निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बिहार उत्पाद एवं मद्य निषेध अधिनियम, 2018 (Bihar Prohibition and Excise Act, 2018) के तहत पुलिस द्वारा की गई नकदी की जब्ती कानून के अनुसार नहीं है। कोर्ट ने इस आदेश के तहत जब्त ₹2,24,200 राशि को याचिकाकर्ता को वापस करने का निर्देश दिया है।
यह मामला जहानाबाद जिले के टिकुलीपर गांव के एक निवासी द्वारा दायर किया गया था। याचिकाकर्ता के घर में 2021 में एक पुलिस छापेमारी के दौरान ₹2,24,200 जब्त किए गए थे। यह कार्यवाही काको थाना द्वारा की गई थी और मामला उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि बिहार उत्पाद एवं मद्य निषेध अधिनियम में कहीं भी नकदी जब्त करने या ज़ब्त की गई नकदी को जब्ती आदेश में शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि नकदी कोई प्रतिबंधित वस्तु नहीं है, और इसे जब्त करना कानून के दायरे से बाहर है।
सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने इस दलील का विरोध नहीं किया और कोर्ट को बताया कि इसी तरह के एक पुराने मामले (CWJC No. 19300 of 2018) में भी कोर्ट ने नकदी वापस करने का आदेश दिया था।
कोर्ट ने उस पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उत्पाद अधिनियम की धारा 58 नकदी को जब्त करने की अनुमति नहीं देती। इसलिए काको थाना द्वारा ₹2,24,200 की जब्ती और निचली अदालत द्वारा 30.11.2022 को दिया गया आदेश विधि अनुसार नहीं है।
न्यायालय ने उक्त आदेश को रद्द करते हुए जिला पदाधिकारी, जहानाबाद को निर्देश दिया कि वह यह राशि याचिकाकर्ता को वापस करें। हालांकि, यह राशि एक शर्त के साथ वापस की जाएगी — याचिकाकर्ता को उतनी ही राशि की जमानत राशि के साथ एक अंडरटेकिंग देना होगा, और यह राशि मामले के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह निर्णय बिहार में ऐसे हजारों लोगों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी नकदी शराबबंदी मामलों में पुलिस द्वारा जब्त कर ली गई है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि किसी वस्तु को कानून द्वारा निषिद्ध घोषित नहीं किया गया है, तो उसे जब्त नहीं किया जा सकता। इससे आम जनता के संपत्ति अधिकारों की रक्षा होती है और पुलिस प्रशासन को भी अपनी सीमाओं में रहकर काम करने की याद दिलाई जाती है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- क्या बिहार उत्पाद एवं मद्य निषेध अधिनियम, 2018 के तहत नकदी जब्त की जा सकती है?
❌ नहीं, अधिनियम में नकदी जब्ती की कोई अनुमति नहीं है। - क्या कोर्ट ने नकदी वापस करने का निर्देश दिया?
✅ हाँ, कोर्ट ने जिला पदाधिकारी को आदेश दिया कि वह ₹2,24,200 याचिकाकर्ता को लौटाएं, बशर्ते वह इतनी ही राशि की जमानत और अंडरटेकिंग दे।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- CWJC No. 19300 of 2018, पटना हाईकोर्ट, निर्णय दिनांक 18.04.2019
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- CWJC No. 19300 of 2018, पटना हाईकोर्ट, निर्णय दिनांक 18.04.2019
मामले का शीर्षक
बृजलाल यादव बनाम बिहार राज्य एवं अन्य
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No.11355 of 2024
उद्धरण (Citation)– 2025 (1) PLJR 63
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश चंद्र मालवीय
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
श्री संजय कुमार सिन्हा — याचिकाकर्ता की ओर से
श्री मनोज कुमार यादव (AC to G.A.-10) — राज्य की ओर से
निर्णय का लिंक
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