पटना हाईकोर्ट ने 10 साल की ब्लैकलिस्टिंग को अवैध ठहराया, ठेकेदार को सुनवाई का मौका न देना गंभीर चूक

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाईकोर्ट ने ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार द्वारा एक ठेकेदार को 10 वर्षों के लिए काली सूची में डालने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि यह आदेश बिना उचित नोटिस और सुनवाई के पारित किया गया और यह सजा अनुचित रूप से कठोर थी।

ठेकेदार ने 15 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत गया जिले के टेंगरा रोड से मणिक बिगहा तक सड़क निर्माण और देखरेख के लिए विभाग के साथ अनुबंध किया था। यह काम 29 दिसंबर 2018 तक पूरा होना था।

याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने कुछ काम पूरा कर दिया था, लेकिन नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र में असामाजिक तत्वों द्वारा बाधा पहुँचाने के कारण शेष कार्य में विलंब हुआ। उसने स्थानीय पुलिस और विभाग को इसकी सूचना दी और कार्य पूर्ण करने के लिए समय बढ़ाने की मांग भी की।

लेकिन इसके बावजूद विभाग ने उसका अनुबंध रद्द कर दिया, जमानत राशि ज़ब्त कर ली और ₹85,521 की राशि जमा करने का निर्देश दिया। बाद में, उसी कार्य का नया टेंडर निकाला गया जो दोबारा उसी ठेकेदार को मिला — और इस बार उसने समय पर कार्य पूरा किया।

इसके बावजूद, 04 जनवरी 2022 को विभाग ने याचिकाकर्ता को 10 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया, बिना किसी स्पष्ट कारण बताए और बिना उचित सुनवाई के।

हाईकोर्ट ने कहा कि:

  • ब्लैकलिस्टिंग जैसे फैसले गंभीर नागरिक और आर्थिक परिणाम लाते हैं, इसलिए बिना उचित नोटिस और सुनवाई के इसे पारित नहीं किया जा सकता।
  • विभाग ने यह नहीं बताया कि नोटिस का क्या असर हुआ और याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया पर क्या विचार किया गया।
  • 10 साल की सजा बहुत कठोर है, खासकर जब उसी ठेकेदार को बाद में वही काम दोबारा सौंपा गया और उसने उसे पूरा भी किया।
  • देरी असामाजिक तत्वों के कारण हुई थी, जो याचिकाकर्ता के नियंत्रण में नहीं थी।

इसलिए कोर्ट ने ब्लैकलिस्टिंग के आदेश को निरस्त कर दिया।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला स्पष्ट करता है कि कोई भी सरकारी विभाग यदि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करता है, तो उसे उचित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। बिना नोटिस और कारण बताए यदि सजा दी जाती है तो वह न्यायसंगत नहीं मानी जाएगी।

साथ ही, यह फैसला उन क्षेत्रों में काम करने वाले ठेकेदारों के लिए राहत देता है जहाँ कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी हुई होती है। अगर कार्य में देरी बाहरी कारणों से होती है, तो उसकी ज़िम्मेदारी ठेकेदार पर नहीं डाली जा सकती।

सरकारी विभागों के लिए यह एक चेतावनी है कि अनुबंधिक कार्यों में निर्णय लेते समय निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या याचिकाकर्ता को ब्लैकलिस्ट करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया गया?
    ✔ नहीं। आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नोटिस का क्या उत्तर आया और उस पर क्या विचार हुआ।
  • क्या 10 साल की ब्लैकलिस्टिंग सजा उचित थी?
    ✔ नहीं। यह सजा अत्यधिक कठोर थी, विशेषकर जब बाद में वही कार्य उसी ठेकेदार को देकर पूरा करवाया गया।
  • क्या असामाजिक तत्वों की बाधा देरी का वैध कारण थी?
    ✔ हां। विभाग ने इस बात पर विचार नहीं किया जो याचिकाकर्ता के नियंत्रण से बाहर की स्थिति थी।
  • क्या बिना उचित कारण बताए गए आदेश को वैध माना जा सकता है?
    ✔ नहीं। आदेश में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और यह अनुचित था।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Erusian Equipment & Chemicals Ltd. बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, AIR 1975 SC 266
  • रघुनाथ ठाकुर बनाम बिहार राज्य, (1989) 1 SCC 229
  • गोरखा सिक्योरिटी सर्विसेज बनाम दिल्ली सरकार, (2014) 9 SCC 105
  • UMC Technologies Pvt. Ltd. बनाम भारतीय खाद्य निगम, (2021) 2 SCC 551
  • Kulja Industries Ltd. बनाम बीएसएनएल, (2014) 14 SCC 731

मामले का शीर्षक

Arvind Kumar Singh बनाम बिहार राज्य व अन्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 1193 of 2022

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री रविंद्र कुमार सिन्हा
  • प्रत्युत्तर प्रतिवादी की ओर से: श्रीमती अर्चना मीनाक्षी (GP 6)

निर्णय का लिंक

https://www.patnahighcourt.gov.in/ShowPdf/web/viewer.html?file=../../TEMP/2a99099e-408d-4237-8c34-073b5127d72b.pdf&search=Debarment

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