पटना उच्च न्यायालय का निर्णय: अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद छुट्टी नकदीकरण (Leave Encashment) का अधिकार – 2023

निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय ने इस फैसले में यह स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को दंडस्वरूप अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया है, तो क्या उसे छुट्टी नकदीकरण (Leave Encashment) से वंचित किया जा सकता है? यह मामला एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और उसके एक पूर्व कर्मचारी के बीच का था। बैंक ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कर्मचारी को छुट्टी नकदीकरण का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन न्यायालय की खंडपीठ (Division Bench) ने बैंक की अपील खारिज कर दी और कहा कि ऐसा लाभ रोका नहीं जा सकता।

पृष्ठभूमि
कर्मचारी ने सेवानिवृत्ति के बाद अपनी बकाया छुट्टी का नकदीकरण और उस पर ब्याज की मांग की थी। एकल न्यायाधीश ने 2020 में उसके पक्ष में फैसला सुनाया था। बैंक ने इस आदेश के खिलाफ 2021 में एलपीए (Letters Patent Appeal) दाखिल की। बैंक का तर्क था कि चूंकि कर्मचारी को सेवा नियमों के तहत दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी, इसलिए उसे छुट्टी नकदीकरण का अधिकार नहीं है।

न्यायालय ने बैंक के नियमों—Dakshin Bihar Gramin Bank (Officers and Employees) Service Regulations, 2010—का गहराई से अध्ययन किया। बैंक का कहना था कि “Regulation 67” के तहत केवल सामान्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ही यह लाभ मिल सकता है, न कि जिन्हें दंडस्वरूप सेवानिवृत्त किया गया हो।

न्यायालय का विश्लेषण
खंडपीठ ने पाया कि Regulation 67 (Lapse of Leave) में यह कहा गया है कि जब कोई कर्मचारी बैंक की सेवा से “retire” करता है, तो उसे उसकी जमा छुट्टियों का नकद भुगतान किया जाएगा (कुछ शर्तों के अधीन)। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि इस प्रावधान में “सेवानिवृत्ति” शब्द के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है—चाहे वह सामान्य हो या दंडस्वरूप। इसलिए बैंक यह नहीं कह सकता कि अनिवार्य सेवानिवृत्त कर्मचारी को यह लाभ नहीं मिलेगा।

इसके अलावा, न्यायालय ने यह भी कहा कि Regulation 39 (Penalties) में कहीं भी छुट्टी नकदीकरण रोकने को दंड के रूप में नहीं बताया गया है। यदि किसी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी गई है और उसके बाद उसे छुट्टी नकदीकरण से भी वंचित कर दिया जाए, तो यह “दोहरी सजा” (dual penalty) होगी, जो नियमों में अनुमत नहीं है।

Regulation 45 (Disciplinary proceedings after retirement) में यह कहा गया है कि यदि अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो तो सेवानिवृत्ति लाभ अस्थायी रूप से रोके जा सकते हैं, लेकिन अंतिम आदेश के बाद लाभ दिए जाने होंगे। बैंक यह नहीं दिखा सका कि कर्मचारी की छुट्टी नकदीकरण को स्थायी रूप से रोकने का कोई नियम है। इसलिए न्यायालय ने कहा कि दंड की कार्यवाही समाप्त हो जाने के बाद कर्मचारी का यह अधिकार बना रहता है।

अंततः न्यायालय ने बैंक की अपील खारिज कर दी और एकल न्यायाधीश का आदेश बरकरार रखा। इससे यह सिद्ध हुआ कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति पाने वाले कर्मचारी को भी छुट्टी नकदीकरण का अधिकार है, जब तक कि नियमों में इसका स्पष्ट अपवाद न दिया गया हो।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
• सरकारी और सार्वजनिक संस्थान: यह निर्णय बताता है कि सेवा नियमों को शब्दशः लागू करना आवश्यक है। अधिकारीगण नियमों में जो लिखा है, उससे अधिक दंड नहीं दे सकते। यदि किसी संस्था को किसी लाभ को रोकना है, तो उसे अपने नियमों में स्पष्ट रूप से लिखना होगा।
• कर्मचारियों के लिए संदेश: यदि किसी को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया है, तो भी उसे वे सभी सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे जो नियमों में निषिद्ध नहीं हैं, जैसे—ग्रेच्युटी या छुट्टी नकदीकरण।
• प्रशासनिक अधिकारियों के लिए: अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान लाभ अस्थायी रूप से रोके जा सकते हैं, लेकिन अंतिम आदेश के बाद उन्हें रोकना अवैध माना जाएगा।

कानूनी मुद्दे और निर्णय
• क्या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारी छुट्टी नकदीकरण से वंचित किया जा सकता है?
– न्यायालय का निर्णय: नहीं। Regulation 67 सभी प्रकार की सेवानिवृत्तियों पर समान रूप से लागू है। “Retire” शब्द में दंडस्वरूप सेवानिवृत्ति भी शामिल है।
• क्या Regulation 45 के तहत लाभ स्थायी रूप से रोके जा सकते हैं?
– न्यायालय का निर्णय: नहीं। यह केवल कार्यवाही के लंबित रहने तक अस्थायी रोक की अनुमति देता है।
• क्या यह दोहरी सजा होगी?
– न्यायालय का निर्णय: हाँ, यदि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद छुट्टी नकदीकरण रोका जाए तो यह दोहरा दंड माना जाएगा।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
— उपलब्ध जानकारी में कोई नहीं बताया गया।

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
— उपलब्ध जानकारी में कोई नहीं बताया गया।

मामले का शीर्षक
एल.पी.ए. संख्या 33/2021 (सीडब्ल्यूजेसी संख्या 17150/2017 से उत्पन्न) – पटना उच्च न्यायालय, निर्णय दिनांक 02 जनवरी 2023।

केस नंबर
Letters Patent Appeal No. 33 of 2021 (arising out of CWJC No. 17150 of 2017)

उद्धरण (Citation)
2023 (1) PLJR 321

न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
• अपीलकर्ता बैंक की ओर से – श्री महेश नारायण प्रभात, वरिष्ठ अधिवक्ता; श्री प्रवीण प्रभाकर, अधिवक्ता
• प्रतिवादी कर्मचारी की ओर से – श्री रामाकांत सिंह, अधिवक्ता

निर्णय का लिंक
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