भरण-पोषण प्रारंभ तिथि पत्नी के पक्ष में संशोधित — पटना उच्च न्यायालय, 2024

Sakshi Bhatnagar

Reviewed by: Sakshi Bhatnagar

License Number: BR/2891A/2019

Sakshi Bhatanagar is a lawyer at Samvida Law Associates practicing criminal law. She represents clients in criminal proceedings before the Patna High Court and subordinate courts, handling bail applications, criminal appeals, NDPS matters, and customs-related cases. Her practice focuses on criminal defense and litigation across multiple forums in Bihar.

पति ने अपनी पत्नी के लिए निर्धारित भरण-पोषण संबंधी परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती दी। पटना उच्च न्यायालय ने प्रति माह Rs 15,000 का भरण-पोषण बरकरार रखा, लेकिन जिस तिथि से यह देय होगा, उसे बदल दिया। अब पूर्ण भरण-पोषण केवल 09.05.2023 से देय होगा। पति को 01.09.2016 से प्रति माह Rs 5,000 की समस्त पिछली अंतरिम भरण-पोषण राशि फिर भी चुकानी होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वैशाली जिले के एक पति‑पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे भरण‑पोषण विवाद से उत्पन्न हुआ।

2015 में, पत्नी ने दंड प्रक्रिया संहिता (Cr P C) की धारा 125 के तहत प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, वैशाली, हाजीपुर के समक्ष एक वाद दायर किया। उस प्रार्थना-पत्र में उसने कहा कि उसके पति की मासिक वेतन आय Rs 12,000 थी।

01.09.2016 को, जब भरण‑पोषण का वाद अब भी लंबित था, परिवार न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश पारित किया। इसमें पति को निर्देश दिया गया कि वह पत्नी को प्रति माह Rs 5,000 अंतरिम भरण‑पोषण के रूप में दे।

बाद में, वाद की कार्यवाही के दौरान, पति का वर्ष 2021 का वेतन प्रविष्टि-पत्र (salary slip) Exhibit P-1 के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दस्तावेज के आधार पर परिवार न्यायालय ने पाया कि पति का वेतन बढ़कर प्रति माह Rs 33,839 हो गया था।

09.05.2023 को प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय ने भरण‑पोषण वाद संख्या 125/2015 का निस्तारण किया। न्यायालय ने पत्नी का धारा 125 Cr P C के तहत दिया गया आवेदन स्वीकार कर लिया और पति को निर्देश दिया कि वह 2015 में आवेदन दायर किए जाने की तिथि से ही प्रति माह Rs 15,000 भरण‑पोषण के रूप में अदा करे।

पति, जो मुख्य रूप से Rs 15,000 प्रति माह भरण-पोषण राशि को मूल दायर तिथि से देय बनाने के निर्देश से असंतुष्ट था, ने पटना उच्च न्यायालय में Criminal Revision No. 574 of 2023 दायर की।

न्यायालय ने क्या परखा और क्या निर्णय दिया

यह आपराधिक पुनरीक्षण माननीय श्री न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल, पटना उच्च न्यायालय के समक्ष सुना गया। निर्णय 05.08.2024 को मौखिक रूप से सुनाया गया।

पति की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने मूलतः Rs 15,000 प्रति माह की दर को चुनौती नहीं दी। इसके बजाय, चुनौती का केंद्र यह था कि यह भरण‑पोषण किस तिथि से देय बनाया गया।

पति के अधिवक्ता ने यह इंगित किया कि:

पहला, स्वयं पत्नी ने अपने धारा 125 के आवेदन में यह कहा था कि 2015 में पति का मासिक वेतन Rs 12,000 था।

दूसरा, उस वाद के लंबित रहने के दौरान ही परिवार न्यायालय पहले से ही 01.09.2016 से प्रति माह Rs 5,000 अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित कर चुका था, जिसे पति दे रहा था।

तीसरा, अंतिम रूप से प्रति माह Rs 15,000 का भरण-पोषण परिवार न्यायालय ने वर्ष 2021 के वेतन प्रविष्टि-पत्र के आधार पर निर्धारित किया, जिसमें कहीं अधिक वेतन Rs 33,839 प्रति माह दर्शाया गया था।

इन तथ्यों के आधार पर पति ने दलील दी कि वर्ष 2015 में जब उसकी आमदनी काफी कम थी, उस समय से ही Rs 15,000 की अधिक भरण-पोषण राशि देय ठहराना अनुचित है।

उसके अधिवक्ता ने निवेदन किया कि परिवार न्यायालय को यह निर्देश देना चाहिए था कि प्रति माह Rs 15,000 केवल अंतिम आदेश की तिथि, अर्थात 09.05.2023 से ही देय हो। पति ने उस तिथि से आगे उक्त दर पर भरण‑पोषण देने की तत्परता व्यक्त की।

