निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में फैसला सुनाया जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने यह मांग की थी कि उनकी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) की पेंशन उनके वास्तविक वेतन के आधार पर तय की जाए, न कि पुराने वेतन सीमा (₹6500) के आधार पर।
याचिकाकर्ता बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के कर्मचारी रह चुके थे। यह निगम लंबे समय तक एक छूट प्राप्त संस्था (Exempted Establishment) के रूप में काम करता था। इन कर्मचारियों का कहना था कि उन्होंने और उनके नियोक्ता ने 1997 से ही ऊँचे वेतन पर भविष्य निधि (EPF) में योगदान दिया था। लेकिन, जब पेंशन तय हुई तो वह सिर्फ अधिकतम सीमा (₹6500) पर ही गिनी गई। उनका तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट का आर.सी. गुप्ता मामला (2018) उनके पक्ष में है और उन्हें ऊँचे वेतन पर पेंशन मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर, ईपीएफओ ने कहा कि —
- यह निगम 1987 से 2004 तक छूट प्राप्त संस्था था। उस दौरान भविष्य निधि का प्रबंधन ट्रस्ट करता था।
- कानून के अनुसार, जब तक कर्मचारी और नियोक्ता संयुक्त विकल्प (Joint Option) नहीं भरते, तब तक ऊँचे वेतन पर योगदान मान्य नहीं होता।
- बिना विकल्प के, पेंशन हमेशा सीमा (₹5000, बाद में ₹6500) तक ही गिनी जाएगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने आर.सी. गुप्ता और बाद में बड़े संविधान पीठ स्तर पर आए सुनील कुमार बी. मामला (2022-23) में साफ कहा है कि जिन कर्मचारियों ने 01.09.2014 से पहले कोई विकल्प नहीं भरा, वे अब ऊँची पेंशन का दावा नहीं कर सकते।
हाई कोर्ट ने पूरे कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अध्ययन किया। न्यायालय ने कहा कि —
- ऊँचे वेतन पर पेंशन पाने के लिए सबसे पहले धारा 26(6) के तहत संयुक्त विकल्प जरूरी है।
- उसके बाद ही पेंशन योजना की धारा 11(3) या संशोधित 11(4) के तहत ऊँचे वेतन पर पेंशन संभव है।
- याचिकाकर्ताओं ने 2007–2008 में रिटायरमेंट ले लिया था, यानी 01.09.2014 से बहुत पहले।
- उन्होंने कोई संयुक्त विकल्प भी नहीं भरा था।
- इस स्थिति में, सुप्रीम कोर्ट के सुनील कुमार बी. केस के अनुसार, उन्हें ऊँची पेंशन का अधिकार नहीं है।
हालांकि, अदालत ने यह राहत दी कि यदि याचिकाकर्ताओं के वेतन से गलती से अधिक कटौती कर ली गई है और उसे ईपीएफओ को भेजा गया है, तो वह राशि 6% वार्षिक ब्याज सहित 8 सप्ताह के भीतर लौटाई जाए।
संक्षेप में, अदालत ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया और विकल्प के, ऊँचे वेतन पर पेंशन का दावा मान्य नहीं है।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए:
यह फैसला साफ करता है कि सिर्फ ऊँचे वेतन से कटौती होना पर्याप्त नहीं है। यदि विकल्प (joint option) भरे बिना रिटायरमेंट हो गया है, तो अब पेंशन बढ़वाने का दावा नहीं किया जा सकता। खासकर वे कर्मचारी जो 01.09.2014 से पहले रिटायर हो चुके हैं, वे इस मार्ग से लाभ नहीं ले सकते।
सरकार और ईपीएफओ के लिए:
यह फैसला ईपीएफओ के लिए राहत है क्योंकि अब ऐसे हजारों केसों में स्पष्ट दिशा मिल गई है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि गलत तरीके से पैसा काटा गया है, तो उसे लौटाना जरूरी है। इससे आगे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी।
नियोक्ताओं और छूट प्राप्त संस्थाओं के लिए:
यह फैसला बताता है कि सिर्फ बोर्ड का कोई प्रस्ताव या मौखिक सहमति पर्याप्त नहीं है। जब तक कानून में बताए गए विकल्प की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक ऊँची पेंशन संभव नहीं है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या 01.09.2014 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को बिना विकल्प दिए ऊँची पेंशन मिल सकती है?
✦ अदालत का निर्णय: नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे कर्मचारी पहले ही योजना से बाहर हो चुके माने जाएंगे। - क्या बोर्ड का आंतरिक निर्णय या सहमति विकल्प की जगह ले सकता है?
✦ अदालत का निर्णय: नहीं। 2006 में निगम ने ऐसा प्रस्ताव लिया था लेकिन वह 2012 में वापस ले लिया गया। यह मान्य विकल्प नहीं था। - यदि अतिरिक्त कटौती कर ली गई हो तो क्या राहत मिलेगी?
✦ अदालत का निर्णय: हाँ। पैसा 6% ब्याज के साथ लौटाया जाएगा।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- आर.सी. गुप्ता बनाम ईपीएफओ, (2018) 14 SCC 809
- राम नंदन प्रसाद बनाम भारत संघ, 2014 (3) PLJR 98 (पटना)
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- ईपीएफओ बनाम सुनील कुमार बी., 2023 (1) PLJR 104 (सुप्रीम कोर्ट)
- आर.सी. गुप्ता बनाम ईपीएफओ, (2018) 14 SCC 809
- राम नंदन प्रसाद बनाम भारत संघ, 2014 (3) PLJR 98 (पटना)
मामले का शीर्षक
सुधीर कुमार बनाम भारत संघ एवं अन्य (छूट प्राप्त संस्था के कर्मचारियों की पेंशन संबंधी विवाद)
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 20195 of 2019
उद्धरण (Citation)
2025 (1) PLJR 560
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति हरीश कुमार (फैसला दिनांक: 19-12-2024)
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- श्री निर्मल कुमार — याचिकाकर्ता की ओर से
- डॉ. अंजनी प्रसाद सिंह, CGC — भारत संघ की ओर से
- श्री प्रशांत सिन्हा — ईपीएफओ की ओर से
- श्री संजय प्रसाद — बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड की ओर से
निर्णय का लिंक
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