निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 28 नवम्बर 2022 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जो बिहार सरकार के कर्मचारियों में वेतन असमानता (Pay Anomaly) से संबंधित था। यह मामला लेटर्स पेटेंट अपील नंबर 951/2016 से जुड़ा था, जिसमें 1978 से 1986 के बीच सीधे भर्ती हुए पर्सनल असिस्टेंट्स (Personal Assistants) ने यह मांग की थी कि उनका वेतन उन स्टेनो-टाइपिस्ट्स के बराबर किया जाए जिन्हें बाद में पदोन्नति या अपग्रेडेशन देकर पर्सनल असिस्टेंट बना दिया गया था।
इस अपील को पहले एकल न्यायाधीश ने 18 फरवरी 2016 को खारिज कर दिया था। उसी आदेश के खिलाफ अपील करते हुए कर्मचारियों ने यह तर्क दिया कि एक ही पद पर कार्यरत होने के बावजूद उन्हें अपने जूनियर (जो बाद में अपग्रेड हुए) से कम वेतन मिल रहा है, जो अनुचित है।
खंडपीठ — जिसमें माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथ्री और माननीय न्यायमूर्ति पूर्णेन्दु सिंह शामिल थे — ने एकल न्यायाधीश के निर्णय को बरकरार रखा और अपील को खारिज कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले के सभी अपीलकर्ता बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में पर्सनल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे। इनकी नियुक्ति सीधे भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से 1978 से 1986 के बीच हुई थी।
दूसरी ओर, एक अलग श्रेणी के कर्मचारी थे — स्टेनो-टाइपिस्ट्स, जिन्हें वर्ष 1987 में विभागीय परीक्षा पास करने के बाद अपग्रेड (Upgraded) कर पर्सनल असिस्टेंट बना दिया गया था।
इस तरह इस पद में तीन अलग-अलग श्रेणियाँ बन गईं:
- स्टेनोग्राफर ग्रेड-I और ग्रेड-II, जिन्हें वर्ष 1977 में परीक्षा पास करने के बाद इस पद में समायोजित किया गया।
- सीधे भर्ती पर्सनल असिस्टेंट्स (Direct Recruits) — यानी याचिकाकर्ता।
- स्टेनो-टाइपिस्ट्स, जिन्हें 07 अगस्त 1987 को अपग्रेड करके पर्सनल असिस्टेंट बनाया गया।
समस्या तब उत्पन्न हुई जब यह पाया गया कि तीसरी श्रेणी — यानी अपग्रेड किए गए स्टेनो-टाइपिस्ट्स — का वेतन सीधे भर्ती हुए पर्सनल असिस्टेंट्स से अधिक हो गया है। इसका कारण था कि उन्हें A.C.P. (Assured Career Progression) योजना का लाभ मिला, जबकि सीधे भर्ती कर्मियों को यह लाभ नहीं मिला।
सीधे भर्ती कर्मचारियों ने इसे वेतन असमानता (Pay Anomaly) बताया और मांग की कि उनके वेतन को भी उन अपग्रेड कर्मचारियों के समान बढ़ाया जाए — जिसे Stepping Up of Pay कहा जाता है।
कर्मचारियों की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि:
- वे और अपग्रेड किए गए कर्मचारी, दोनों ही एक ही पद (पर्सनल असिस्टेंट) पर कार्यरत हैं।
- दोनों समान कार्य और जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
- इसलिए वेतन में फर्क रखना समान कार्य, समान वेतन के सिद्धांत के खिलाफ है।
उन्होंने दो न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया:
- Commissioner and Secretary to Government of Haryana v. Ram Swarup Ganda (2006) — जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि सीनियर कर्मचारी को अपने जूनियर से कम वेतन मिल रहा है, तो “स्टेपिंग अप” के जरिए असमानता को दूर किया जा सकता है।
- Tejbir Singh Dagar v. Union of India (दिल्ली उच्च न्यायालय, 2014) — जिसमें कहा गया कि समान पद पर कार्यरत सीनियर को जूनियर से कम वेतन देना अनुचित है।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि A.C.P. योजना उन कर्मचारियों को दी जाती है जिन्हें लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलती — ताकि उन्हें कुछ वित्तीय राहत मिल सके।
इस योजना के तहत स्टेनो-टाइपिस्ट्स, जिन्होंने वर्षों तक एक ही पद पर कार्य किया और फिर 1987 में अपग्रेड हुए, उन्हें यह लाभ मिला।
जबकि सीधे भर्ती पर्सनल असिस्टेंट्स पहले से ही उच्च वेतनमान पर थे और उन्हें ऐसी राहत की आवश्यकता नहीं थी।
इसलिए दोनों समूहों की तुलना करना अनुचित है, क्योंकि उनकी सेवा पृष्ठभूमि (service history) और भर्ती का तरीका (mode of recruitment) पूरी तरह अलग है।
