पटना हाई कोर्ट का फैसला: बिहार STET 2019 की पुनः परीक्षा को चुनौती खारिज — 2021

निर्णय की सरल व्याख्या

यह मामला उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने बिहार माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) 2019 में भाग लिया था। यह परीक्षा जनवरी 2020 में OMR शीट पर आयोजित हुई थी, लेकिन बाद में अनियमितताओं के कारण बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इसे रद्द कर दिया। इसके बाद बोर्ड ने सितंबर 2020 में ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड से पुनः परीक्षा कराई।

कुछ अभ्यर्थियों ने इस पुनः परीक्षा की वैधता को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनका मुख्य तर्क था कि पुनः परीक्षा से पहले कोई विस्तृत पाठ्यक्रम (syllabus) जारी नहीं किया गया, जिससे अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।

पृष्ठभूमि

  • STET 2019 की पहली परीक्षा जनवरी 2020 में हुई, लेकिन उसे रद्द कर दिया गया।
  • जून 2020 में बोर्ड ने राज्य सरकार को पत्र लिखा कि परीक्षा ऑनलाइन कराई जाए और साथ ही नया पाठ्यक्रम तय करने की अनुमति भी मांगी।
  • सरकार ने केवल ऑनलाइन मोड की मंजूरी दी, लेकिन नया पाठ्यक्रम बनाने की अनुमति नहीं दी।
  • पुनः परीक्षा 09.09.2020 से 21.09.2020 तक आयोजित हुई।
  • अभ्यर्थियों का कहना था कि बिना पाठ्यक्रम के परीक्षा आयोजित करना गलत है और इससे परीक्षा अनुचित हो जाती है।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

  • पाठ्यक्रम की कमी: उन्होंने कहा कि हर प्रतियोगी परीक्षा के लिए स्पष्ट पाठ्यक्रम होना ज़रूरी है।
  • पूर्व आदेश का हवाला: उन्होंने CWJC No. 5650/2020 में पटना हाई कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि प्रश्न केवल विज्ञापन के अनुरूप होने चाहिए।
  • CTET से तुलना: उन्होंने कहा कि CTET जैसी परीक्षाओं में विस्तृत पाठ्यक्रम दिया जाता है, जबकि STET विज्ञापन में केवल पात्रता बताई गई थी, पाठ्यक्रम नहीं।

राज्य और बोर्ड का पक्ष

  • एडवोकेट जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही जनवरी 2020 की परीक्षा में बिना आपत्ति के शामिल हो चुके थे।
  • जब कोई अभ्यर्थी स्वयं किसी परीक्षा में भाग लेता है, तो बाद में उसके नियमों और प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठा सकता।
  • पुनः परीक्षा कोई नई भर्ती नहीं थी, बल्कि उसी पुराने विज्ञापन (06.09.2019) के आधार पर हुई। इसलिए बीच में नया पाठ्यक्रम लागू करना संभव नहीं था।
  • सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले (जैसे Ashok Kumar v. State of Bihar, 2017 और Chandra Prakash Tiwari, 2002) कहते हैं कि जो अभ्यर्थी परीक्षा में भाग लेते हैं, वे बाद में उसकी वैधता पर सवाल नहीं उठा सकते।

हाई कोर्ट का विश्लेषण

माननीय न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा:

  • याचिकाकर्ताओं ने मूल विज्ञापन 06.09.2019 के आधार पर आवेदन किया था और जनवरी 2020 की परीक्षा भी दी थी। उस समय उन्होंने पाठ्यक्रम की कमी पर कोई आपत्ति नहीं की।
  • परीक्षा रद्द होने और पुनः परीक्षा घोषित होने के बाद उन्होंने यह मुद्दा उठाया, जो देर से किया गया और स्वीकार्य नहीं है।
  • भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद विज्ञापन की शर्तें “जमी हुई” (frozen) मानी जाती हैं। बीच में बदलाव, जैसे नया पाठ्यक्रम, लागू नहीं किया जा सकता।
  • याचिकाकर्ताओं की चुनौती केवल बोर्ड और राज्य सरकार के बीच आंतरिक पत्राचार पर आधारित थी, जिससे उनके कोई कानूनी अधिकार पैदा नहीं होते।

हाई कोर्ट का फैसला

  • याचिका खारिज कर दी गई।
  • अंतरिम आदेश के तहत रोके गए परिणामों की घोषणा की अनुमति दी गई।
  • हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को पारदर्शिता के लिए विस्तृत पाठ्यक्रम देना चाहिए, ताकि CTET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की तर्ज पर मानक बने।

निर्णय का महत्व और प्रभाव

  1. अभ्यर्थियों के लिए सीख: अगर कोई अभ्यर्थी किसी परीक्षा में भाग ले लेता है, तो बाद में उसकी शर्तों पर सवाल नहीं उठा सकता।
  2. परीक्षा प्राधिकरणों के लिए संकेत: भले ही यह याचिका खारिज हुई, कोर्ट ने यह सलाह दी कि भविष्य में स्पष्ट पाठ्यक्रम जारी करना ज़रूरी है।
  3. कानूनी सिद्धांत: इस फैसले ने “Estoppel” के सिद्धांत को दोहराया — यानी जिसने नियमों के तहत परीक्षा दी, वह बाद में उन्हीं नियमों को चुनौती नहीं दे सकता।
  4. शिक्षा नीति पर असर: भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता और पाठ्यक्रम की स्पष्टता की उम्मीद की जा सकती है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या बिना पाठ्यक्रम के STET 2019 की पुनः परीक्षा अमान्य थी?
    ❌ नहीं। चूंकि परीक्षा मूल विज्ञापन के अनुसार हुई, इसलिए इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
  • क्या परीक्षा में भाग लेने के बाद अभ्यर्थी उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठा सकते हैं?
    ❌ नहीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले इसकी अनुमति नहीं देते।
  • क्या परिणाम रोके जा सकते थे?
    ❌ नहीं। कोर्ट ने परिणाम घोषित करने का रास्ता साफ कर दिया।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • CWJC No. 5650/2020 (पटना हाई कोर्ट)

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • Ashok Kumar v. State of Bihar, (2017) 4 SCC 357
  • Chandra Prakash Tiwari v. Shakuntala Shukla, (2002) 6 SCC 127
  • Union of India v. S. Vinodh Kumar, (2007) 8 SCC 100
  • Manish Kumar Shahi v. State of Bihar, (2010) 12 SCC 576
  • Ramesh Chandra Shah v. Anil Joshi, (2013) 11 SCC 309

मामले का शीर्षक

Aditya Prakash एवं Santosh Kumar बनाम State of Bihar एवं अन्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 8520 of 2020

उद्धरण (Citation)

2021(2) PLJR 273

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह (निर्णय दिनांक 04.03.2021)

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री राजेंद्र नारायण (वरिष्ठ अधिवक्ता), सुश्री अंजु कुमारी @ अंजु नारायण, श्री अनंत कुमार सिन्हा
  • राज्य की ओर से: श्री एस. के. रंजन, AC to GP-17
  • बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से: श्री ललित किशोर (एडवोकेट जनरल), श्री ज्ञान शंकर
  • हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से: श्री पी. के. शाही (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री विपिन कुमार, श्री शशांक चंद्र, श्री सूर्या स्वेताभ

निर्णय का लिंक

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