निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय ने 22 मार्च 2021 को एक महत्त्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई हिन्दू सरकारी कर्मचारी अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करता है, तो उसकी दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन (Family Pension) का अधिकार नहीं होगा।
यह मामला एक महिला याचिकाकर्ता से जुड़ा था जो खुद को एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक की दूसरी पत्नी बताती थी। उनके पति, जो मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक थे, 15 जनवरी 1974 को नियुक्त हुए थे और 30 नवंबर 2012 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद 9 अप्रैल 2013 को पेंशन भुगतान आदेश जारी हुआ, जिसमें दोनों पत्नियों के फोटो लगे थे। बाद में शिक्षक की मृत्यु 18 अगस्त 2015 को हुई, जिससे उनके पीछे दो महिलाएँ रह गईं — पहली पत्नी और यह याचिकाकर्ता (दूसरी पत्नी)।
विवाद तब शुरू हुआ जब वरिष्ठ लेखा अधिकारी, बिहार, पटना ने 13 मार्च 2019 को एक आदेश जारी किया कि पारिवारिक पेंशन केवल पहली पत्नी को दी जाएगी। दूसरी पत्नी को कोई भुगतान नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को रद्द करने और खुद को भी पारिवारिक पेंशन का हिस्सा देने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।
उसने तर्क दिया कि उसने अपने पति से सरकारी अनुमति के बाद विवाह किया था, इसलिए उसे बिहार वित्त विभाग के परिपत्र संख्या 149/2010-1549 दिनांक 27 जून 2011 के तहत पेंशन का अधिकार है।
लेकिन पहली पत्नी (प्रतिवादी संख्या 8) ने इसका जोरदार विरोध किया। उसने कहा कि दूसरी पत्नी झूठे दस्तावेज़ दिखा रही है और किसी भी सरकारी अनुमति का कोई प्रमाण नहीं है। उसने यह भी कहा कि 2011 का जो वित्त विभाग का परिपत्र है, वह केवल मुस्लिम कर्मचारियों पर लागू होता है, क्योंकि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून (Mohammedan Law) में एक से अधिक विवाह की अनुमति होती है। हिन्दू धर्म में ऐसा विवाह अवैध होता है। उसने कलावती देवी बनाम बिहार राज्य [2014 (3) PLJR 587] का हवाला दिया, जिसमें यही बात कही गई थी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रतिवादी 3 व 4) ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा कि कार्यालय के रिकॉर्ड में यह बात दर्ज नहीं है कि मृत शिक्षक को दूसरी शादी की कोई सरकारी अनुमति दी गई थी।
माननीय न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह ने सारे दस्तावेज़ों और दलीलों की समीक्षा की और पाया कि:
- याचिकाकर्ता के पास दूसरी शादी की सरकारी अनुमति का कोई प्रमाण नहीं है।
- बिहार पेंशन नियमावली के नियम 186 के अनुसार, पारिवारिक पेंशन केवल कानूनी पत्नी (पहली पत्नी) को ही दी जा सकती है।
- जो वित्त विभाग का 2011 वाला परिपत्र है, वह केवल मुस्लिम कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान है, क्योंकि उनके व्यक्तिगत कानून में एक से अधिक विवाह मान्य हैं।
न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के प्रसिद्ध निर्णय रमेश्वरी देवी बनाम बिहार राज्य व अन्य [(2000) 2 SCC 431] का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करता है, तो दूसरी पत्नी को परिवारिक पेंशन का अधिकार नहीं होता।
इस आधार पर न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता का दावा कानूनन टिकाऊ नहीं है।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
- यह फैसला साफ करता है कि हिन्दू धर्म में पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी अवैध होती है और ऐसी शादी से जुड़ी महिला को सरकारी लाभ (जैसे पेंशन) नहीं मिल सकता।
- यह निर्णय सरकारी विभागों के लिए मार्गदर्शक है कि पेंशन देने से पहले विवाह की कानूनी वैधता की जांच अवश्य करें।
- इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि सरकारी कोष से केवल वैध हकदारों को ही भुगतान किया जाए।
- यह निर्णय उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सरकारी सेवा के दौरान या बाद में नियमों का उल्लंघन करके दूसरी शादी करते हैं।
- आम जनता के लिए यह एक महत्वपूर्ण संदेश है कि सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए विवाह कानूनी रूप से वैध होना चाहिए।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- क्या हिन्दू सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन की हकदार है?
— नहीं। नियम 186 के तहत केवल पहली पत्नी ही वैध है। - क्या सरकारी अनुमति लेकर दूसरी शादी की जा सकती है?
— याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई प्रमाण नहीं दिया कि उसे अनुमति मिली थी। - क्या 2011 का बिहार वित्त विभाग परिपत्र इस मामले में लागू होता है?
— नहीं। वह केवल मुस्लिम कर्मचारियों पर लागू होता है। - क्या सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय इस विषय पर लागू है?
— हाँ। रमेश्वरी देवी बनाम बिहार राज्य [(2000) 2 SCC 431] में यही कहा गया था कि दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन का अधिकार नहीं।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- कलावती देवी बनाम बिहार राज्य, 2014 (3) PLJR 587
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- रमेश्वरी देवी बनाम बिहार राज्य व अन्य, (2000) 2 SCC 431
मामले का शीर्षक
Dulari Devi v. The State of Bihar & Ors.
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 14389 of 2019
उद्धरण (Citation)
2021(2) PLJR 392
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ता की ओर से: श्री मुरारी नारायण चौधरी, श्री विजय कुमार
- राज्य की ओर से: श्री अशुतोष रंजन पांडेय (AAG-15), श्री राकेश नारायण सिंह (AC to AAG-15)
- लेखा महानियंत्रक की ओर से: डॉ. आनंद कुमार
- प्रतिवादी संख्या 8 की ओर से: श्री अभय कुमार ठाकुर, श्री अरुणेंद्र कुमार ठाकुर, सुश्री सुक्रिती कुमारी
निर्णय का लिंक
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