार की जा सकती है?
    ❌ नहीं, याचिका अपूर्ण थी।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • CWJC No. 11952 of 2019

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • M/s Madras Securities Printers Pvt. Ltd. v. State of Bihar, 2014 (1) PLJR 227

मामले का शीर्षक

राज इन्फॉर्मेटिक्स कंस्ट्रक्शन बनाम स्टेट हेल्थ सोसाइटी एवं अन्य

केस नंबर

CWJC No. 14241 of 2018

उद्धरण (Citation)

2020 (1) PLJR 21

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय श्री न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • श्री आदित्य प्रकाश सहाय — याचिकाकर्ता की ओर से
  • श्री किशोर कुमार सिन्हा और श्री शशि शेखर — प्रतिवादी संख्या 4 से 6 की ओर से
  • श्री ज्ञान प्रकाश — प्रतिवादी संख्या 7 की ओर से
  • श्री सिया राम साहि — प्रतिवादी संख्या 8 की ओर से

निर्णय का लिंक

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTQyNDEjMjAxOCMxI04=-vLX4SG–ak1–LRr4=

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