निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कंपनी की दिवालियापन समाधान योजना (Resolution Plan) इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत मंज़ूर हो जाती है, तो उस योजना में शामिल नहीं किए गए पुराने सरकारी टैक्स और बकाया खत्म माने जाएंगे।
यह मामला एक इस्पात (स्टील) निर्माण कंपनी से जुड़ा था जो बिहार में कार्यरत है। वाणिज्य कर विभाग, बिहार ने कंपनी के खिलाफ वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए तीन अलग-अलग मूल्यांकन आदेश जारी किए थे। इन आदेशों में कंपनी से बिहार प्रवेश कर अधिनियम, 1993 और बिहार वैट अधिनियम, 2005 के तहत कुल ₹96 लाख से अधिक की टैक्स, ब्याज, जुर्माना और पेनल्टी की मांग की गई थी।
कंपनी ने इन आदेशों को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसका कहना था कि ये सभी टैक्स उस अवधि से जुड़े हैं जो उसके कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू होने से पहले की है। कंपनी का रिज़ोल्यूशन प्लान 5 सितंबर 2019 को NCLT द्वारा मंज़ूर किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि योजना की प्रभावी तिथि से पहले के किसी भी सरकारी बकाए को, यदि योजना में शामिल नहीं किया गया है, तो वह स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा।
कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि सार्वजनिक सूचना के बावजूद वाणिज्य कर विभाग ने CIRP के दौरान अपनी मांग प्रस्तुत नहीं की, इसलिए वे अब पुराने बकाया की मांग नहीं कर सकते।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि कंपनी अभी भी उसी ट्रेड नेम से व्यवसाय कर रही है और कर निर्धारण उनके ऑडिट के आधार पर हुआ है। इसीलिए कंपनी पर कर की देनदारी बनी हुई है।
लेकिन उच्च न्यायालय ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने घनश्याम मिश्रा और एस्सार स्टील जैसे मामलों में व्यवस्था दी है, उसी तरह इस मामले में भी कंपनी पर पुराने टैक्स लागू नहीं होंगे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक बार जब किसी कंपनी की रिज़ोल्यूशन योजना को NCLT द्वारा मंज़ूरी मिल जाती है, तो सरकार सहित सभी पक्ष उस योजना से बंधे होते हैं। ऐसे में पुराने कर दावों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
इसलिए, अदालत ने सभी मूल्यांकन आदेशों और टैक्स मांगों को निरस्त कर दिया।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह फैसला कई स्तरों पर अहम है:
- कंपनियों के लिए: यह उन्हें आश्वासन देता है कि IBC प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें पुराने बकाया से मुक्त संचालन का अवसर मिलेगा।
- सरकारी विभागों के लिए: यह एक चेतावनी है कि अगर वे समय रहते अपने दावे नहीं प्रस्तुत करते हैं, तो बाद में वे उन्हें वसूल नहीं कर सकते।
- आम जनता व निवेशकों के लिए: इससे कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ती है और व्यवसायों के पुनरुद्धार को समर्थन मिलता है।
यह फैसला IBC के उस उद्देश्य को मजबूत करता है जिसमें सफल समाधानकर्ता को “स्वच्छ शुरुआत” दी जाती है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- क्या CIRP के बाद पुराने टैक्स बकाया वसूले जा सकते हैं?
- ❌ नहीं, यदि वे रिज़ोल्यूशन योजना में शामिल नहीं हैं।
- क्या राज्य सरकार का टैक्स विभाग IBC के बाद मूल्यांकन आदेश जारी कर सकता है?
- ❌ नहीं, ऐसे आदेश वैधानिक नहीं माने जाएंगे।
- क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले राज्य सरकारों पर भी लागू होते हैं?
- ✅ हां, IBC की धारा 31 के अनुसार सभी पक्षों पर योजना बाध्यकारी होती है।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- Committee of Creditors of Essar Steel India Ltd. v. Satish Kumar Gupta, (2020) 8 SCC 531
- Ghanashyam Mishra & Sons Pvt. Ltd. v. Edelweiss Asset Reconstruction Co. Ltd., (2021) 9 SCC 657
- Uttam Value Steels Ltd. v. ACIT, Bombay HC
- Adhunik Metaliks Ltd. v. State of Odisha, Orissa HC
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- Ghanashyam Mishra & Sons Pvt. Ltd., (2021) 9 SCC 657
- Uttam Value Steels Ltd., Bombay HC
- Adhunik Metaliks Ltd., Orissa HC
मामले का शीर्षक
Bhushan Power and Steel Limited बनाम बिहार राज्य एवं अन्य
केस नंबर
CWJC No. 4624 of 2022 (साथ में CWJC Nos. 4637 और 4785 of 2022)
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद
माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश चंद्र मालवीय
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ता की ओर से:
- श्री सुनीत कुमार, अधिवक्ता (CWJC 4624 और 4637 में)
- श्री सिद्धार्थ प्रसाद, अधिवक्ता (CWJC 4785 में)
- प्रतिवादी राज्य की ओर से:
- श्री विकास कुमार, स्थायी अधिवक्ता (SC-11 और SC-5)
निर्णय का लिंक
eda291fe-2d92-4f7c-9051-b87f48c3f034.pdf
“यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी और आप बिहार में कानूनी बदलावों से जुड़े रहना चाहते हैं, तो Samvida Law Associates को फॉलो कर सकते हैं।”


