निर्णय की सरल व्याख्या
पटना उच्च न्यायालय ने 13 अप्रैल 2021 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि राज्य सरकार के उन कर्मचारियों को, जिन्होंने 50 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, विभागीय परीक्षा (Departmental Examination) पास किए बिना भी ए.सी.पी. (Assured Career Progression) और एम.ए.सी.पी. (Modified Assured Career Progression) का लाभ दिया जाना चाहिए।
यह मामला एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, चौधरी बिमल कुमार राय से संबंधित था, जिन्होंने बिहार सरकार में लगभग 36 वर्षों तक सेवा की थी। वे 22 अप्रैल 1985 को क्लर्क-कम-कैशियर के पद पर जिला वयस्क शिक्षा कार्यालय, भागलपुर में नियुक्त हुए थे। बाद में विभिन्न कार्यालयों में तबादले के बाद उन्होंने 31 मार्च 2021 को बाल विकास परियोजना कार्यालय, उजियारपुर (समस्तीपुर) से क्लर्क-कम-टाइपिस्ट के पद से सेवानिवृत्ति ली।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अदालत में यह याचिका दायर की कि उन्हें अब तक ए.सी.पी. और एम.ए.सी.पी. का लाभ नहीं दिया गया, जबकि उन्होंने अपनी सेवा पूरी ईमानदारी से निभाई। सरकार ने यह कहते हुए लाभ नहीं दिया कि उन्होंने विभागीय परीक्षा पास नहीं की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि बिहार सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के 15 मई 1992 के संकल्प के अनुसार, जो कर्मचारी 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, उन्हें विभागीय परीक्षा से मुक्ति (exemption) प्राप्त है। इसलिए उन्हें इस आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि मामला पहले से ही तय किया जा चुका है और इस विषय पर कई खंडपीठ (Division Bench) के निर्णय आ चुके हैं, जिनमें प्रमुख है —
“राज्य बनाम श्रीमती जीवाची देवी” [2020 (2) बी.एल.जे. 471]।
अदालत की टिप्पणी और निर्णय
माननीय न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह ने जीवाची देवी के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला अब “res integra नहीं है” — यानी यह अब विवादित मुद्दा नहीं रहा, क्योंकि इस पर पहले ही कई फैसले दिए जा चुके हैं।
जीवाची देवी मामले में पटना उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि:
- विभागीय परीक्षा केवल चयन ग्रेड (Selection Grade) के प्रमोशन के लिए जरूरी है, सामान्य पदोन्नति या ए.सी.पी./एम.ए.सी.पी. के लिए नहीं।
- बिहार राज्य कर्मचारी सेवा शर्त (Assured Career Progression) नियम, 2003 और बिहार बोर्ड विविध नियम, 1958 में कहीं यह नहीं लिखा है कि ए.सी.पी. देने से पहले परीक्षा पास करना आवश्यक है।
- 50 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों को सरकार के 1992 के संकल्प के अनुसार विभागीय परीक्षा से छूट प्राप्त है।
अदालत ने यह भी कहा कि यह बात कई पहले के निर्णयों में भी कही जा चुकी है, जैसे —
- विश्वनाथ प्रसाद बनाम बिहार राज्य (2011) 2 PLJR 136
- अविनाश चंद्र सिंह बनाम बिहार राज्य (2012) 1 PLJR 663
- उदय शंकर प्रसाद बनाम बिहार राज्य (2017) 3 PLJR 824
- रामाधार ठाकुर बनाम बिहार राज्य (LPA No. 599/2015)
- अंजनी कुमार बनाम बिहार राज्य (2013) 2 PLJR 643
- मसोमत इंदु देवी बनाम बिहार राज्य (2019) 2 PLJR 241
इन सभी मामलों में न्यायालय ने यह सिद्धांत स्थापित किया कि विभागीय परीक्षा वित्तीय उन्नति (financial upgradation) के लिए अनिवार्य नहीं है।
अंतिम आदेश
माननीय न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह ने कहा कि याचिकाकर्ता का मामला इन सभी निर्णयों के अनुसार है और उन्हें ए.सी.पी./एम.ए.सी.पी. का लाभ दिया जाना चाहिए।
उन्होंने जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर को आदेश दिया कि —
“याचिकाकर्ता को विभागीय परीक्षा न देने के बावजूद ए.सी.पी. और एम.ए.सी.पी. का लाभ दिया जाए, और यह कार्रवाई आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।”
अंततः, याचिका इन निर्देशों के साथ निस्तारित (disposed of) कर दी गई।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह फैसला बिहार सरकार के उन कर्मचारियों के लिए बहुत राहत देने वाला है, जो सेवानिवृत्ति के करीब या उससे ऊपर की उम्र में हैं और जिनकी ए.सी.पी./एम.ए.सी.पी. फाइल सिर्फ इसलिए लंबित रखी गई कि उन्होंने विभागीय परीक्षा नहीं दी थी।
महत्वपूर्ण प्रभाव:
- 50 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों के लिए विभागीय परीक्षा अब आवश्यक नहीं है।
- यदि उन्होंने सेवा के दौरान किसी दंड या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना नहीं किया, तो उन्हें वित्तीय उन्नति का लाभ मिलना चाहिए।
- यह निर्णय प्रशासन को भी याद दिलाता है कि तकनीकी कारणों से किसी कर्मचारी के वैध अधिकार को नहीं रोका जा सकता।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह फैसला आशा की किरण है — क्योंकि यह दर्शाता है कि न्यायालय उनके आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या विभागीय परीक्षा पास करना ए.सी.पी./एम.ए.सी.पी. के लिए अनिवार्य है?
❌ नहीं। अदालत ने कहा कि यह केवल चयन ग्रेड प्रमोशन के लिए आवश्यक है, वित्तीय उन्नति के लिए नहीं। - क्या 50 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों को परीक्षा से छूट है?
✔️ हाँ। 1992 के सरकारी संकल्प के अनुसार ऐसे कर्मचारी परीक्षा से मुक्त हैं। - क्या विभागीय परीक्षा न देने के कारण ए.सी.पी./एम.ए.सी.पी. रोकी जा सकती है?
❌ नहीं। ऐसा करना कानूनन गलत है। - क्या याचिकाकर्ता को लाभ देने का आदेश जारी किया गया?
✔️ हाँ। समस्तीपुर के कलेक्टर को छह सप्ताह में लाभ देने का निर्देश दिया गया।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- State of Bihar & Ors. v. Smt. Jivachi Devi (2020) 2 BLJ 471
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- Bishwanath Prasad v. State of Bihar (2011) 2 PLJR 136
- Avinash Chandra Singh v. State of Bihar (2012) 1 PLJR 663
- Uday Shankar Prasad v. State of Bihar (2017) 3 PLJR 824
- Ramadhar Thakur v. State of Bihar (LPA No. 599 of 2015)
- Anjani Kumar v. State of Bihar (2013) 2 PLJR 643
- Masomat Indu Devi v. State of Bihar (2019) 2 PLJR 241
मामले का शीर्षक
Choudhary Bimal Kumar Roy बनाम State of Bihar एवं अन्य
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 4449 of 2021
उद्धरण (Citation)
2021(2) PLJR 381
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह (मौखिक निर्णय दिनांक 13-04-2021)
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ता की ओर से: श्री शंभू नाथ झा, अधिवक्ता
- राज्य की ओर से: श्री मिथिलेश कुमार उपाध्याय (सहायक अधिवक्ता जनरल-3)
निर्णय का लिंक
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