पटना उच्च न्यायालय द्वारा औद्योगिक इकाई को सशर्त पुनः संचालन की अनुमति (पटना उच्च न्यायालय, 2023)

निर्णय की सरल व्याख्या

यह निर्णय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित किया गया है, जिसमें एक औद्योगिक इकाई और बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के बीच उत्पन्न विवाद का समाधान किया गया है। यह मामला उस स्थिति से जुड़ा है जब किसी औद्योगिक इकाई का आवंटन या कब्जा प्रशासनिक आदेश के माध्यम से रद्द कर दिया जाता है और इकाई उस आदेश को चुनौती देती है।

इस मामले में याचिकाकर्ता एक औद्योगिक इकाई थी, जो BIADA द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्र में स्थित थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके व्यवसाय में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है और उसके विरुद्ध 29.11.2022 को पारित अपीलीय आदेश (अपील संख्या 145/22) के आधार पर आगे की दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि उसके व्यवसाय में हस्तक्षेप रोका जाए और उक्त अपीलीय आदेश एवं उसके आधार पर की गई सभी कार्रवाइयों को रद्द किया जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब याचिकाकर्ता ने 25.01.2023 को एक पूरक हलफनामा (supplementary affidavit) दाखिल किया। इस हलफनामे में याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष एक स्पष्ट और लिखित ‘अंडरटेकिंग’ (undertaking) दी। इसका अर्थ यह था कि याचिकाकर्ता ने स्वयं यह वचन दिया कि यदि उसे पुनः कब्जा दिया जाता है या रद्दीकरण आदेश वापस लिया जाता है, तो वह निश्चित समय-सीमा के भीतर अपनी औद्योगिक इकाई को चालू करेगा।

इस अंडरटेकिंग में कई महत्वपूर्ण शर्तें थीं। याचिकाकर्ता ने कहा कि BIADA द्वारा कब्जा सौंपे जाने या रद्दीकरण आदेश वापस लिए जाने के बाद 60/90 दिनों के भीतर वह व्यावसायिक उत्पादन (commercial production) शुरू कर देगा। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो BIADA को यह अधिकार होगा कि वह शांतिपूर्ण ढंग से खाली कब्जा वापस ले ले।

इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने यह भी स्वीकार किया कि छह/नौ महीनों के भीतर वह इकाई को कम से कम 80% क्षमता तक पूरी तरह चालू करेगा, जैसा कि मूल आवंटन शर्तों में स्वीकृत उत्पाद के लिए निर्धारित है। साथ ही, उसने यह भी वचन दिया कि BIADA के सभी बकाया देयों को कब्जा मिलने या आदेश वापसी की तिथि से चार सप्ताह के भीतर चुका देगा।

अंडरटेकिंग में यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता सभी वैधानिक (statutory) दायित्वों का पालन करेगा, जिसमें कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा, जीएसटी, बिजली बिल तथा अन्य सरकारी देयताएँ शामिल हैं। यदि याचिकाकर्ता इन शर्तों का पालन नहीं करता, तो BIADA को न केवल कब्जा वापस लेने का अधिकार होगा, बल्कि वह उस औद्योगिक इकाई या भू-खंड को किसी तीसरे पक्ष को पुनः आवंटित भी कर सकता है। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के सभी अधिकार समाप्त हो जाएंगे।

सबसे गंभीर बात यह थी कि याचिकाकर्ता ने यह भी स्वीकार किया कि अंडरटेकिंग का उल्लंघन करने पर उसके विरुद्ध अवमानना (contempt of court) की कार्यवाही शुरू की जा सकती है, जो एक गंभीर कानूनी परिणाम है।

BIADA की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि यदि याचिका को याचिकाकर्ता की अंडरटेकिंग के आधार पर निपटा दिया जाए, तो प्राधिकरण को कोई आपत्ति नहीं है। न्यायालय ने इस सुझाव को स्वीकार किया और याचिकाकर्ता की अंडरटेकिंग को विधिवत अभिलेख पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अंडरटेकिंग के उल्लंघन के सभी परिणामों के बारे में उसके अधिवक्ता के माध्यम से अवगत करा दिया गया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता शर्तों का पालन नहीं करता है, तो BIADA स्वतंत्र होगा कि वह कब्जा वापस ले और आवश्यक होने पर न्यायालय से पुनः संपर्क करे।

न्यायालय का सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह था कि BIADA को तत्काल रद्दीकरण आदेश वापस लेना होगा अथवा औद्योगिक इकाई का कब्जा याचिकाकर्ता को सौंपना होगा, जो भी स्थिति लागू हो। BIADA के अधिवक्ता ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि यह कार्य निर्णय की तिथि से चार सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई समय-सीमाएँ उसी दिन से गिनी जाएँगी, जिस दिन आदेश वापस लिया जाएगा या कब्जा सौंपा जाएगा—जो भी बाद में हो।

इस प्रकार, न्यायालय ने मामले के गुण-दोष में विस्तार से गए बिना एक व्यावहारिक और संतुलित समाधान अपनाया। याचिकाकर्ता को व्यवसाय पुनः शुरू करने का अवसर दिया गया, लेकिन सख्त शर्तों और जवाबदेही के साथ। वहीं BIADA के हितों की भी पूरी तरह रक्षा की गई।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह निर्णय बिहार में औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है कि न्यायालय उद्योगों को पुनर्जीवित करने का अवसर देना चाहता है, बशर्ते उद्यमी गंभीरता से उत्पादन शुरू करने को तैयार हों। साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि औद्योगिक भूमि को खाली या निष्क्रिय छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार और BIADA जैसे निकायों के लिए यह निर्णय एक उदाहरण है कि अंडरटेकिंग के माध्यम से न्यायालय व्यावहारिक समाधान निकाल सकता है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • मुद्दा: क्या याचिकाकर्ता को व्यवसाय में हस्तक्षेप से संरक्षण मिलना चाहिए?
    निर्णय: हाँ, लेकिन केवल अंडरटेकिंग की शर्तों के अधीन।
  • मुद्दा: क्या रद्दीकरण आदेश वापस लिया जाना चाहिए?
    निर्णय: BIADA को आदेश वापस लेने/कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया।
  • मुद्दा: अंडरटेकिंग के उल्लंघन पर क्या परिणाम होंगे?
    निर्णय: कब्जा वापसी, तीसरे पक्ष को पुनः आवंटन और अवमानना कार्यवाही।
  • मुद्दा: समय-सीमा की गणना कब से होगी?
    निर्णय: आदेश वापसी या कब्जा सौंपने की तिथि से, जो भी बाद में हो।

मामले का शीर्षक

M/s Kripa Rice Mill Giddha Vs. The State of Bihar

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 18318 of 2022

न्यायमूर्ति गण का नाम

  • माननीय मुख्य न्यायाधीश
  • माननीय श्री न्यायमूर्ति पार्थ सारथी

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री संजय कुमार ओझा, अधिवक्ता
  • राज्य की ओर से: महाधिवक्ता एवं सरकारी अधिवक्ता
  • BIADA की ओर से: श्री यशराज बर्धन, अधिवक्ता

निर्णय का लिंक

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