निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि यदि डिक्री प्राप्त करने वाले व्यक्ति (Decree Holder) द्वारा किसी मृत व्यक्ति (Judgment Debtor) के विरुद्ध डिक्री की कार्यवाही जारी रहती है, तो वह कार्यवाही मृत्यु के कारण अपने आप समाप्त (Abate) नहीं होती।
इस मामले में एक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा कि उनके पिता और अन्य दो व्यक्ति, जिनके खिलाफ डिक्री जारी हुई थी, अब मृत हैं और उनके उत्तराधिकारी (Legal Representatives) को रिकॉर्ड में नहीं लाया गया है। इसलिए, चल रही डिक्री की कार्यवाही को समाप्त कर देना चाहिए।
मूल मामला 1986 के एक आदेश से जुड़ा हुआ था, जिसमें एक ज़मीन को कब्जे में लेने के लिए डिक्री जारी की गई थी। इस डिक्री को 2002 में क्रियान्वित (Execute) करने की कोशिश की गई। इस बीच सभी डिक्री के खिलाफ पक्ष मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे।
याचिकाकर्ता ने 2018 में निचली अदालत में एक आवेदन देकर कहा कि मृत व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं चल सकती, इसलिए इसे समाप्त किया जाए। लेकिन निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद यह मामला पटना हाई कोर्ट में लाया गया।
हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 50 और आदेश 22 के नियम 12 के अनुसार, डिक्री की कार्यवाही मृत्यु के बाद स्वतः समाप्त नहीं होती। इसके लिए एक सीमित समय में उत्तराधिकारी को रिकॉर्ड में लाना आवश्यक नहीं होता। डिक्री प्राप्तकर्ता चाहे तो उन्हें बाद में भी जोड़ सकता है, या फिर एक नई कार्यवाही शुरू कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के V. Uthirapathi बनाम Ashrab Ali (AIR 1998 SC 1168) के फैसले का हवाला देते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति में कार्यवाही समाप्त नहीं होती। लेकिन उचित यह होता कि निचली अदालत डिक्री प्राप्तकर्ता को एक समय सीमा देती कि वह उत्तराधिकारियों को रिकॉर्ड में लाए, और यदि वह ऐसा न करता, तो कार्यवाही को निष्क्रियता के आधार पर खारिज किया जा सकता था, लेकिन मृत्यु के आधार पर नहीं।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि यदि कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध कोर्ट से डिक्री जारी हुई है, मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, तो उस कारण से डिक्री की कार्यवाही स्वतः समाप्त नहीं होगी। बिहार में ज़मीन विवाद और वर्षों पुराने मुकदमे आम हैं। यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देगा।
यह फैसला खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो कोर्ट के आदेश को लागू कराने में देरी के कारण चिंतित रहते हैं। अब स्पष्ट है कि मृत्यु के बावजूद भी डिक्री की वैधता बनी रहती है और उत्तराधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- प्रश्न: क्या डिक्री की कार्यवाही मृत व्यक्ति के विरुद्ध समाप्त हो जाती है?
- निर्णय: नहीं, डिक्री की कार्यवाही मृत्यु के कारण समाप्त नहीं होती।
- प्रश्न: क्या निचली अदालत ने याचिकाकर्ता की आपत्ति खारिज कर गलती की?
- निर्णय: नहीं, निचली अदालत का निर्णय सही था।
- प्रश्न: क्या अदालत को उत्तराधिकारी को रिकॉर्ड में लाने के लिए समय सीमा देनी चाहिए थी?
- निर्णय: हां, अदालत को समय सीमा देनी चाहिए थी, लेकिन कार्यवाही समाप्त नहीं की जा सकती थी।
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- V. Uthirapathi बनाम Ashrab Ali, AIR 1998 SC 1168
मामले का शीर्षक
Vikash Yadav @ Vikash Kumar v. Kailash Chandra Sinha & Others
केस नंबर
Civil Miscellaneous Jurisdiction No. 558 of 2019
उद्धरण (Citation)
2020 (1) PLJR 51
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार सिंह
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- श्री जगन्नाथ सिंह — याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता
- (प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता का उल्लेख नहीं)
निर्णय का लिंक
https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/NDQjNTU4IzIwMTkjMSNO-Bjlm3s8akW0=
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