पटना उच्च न्यायालय का निर्णय: एनएमसी द्वारा निजी मेडिकल कॉलेज की अनुमति रद्द करने पर बड़ा फैसला — 2022

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2022 को एक अहम फैसला सुनाया, जो राधा देवी जागेश्वरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुज़फ्फरपुर से जुड़ा था। यह कॉलेज National Medical Commission (NMC) द्वारा दी गई Letter of Permission (LoP) के रद्द होने के बाद विवादों में आया।

यह मामला पाँच रिट याचिकाओं में सुना गया — जिनमें कॉलेज प्रबंधन, संचालित करने वाली सोसाइटी और उस कॉलेज में दाखिला पाए कई विद्यार्थियों की याचिकाएँ शामिल थीं। एनएमसी की Medical Assessment and Rating Board (MARB) ने 18 अप्रैल 2022 को आदेश पारित किया था, जिसके तहत कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई और 150 MBBS छात्रों का एडमिशन रद्द कर दिया गया।

पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

  • कॉलेज को Jageshwari Memorial Institute of Speech and Hearing नामक सोसाइटी द्वारा चलाया जा रहा था।
  • बिहार सरकार ने 3 जुलाई 2019 को कॉलेज को Essentiality Certificate जारी किया था।
  • इसके बाद NMC ने 22 सितंबर 2021 को कॉलेज को 150 MBBS सीटों के लिए अनुमति दी।
  • लेकिन 26–27 नवंबर 2021 को हुई अचानक निरीक्षण (surprise inspection) में कॉलेज में 85% फैकल्टी की कमी, 90% रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी, और कम मरीजों की संख्या पाई गई।
  • कॉलेज ने सफाई दी कि उस दिन प्रबंधन की अध्यक्ष की माताजी के निधन के कारण स्टाफ अनुपस्थित था और दोबारा निरीक्षण करने का आग्रह किया।
  • MARB ने जवाब अस्वीकार कर दिया और 18 अप्रैल 2022 को LoP रद्द कर दी।
  • जबकि NMC ने पहले ही 15 फरवरी 2022 को बिहार सरकार को निर्देश दिया था कि इस कॉलेज में छात्रों का एडमिशन न करें, फिर भी BCECE Board ने अप्रैल 2022 की मॉप-अप काउंसलिंग में छात्रों का नामांकन कर दिया।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

  • कॉलेज का कहना था कि NMC Act, 2019 की धारा 26(1)(f) के अनुसार MARB केवल एडमिशन रोकने या जुर्माना लगाने का अधिकार रखती है, LoP रद्द करने का नहीं।
  • उन्होंने कहा कि कमियाँ दूर कर दी गई हैं और NMC को फिर से निरीक्षण (reinspection) करना चाहिए था।
  • छात्रों का कहना था कि वे निर्दोष हैं, इसलिए उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए, न कि निजी कॉलेजों में।

NMC और राज्य सरकार का पक्ष

  • NMC ने कहा कि इतने बड़े स्तर की कमियाँ मेडिकल शिक्षा के मानकों को प्रभावित करती हैं, इसलिए अनुमति रद्द करना सही था।
  • आयोग ने बताया कि राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश के बावजूद छात्रों को दाखिला दे दिया, जो कानूनन गलत था।
  • बिहार सरकार ने स्वीकार किया कि उसने भ्रमवश छात्रों का दाखिला कराया और NMC से कोई स्पष्ट उत्तर न मिलने पर काउंसलिंग जारी रखी।

उच्च न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने विस्तृत कानूनी विवेचना की और कहा:

  1. MARB के अधिकारों का दायरा:
    न्यायालय ने धारा 26, 28 और 29 का अध्ययन करते हुए कहा कि MARB के पास अनुमति देने और वापस लेने दोनों का अधिकार है यदि कॉलेज मानकों का पालन नहीं करता।
  2. राज्य सरकार की गलती:
    कोर्ट ने माना कि राज्य और BCECE बोर्ड ने NMC के आदेश की अवहेलना की और छात्रों का प्रवेश कराना गलत था।
  3. छात्रों का अधिकार:
    कोर्ट ने कहा कि चूँकि छात्रों का दाखिला अप्रैल 2022 की मॉप-अप काउंसलिंग में हुआ, जो NMC के पत्र के काफी बाद थी, इसलिए ये एडमिशन कानूनी रूप से अवैध थे और इनसे कोई “अधिकार” उत्पन्न नहीं होता।
  4. नए निरीक्षण का असर:
    सितंबर 2022 में NMC ने दोबारा निरीक्षण किया, जिसमें कॉलेज में कोई बड़ी कमी नहीं पाई गई। इसके बाद MARB ने 2022–23 सत्र के लिए नई अनुमति जारी कर दी।
    न्यायालय ने माना कि जब NMC ने दूसरे बैच को अनुमति दे दी है, तो पहले वर्ष (2021–22) का LoP रद्द होना व्यवहारिक रूप से निरर्थक (redundant) हो गया।

