निर्णय की सरल व्याख्या
यह मामला बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) के तीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ा था। ये सभी कर्मचारी मूल रूप से Accountant (लेखाकार) थे, लेकिन विभाग ने उन्हें कई वर्षों तक Accounts Officer (Look After) और एक मामले में Deputy Director of Accounts जैसे उच्च पदों का अतिरिक्त कार्य सौंपा।
इन कर्मचारियों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की क्योंकि विभाग ने उन्हें 20% ऑफिशिएटिंग भत्ता (Officiating Allowance) देने से इनकार कर दिया। यह भत्ता उस स्थिति में दिया जाता है जब कोई कर्मचारी अपने मूल पद से ऊपर के पद पर काम करता है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था:
- उन्होंने वर्षों तक उच्च जिम्मेदारी वाले पदों पर काम किया, इसलिए उन्हें भी भत्ता मिलना चाहिए।
- उनके जैसे ही अन्य कर्मचारी, जैसे गणेश लाल और बाद में गनौरी पासवान, को यह भत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर दिया गया था।
विभाग का पक्ष था:
- याचिकाकर्ताओं ने अपनी सेवा अवधि या सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद भत्ता मांगने की कोई अर्जी नहीं दी थी।
- बिहार सर्विस कोड की धारा 103 के अनुसार, जब उच्च पद समान ऑफिस या सामान्य प्रोमोशन की लाइन में आता है, तब भत्ता नहीं दिया जाता।
- गणेश लाल और गनौरी पासवान के मामले विशेष थे, जिन्हें अन्य मामलों का आधार नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का निष्कर्ष:
अदालत ने पाया कि विभाग का रुख असंगत और भेदभावपूर्ण है। एक ओर विभाग ने गनौरी पासवान को 2020 में वही भत्ता दिया, वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की वैसी ही मांग को खारिज कर रहा है। यह असमानता कानून के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि अगर विभाग ने समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को लाभ दिया है, तो इन्हीं याचिकाकर्ताओं का मामला भी न्यायपूर्ण ढंग से विचार किया जाना चाहिए।
इसलिए अदालत ने विभाग को आदेश दिया कि आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं की मांग पर विचार करते हुए एक विस्तृत और स्वतंत्र आदेश पारित किया जाए।
सीधे शब्दों में, अदालत ने कहा: “अगर आपने कुछ कर्मचारियों को भत्ता दिया है तो बाकी कर्मचारियों को वैसा ही लाभ देने से इनकार नहीं कर सकते। सबके साथ समान व्यवहार जरूरी है।”
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
- कर्मचारियों के लिए: यह फैसला बताता है कि समान परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान लाभ मिलना चाहिए।
- सरकारी कंपनियों के लिए: यह निर्णय याद दिलाता है कि एक जैसे मामलों में अलग-अलग फैसले लेना भेदभाव है। ऐसी नीतियों से मुकदमेबाजी बढ़ती है।
- भविष्य के लिए: यह फैसला दिखाता है कि सेवा के दौरान भत्ता मांगना बेहतर है, लेकिन अगर एक बार किसी कर्मचारी को लाभ मिल चुका है तो अन्य कर्मचारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या याचिकाकर्ताओं को भी वैसा ही ऑफिशिएटिंग भत्ता मिलना चाहिए जैसा अन्य कर्मचारियों को मिला?
• अदालत का निर्णय: हाँ, विभाग को उनके मामले पर विचार करना ही होगा। - क्या देर से दावा करने पर अधिकार खत्म हो जाता है?
• अदालत का निर्णय: नहीं। जब विभाग ने अन्य कर्मचारियों को लाभ दिया है, तो केवल देरी के आधार पर याचिकाकर्ताओं को वंचित नहीं किया जा सकता।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- गणेश लाल बनाम बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड, 2016(2) PLJR 370।
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- गणेश लाल बनाम बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड, 2016(2) PLJR 370।
- CWJC No. 16750/2019 (गनौरी पासवान बनाम BSPHCL), निर्णय दिनांक 02.09.2019।
मामले का शीर्षक
Rajendra Mahto & Ors. बनाम The Bihar State Power Holding Company Ltd. & Ors.
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 20478 of 2018
उद्धरण (Citation)
2021(2) PLJR 44
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद (मौखिक निर्णय दिनांक 25-02-2021)
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ताओं की ओर से: श्री प्रशांत सिन्हा, अधिवक्ता
- प्रतिवादियों की ओर से: श्री रंजीत सिन्हा, अधिवक्ता
निर्णय का लिंक
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