न्यायालय की विचार प्रक्रिया
खंडपीठ ने विस्तार से समझाया कि A.C.P./M.A.C.P. योजना का उद्देश्य “पदोन्नति देना नहीं, बल्कि लंबे समय तक पद पर रुके कर्मचारियों की आर्थिक निराशा को कम करना” है।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की तुलना गलत आधार पर की गई है क्योंकि:
- सीधे भर्ती हुए पर्सनल असिस्टेंट्स ने पहले ही उच्च पद पर नियुक्ति पाई थी।
- जबकि जिन कर्मचारियों को अपग्रेड किया गया, वे वर्षों तक निचले पद (स्टेनो-टाइपिस्ट) पर रहे थे।
इसलिए, दोनों समूहों की सेवा शर्तें, अनुभव और वेतन वृद्धि का आधार अलग-अलग है।
कोर्ट ने भारत सरकार के एक सर्कुलर का उल्लेख करते हुए कहा:
“वेतन समानता (Stepping Up of Pay) केवल तब लागू की जा सकती है जब —
- वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों एक ही कैडर में हों;
- दोनों की सेवा स्थिति, नियुक्ति तिथि और योग्यता समान हो;
- वेतन असमानता केवल वेतन पुनरीक्षण या पदोन्नति के कारण उत्पन्न हुई हो।”
यहाँ ऐसा कोई मामला नहीं था — असमानता इसलिए नहीं हुई कि किसी का पदोन्नति वेतन बढ़ा, बल्कि इसलिए हुई कि दोनों की सेवा यात्रा (career progression) अलग थी।
न्यायालय ने कहा कि:
“जब भर्ती का स्रोत (source of recruitment) और सेवा विवरण (service particulars) भिन्न हैं, तो तुलना करना उचित नहीं। वेतन असमानता केवल तब दूर की जा सकती है जब दोनों कर्मचारी समान परिस्थिति में हों।”
अंतिम निर्णय
उच्च न्यायालय ने कहा कि:
- याचिकाकर्ता अपने दावे के लिए कानूनी या तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत नहीं कर सके।
- A.C.P. लाभ केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो लंबे समय तक पदोन्नति से वंचित रहें।
- सीधे भर्ती हुए पर्सनल असिस्टेंट्स को इसका दावा नहीं हो सकता।
इसलिए, अपील खारिज (Dismissed) कर दी गई और एकल न्यायाधीश का आदेश बरकरार (Affirmed) रखा गया।
निर्णय का महत्व और प्रभाव
यह फैसला बिहार सरकार और अन्य सरकारी विभागों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश देता है।
- कर्मचारियों के लिए सबक:
केवल समान पद या समान काम करने से समान वेतन का अधिकार स्वतः नहीं बनता। भर्ती का तरीका और सेवा पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण कारक हैं। - सरकार के लिए दिशा:
यह फैसला स्पष्ट करता है कि A.C.P./M.A.C.P. योजनाएँ केवल स्थिरता (stagnation) दूर करने के लिए हैं, न कि सभी कर्मचारियों के वेतन बराबर करने के लिए। - वित्तीय प्रशासन के लिए राहत:
इस फैसले से उन कई संभावित वित्तीय बोझों से बचाव होता है जो “समान वेतन” की गलत व्याख्या से उत्पन्न हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, न्यायालय ने यह दोहराया कि “समान कार्य” का अर्थ “समान भर्ती मार्ग” और “समान सेवा शर्तों” के साथ ही लागू होता है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या सीधे भर्ती पर्सनल असिस्टेंट्स को अपग्रेडेड स्टेनो-टाइपिस्ट्स के समान वेतन का अधिकार है?
• नहीं। क्योंकि दोनों की भर्ती प्रक्रिया और सेवा यात्रा अलग है। - क्या A.C.P. योजना सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू की जा सकती है?
• नहीं। यह केवल उन पर लागू होती है जिन्हें पदोन्नति लंबे समय तक नहीं मिली।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- Commissioner & Secretary to Government of Haryana v. Ram Swarup Ganda (2006)
- Tejbir Singh Dagar v. Union of India (Delhi High Court, 2014)
मामले का शीर्षक
Akhileshwar Prasad & Others v. The State of Bihar & Others
केस नंबर
Letters Patent Appeal No. 951 of 2016
(Arising out of C.W.J.C. No. 4501 of 2014)
उद्धरण (Citation)
2023 (1) PLJR 136
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथ्री
माननीय श्री न्यायमूर्ति पूर्णेन्दु सिंह
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- अपीलकर्ताओं की ओर से: श्री कुमार कौशिक, अधिवक्ता
- राज्य की ओर से: श्री सरोज कुमार शर्मा, सहायक अधिवक्ता जनरल (AAG-3)
निर्णय का लिंक
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