निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय ने 2022 में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि बैंक कर्मचारी की मृत्यु यदि किसी नई दयालु नियुक्ति योजना (compassionate appointment scheme) के लागू होने से कुछ साल पहले भी हुई हो, तो भी उसके आश्रित उस योजना के तहत नौकरी पाने के हकदार हो सकते हैं — बशर्ते कि मृत्यु योजना लागू होने से पाँच साल के भीतर हुई हो।
मामला एक ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक (Regional Rural Bank) के कर्मचारी से जुड़ा था, जो शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। उनकी मृत्यु 12 अक्टूबर 2016 को ड्यूटी के दौरान हो गई। मृतक कर्मचारी के बेटे/आश्रित ने 13 जून 2019 को दयालु नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इस बीच, बैंक ने नई “दयालु नियुक्ति योजना, 2019” जारी की थी, जो 21 मई 2019 से प्रभावी हुई थी।
बैंक ने 27 जुलाई 2020 को आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चूंकि कर्मचारी की मृत्यु नई योजना लागू होने से पहले हुई थी, इसलिए यह योजना लागू नहीं होगी। आश्रित ने इस निर्णय को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
न्यायालय ने बैंक की यह दलील अस्वीकार कर दी। न्यायालय ने कहा कि योजना की धारा 8 (Clause 8.1) के अनुसार, आवेदन मृत्यु की तिथि से पाँच साल के भीतर किया जा सकता है। यह धारा उन मामलों के लिए ही बनी है जहाँ मृत्यु योजना के लागू होने से पहले हुई हो, लेकिन पाँच साल के अंदर आती हो।
न्यायालय ने कहा कि यदि इस धारा का अर्थ केवल योजना लागू होने के बाद की मौतों पर लगाया जाए, तो यह प्रावधान निरर्थक हो जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन परिवारों ने हाल ही में (पाँच साल के भीतर) अपने कमाने वाले सदस्य को खोया है, उन्हें भी राहत मिल सके।
इसी आधार पर न्यायालय ने बैंक का अस्वीकृति आदेश (27.07.2020) रद्द कर दिया और बैंक के चेयरमैन को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार करें और एक कारणयुक्त निर्णय (reasoned order) जारी करें।
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि दयालु नियुक्ति योजना का उद्देश्य केवल नियम पालन नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से परिवार की तत्काल आर्थिक सहायता करना है। न्यायालय ने यह भी कहा कि बैंकों और सरकारी संस्थाओं को ऐसी योजनाओं को यथार्थवादी और संवेदनशील ढंग से लागू करना चाहिए।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह फैसला न केवल ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों के परिवारों के लिए बल्कि पूरे राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र (public sector) के कर्मचारियों के लिए राहत देने वाला है।
- परिवारों के लिए राहत: यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि जिन परिवारों के सदस्य की मृत्यु योजना लागू होने से पहले हुई, वे भी पाँच साल की अवधि के भीतर आवेदन कर सकते हैं।
- बैंकों के लिए दिशा-निर्देश: बैंक प्रशासन अब केवल तकनीकी कारणों से आवेदन खारिज नहीं कर सकेगा। उन्हें प्रत्येक मामले पर निष्पक्ष और मानवीय दृष्टिकोण से विचार करना होगा।
- सरकारी संस्थाओं के लिए उदाहरण: यह फैसला एक नजीर है कि योजनाएँ बनाते समय संक्रमण काल (transitional period) को ध्यान में रखा जाए, ताकि किसी भी परिवार के साथ अन्याय न हो।
- आम जनता के लिए संदेश: यह बताता है कि यदि आपके परिवार के सदस्य की मृत्यु नई योजना से कुछ साल पहले हुई है, तो भी आप पात्र हो सकते हैं, यदि आवेदन निर्धारित अवधि के भीतर किया गया हो।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- मुद्दा 1: क्या 2019 की नई दयालु नियुक्ति योजना (Clause 8.1) उन मौतों पर भी लागू होती है जो योजना लागू होने से पाँच साल पहले हुई थीं?
निर्णय: हाँ। न्यायालय ने कहा कि इस धारा का उद्देश्य ही ऐसे मामलों को शामिल करना है। इसे सीमित अर्थ में पढ़ना कानून की भावना के विपरीत होगा। - मुद्दा 2: क्या बैंक का आदेश (27.07.2020) — जिसमें कहा गया कि यह योजना लागू नहीं होगी — सही था?
निर्णय: नहीं। न्यायालय ने आदेश को रद्द किया और बैंक को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के भीतर नए सिरे से निर्णय दे।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- Central Bank of India v. Urmila Devi & Ors., LPA No. 649 of 2017 — इस मामले का उल्लेख यह दिखाने के लिए किया गया कि पाँच साल के भीतर हुई मौतों पर भी योजना लागू होती है।
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- Central Bank of India v. Urmila Devi & Ors., LPA No. 649 of 2017 (पटना उच्च न्यायालय, डिवीजन बेंच)।
- SLP (C) Nos. 31878–31879/2017, दिनांक 13.08.2019 (सुप्रीम कोर्ट) — सुप्रीम कोर्ट ने डिवीजन बेंच के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे वह अंतिम रूप से मान्य हो गया।
मामले का शीर्षक
याचिकाकर्ता बनाम उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक एवं अन्य
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 20345 of 2021
उद्धरण (Citation)
2023 (1) PLJR 336
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ता की ओर से: सुश्री पुनीता कुमारी सिंह, अधिवक्ता
- प्रतिवादी बैंक की ओर से: श्री महेंद्र पाठक एवं श्री नागेन्द्र उपाध्याय, अधिवक्ता
निर्णय का लिंक
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