अंतिम निर्णय:

  • न्यायालय ने कहा कि NMC द्वारा 2021–22 का LoP वापस लेने में कोई प्रक्रिया दोष नहीं था, लेकिन चूँकि कॉलेज को 2022–23 सत्र के लिए अनुमति मिल चुकी है, इसलिए कॉलेज अब पुनः मान्यता प्राप्त माना जाएगा।
  • जो छात्र पहले से पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अब नियमित छात्र (regular students) के रूप में माना जाएगा और विश्वविद्यालय को उनके पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने की माँग अस्वीकार कर दी गई, क्योंकि ऐसा करने से अधिक मेधावी (meritorious) छात्रों के अधिकार प्रभावित होते।

निर्णय का महत्व और प्रभाव

  • मेडिकल कॉलेजों के लिए संदेश: निरीक्षण रिपोर्ट को हल्के में न लें। झूठे दस्तावेज़ या अधूरी व्यवस्थाएँ कॉलेज की अनुमति रद्द करा सकती हैं।
  • राज्य सरकार के लिए चेतावनी: किसी भी सत्र में प्रवेश प्रक्रिया NMC के निर्देशों के अनुरूप ही होनी चाहिए। अन्यथा दाखिले अमान्य माने जाएँगे।
  • छात्रों के लिए सबक: यदि कॉलेज की मान्यता विवादित है, तो सावधानीपूर्वक प्रवेश लें; न्यायालय राहत देते समय मेरिट को प्राथमिकता देगा।
  • NMC की भूमिका स्पष्ट: MARB केवल एडमिशन रोकने तक सीमित नहीं; आवश्यक होने पर LoP भी रद्द कर सकती है।

कानूनी मुद्दे और न्यायालय का निर्णय

  • क्या MARB पहले दी गई अनुमति (LoP) वापस ले सकती है?
    ✔ हाँ, NMC Act, 2019 की धारा 26 और 28 के अनुसार MARB के पास यह अधिकार है।
  • क्या बिहार सरकार का छात्रों को एडमिशन देना उचित था?
    ❌ नहीं। यह NMC के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन था।
  • क्या छात्रों को सरकारी कॉलेजों में समायोजित किया जा सकता है?
    ❌ नहीं। ऐसा करने से अधिक अंकों वाले उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन होगा।
  • क्या बाद की पुनः अनुमति से पहले के छात्रों की स्थिति वैध हो जाती है?
    ✔ हाँ, क्योंकि नई अनुमति से कॉलेज की स्थिति बहाल हो जाती है और पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई नियमित मानी जाएगी।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Rajiv Memorial Academic Welfare Society v. Union of India, (2016) 11 SCC 522
  • Swamy Devi Dayal Hospital and Dental College v. Union of India, (2014) 13 SCC 506
  • Royal Medical Trust v. Union of India, (2015) 10 SCC 19
  • Government of A.P. v. Medwin Educational Society, (2004) 1 SCC 86
  • Dr. M.K. Shah Medical College v. Union of India, 2022 SCC OnLine Delhi 938
  • Santosh Trust v. National Medical Commission, 2022 SCC OnLine Delhi 749

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • Medical Council of India v. Kalinga Institute of Medical Sciences, (2016) 11 SCC 530
  • Modern Dental College & Research Centre v. State of Madhya Pradesh, (2016) 7 SCC 353

मामले का शीर्षक

Radha Devi Jageshwari Memorial Medical College & Hospital बनाम National Medical Commission एवं अन्य

केस नंबर

CWJC Nos. 7058, 8548, 7426, 8358, और 11946 of 2022

उद्धरण (Citation)

2023 (1) PLJR 434

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता कॉलेज की ओर से: श्री मृगांक मौली (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री संकैत, श्री वरुण सिंह, श्री अभय कुमार
  • छात्रों की ओर से: श्री वाई.वी. गिरी (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री विकास कुमार, सुश्री नीतू झा, श्री कुमार रविश
  • राज्य की ओर से: श्री रामाधार सिंह (GP-25)
  • NMC/MARB की ओर से: श्री कुमार प्रिय रंजन, श्री अंकुर अपूर्व सिंह
  • आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी की ओर से: श्री आनंद कुमार ओझा, श्री अशोक कुमार कर्ण
  • BCECE बोर्ड की ओर से: श्री प्रसून सिन्हा

निर्णय का लिंक

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