पटना हाई कोर्ट का फैसला: गोपालगंज में होमगार्ड बहाली जिला-स्तर पर ही होगी – 2024

निर्णय की सरल व्याख्या

इस मामले में कई आवेदकों ने पटना हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। इन सभी ने होमगार्ड की भर्ती के लिए वर्ष 2011 में निकले विज्ञापन (विज्ञापन संख्या 02/2011) के अनुसार आवेदन किया था। विज्ञापन में साफ लिखा था कि बहाली जिला-स्तर पर होगी, यानी पूरा जिला एक इकाई मानी जाएगी और उसी आधार पर मेधा सूची (merit list) बनेगी।

लेकिन बाद में चयन प्रक्रिया के दौरान सरकारी अधिकारियों ने जिला-स्तर की बजाय ब्लॉक-स्तर पर बहाली की प्रक्रिया चला दी। इसका परिणाम यह हुआ कि जिला स्तर पर अधिक अंक लाने वाले उम्मीदवार भी केवल इसलिए बाहर हो गए क्योंकि उनके ब्लॉक में कम सीटें थीं। दूसरी ओर, कुछ ब्लॉकों में कम मेरिट वाले उम्मीदवार चयनित हो गए।

यही बात उम्मीदवारों को गलत लगी और उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि:

  • कानून और नियमों के अनुसार होमगार्ड की नियुक्ति जिला-स्तर पर होती है, न कि ब्लॉक-स्तर पर।
  • अगर विज्ञापन में जिला स्तर की बात कही गई है, तो भर्ती भी उसी नियम के अनुसार होनी चाहिए।
  • बीच में नियम बदलना या प्रक्रिया बदलना संविधान के Article 14 और Article 16 का उल्लंघन है, जो समान अवसर का अधिकार देते हैं।

सरकार की तरफ से यह तर्क दिया गया कि चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और बहाली को बदलना संभव नहीं है।

लेकिन याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि इसी तरह का एक मामला पहले भी कई जिलों (मुज़फ्फरपुर, सुपौल, वैशाली, समस्तीपुर, भागलपुर आदि) में उठा था, और उस मामले में भी हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह साफ कर दिया था कि:

  • होमगार्ड की बहाली जिला इकाई पर होगी
  • ब्लॉक के आधार पर विभाजन नियमों के खिलाफ है
  • केंद्र सरकार की 2007 की गाइडलाइनें भी बिहार होमगार्ड अधिनियम 1947 और नियम 1953 को नहीं बदल सकतीं

इसलिए, उसी कानूनी सिद्धांत को इस मामले पर भी लागू होना चाहिए।

पटना हाई कोर्ट ने क्या कहा?

13 अगस्त 2024 को सुनाए गए निर्णय में माननीय न्यायमूर्ति डॉ. अंशुमान ने विस्तार से पूरा विषय देखा और कहा कि:

  1. विज्ञापन जिला-स्तरीय था, इसलिए पूरी चयन प्रक्रिया भी जिला-स्तर की होनी चाहिए थी।
  2. सरकार द्वारा ब्लॉक-स्तर पर बहाली करना कानून और नियमों के विपरीत है।
  3. चयन समिति भी जिला स्तर पर गठित की जानी चाहिए थी, जैसा कि 1953 के नियमों में कहा गया है।
  4. सरकार यह कहकर बच नहीं सकती कि “बहाली प्रक्रिया पूरी हो चुकी है”, क्योंकि गलत प्रक्रिया कभी वैध नहीं हो सकती, चाहे वह पूरी क्यों न हो गई हो।

क्या पूरी बहाली रद्द हो सकती थी?

कानून के अनुसार, जब चयन प्रक्रिया नियमों के विपरीत हो, तो पूरी बहाली रद्द की जा सकती है। लेकिन कोर्ट ने एक संतुलित रास्ता चुना, क्योंकि अगर पूरी बहाली रद्द कर दी जाती, तो कई ऐसे लोग भी प्रभावित हो जाते जो इस मुकदमे में पक्षकार नहीं हैं।

इसलिए कोर्ट ने वही तरीका अपनाया जो उसने पहले वाले मामलों में अपनाया था:

  • कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं का मामला विशेष रूप से देखा जाए।
  • यदि वे पात्र हैं और योग्यता रखते हैं, तो उन्हें जिला-स्तर की रिक्तियों में समायोजित किया जाए।
  • यह प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए।

इस प्रकार, हाई कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि जिन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ, उन्हें न्याय मिले — बिना कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को उलट-पलट किया जाए।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह फैसला पूरे बिहार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि:

1. सरकार मनमानी तरीके से भर्ती प्रक्रिया नहीं बदल सकती

अगर विज्ञापन में जिला स्तर लिखा है, तो बहाली ब्लॉक स्तर पर नहीं की जा सकती। यह पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है।

2. कानूनी नियम सर्वोपरि हैं

सरकार अपनी सुविधा के अनुसार गाइडलाइन या प्रक्रिया नहीं अपना सकती। नियम 1953 और अधिनियम 1947 को मानना अनिवार्य है।

3. आगामी भर्तियों पर असर पड़ेगा

अब बिहार में होने वाली सभी होमगार्ड बहालियों में जिला स्तर की प्रक्रिया ही अपनानी होगी। इससे भ्रम और विवाद कम होंगे।

4. योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिला

कई उम्मीदवार वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह फैसला उनकी उम्मीदों को पूरा करता है।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव

  • यह फैसला आम लोगों को भरोसा देता है कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और समान अवसर का अधिकार सुरक्षित है।
  • सरकार के अधिकारियों को भी यह संदेश जाता है कि वे विज्ञापन और नियमों से बाहर जाकर कोई विकल्प नहीं अपना सकते।
  • जिले के हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है, जो ब्लॉक-वार सीटें होने के कारण बाहर कर दिए गए थे।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • मुद्दा: क्या जिला-स्तर का विज्ञापन होने के बाद ब्लॉक-स्तर पर बहाली की जा सकती है?
    निर्णय: नहीं। यह नियमों और संविधान के खिलाफ है।
  • मुद्दा: क्या केंद्र सरकार की 2007 की गाइडलाइनें बिहार होमगार्ड नियम 1953 से ऊपर हैं?
    निर्णय: नहीं। नियम हमेशा गाइडलाइन पर भारी होते हैं।
  • मुद्दा: क्या पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी जानी चाहिए थी?
    निर्णय: सिद्धांत रूप में हां, लेकिन व्यावहारिकता के कारण केवल याचिकाकर्ताओं को विशेष राहत दी गई।
  • मुद्दा: क्या सरकार पूरी हो चुकी प्रक्रिया का बचाव कर सकती है?
    निर्णय: नहीं। गलत प्रक्रिया सही नहीं हो जाती।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • LPA No. 645/2021 (State of Bihar vs. Manjay Kumar)
  • CWJC No. 11645/2019

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • B.N. Nagarajan vs State of Karnataka (1979)
  • Ashok Ram Parhad vs State of Maharashtra (2023)
  • Nair Service Society vs Dr T. Beermasthan (2009)
  • CWJC No. 11645/2019
  • LPA No. 645/2021

मामले का शीर्षक

Smt. Krishnavati Devi & Others vs State of Bihar & Others

केस नंबर

CWJC No. 159 of 2018

उद्धरण (Citation)

2025 (2) PLJR 314

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय श्री न्यायमूर्ति डॉ. अंशुमान

निर्णय का लिंक

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