पत्नी के अधिवक्ता ने इस प्रार्थना का विरोध किया। तथापि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि मूल धारा 125 के आवेदन में पत्नी ने वास्तव में यह लिखा था कि उस समय पति का वेतन Rs 12,000 प्रति माह था।

उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर सावधानीपूर्वक विचार किया तथा वाद अभिलेख व परिवार न्यायालय के आदेश का परीक्षण किया।

उच्च न्यायालय ने यह नोट किया कि:

धारा 125 Cr P C के तहत आवेदन वर्ष 2015 में दायर किया गया था। इस आवेदन की प्रतिलिपि पुनरीक्षण याचिका के Annexure P-1 के रूप में उच्च न्यायालय के समक्ष थी।

उस आवेदन के अनुच्छेद 5 में पत्नी ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि पति को प्रति माह Rs 12,000 वेतन प्राप्त हो रहा था।

एक पृथक आदेश दिनांक 01.09.2016 द्वारा, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय ने पहले ही पति को निर्देश दे दिया था कि वह पत्नी को प्रति माह Rs 5,000 अंतरिम भरण‑पोषण दे।

अंतिम आवेदन का निस्तारण करते हुए, परिवार न्यायालय ने Exhibit P-1, वर्ष 2021 के वेतन प्रविष्टि-पत्र पर भरोसा किया और पाया कि उस समय तक पति का वेतन प्रति माह Rs 33,839 हो गया था।

इस अधिक वेतन को ध्यान में रखते हुए परिवार न्यायालय ने प्रति माह Rs 15,000 भरण‑पोषण निर्धारित किया। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि पति की 2021 की आय के आलोक में यह राशि “उचित एवं न्यायसंगत” प्रतीत होती है।

पटना उच्च न्यायालय ने Rs 15,000 प्रति माह की इस दर में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्ष 2021 के Rs 33,839 वेतन के आधार पर Rs 15,000 प्रति माह की राशि युक्तिसंगत है।

उच्च न्यायालय की तर्कणा का महत्वपूर्ण भाग इस बात से संबंधित था कि यह राशि किस तिथि से देय होगी।

परिवार न्यायालय ने आदेश दिया था कि प्रति माह Rs 15,000 का भरण‑पोषण धारा 125 Cr P C के तहत आवेदन दायर किए जाने की तिथि, अर्थात 2015 से देय होगा।

उच्च न्यायालय ने इस निर्देश को गलत पाया। इसने इंगित किया कि 2015 में आवेदन दायर किए जाने के समय, जैसा कि स्वयं पत्नी ने निवेदित किया था, पति का वेतन केवल Rs 12,000 प्रति माह था।

इसके बावजूद, परिवार न्यायालय ने 2021 के वेतन आंकड़े के आधार पर Rs 15,000 प्रति माह निर्धारित किया। उच्च न्यायालय की दृष्टि में, जब पति की अर्जन क्षमता 2015 में काफी कम थी, तब उस पर 2021 के उच्च वेतन पर आधारित अधिक भरण‑पोषण राशि को प्रतिगामी रूप से लागू करना उपयुक्त नहीं था।

न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि परिवार न्यायालय के पूर्व आदेश के तहत पति 01.09.2016 से प्रति माह Rs 5,000 अंतरिम भरण‑पोषण के रूप में अदा कर रहा था।

इन परिस्थितियों में उच्च न्यायालय ने माना कि परिवार न्यायालय को “याचिकाकर्ता को आवेदन दायर करने की तिथि की बजाय आदेश की तिथि से ही प्रति माह Rs 15,000/- भरण‑पोषण देने का निर्देश देना चाहिए था।”

इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई।

पटना उच्च न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

पहला, पति को 09.05.2023 से, अर्थात प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि से, पत्नी को प्रति माह Rs 15,000 भरण‑पोषण देने का निर्देश दिया जाता है।

दूसरा, पति को आगे यह निर्देश दिया जाता है कि यदि कोई राशि बकाया हो तो वह 01.09.2016 से 09.05.2023 की अवधि के लिए प्रति माह Rs 5,000 की दर से संपूर्ण अंतरिम भरण‑पोषण दो माह के भीतर अदा करे।

तीसरा, यदि पति द्वारा पहले से कोई राशि अदा की जा चुकी है, तो उसे अंतरिम भरण‑पोषण के बकाए में समायोजित किया जाएगा।

इन निर्देशों के माध्यम से उच्च न्यायालय ने दो बातों के बीच संतुलन स्थापित किया: एक तरफ यह सुनिश्चित करना कि पत्नी को पति की वर्तमान आय के आधार पर यथोचित सहारा मिले, और दूसरी तरफ पति को ऐसे बकाए के बोझ से बचाना, जो बाद के अधिक वेतन को आधार बनाकर पूर्व अवधि पर लागू किए जाते।

यह निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है

यह निर्णय धारा 125 Cr P C के तहत लंबे समय से लंबित भरण‑पोषण मामलों में फंसे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है।

यह दर्शाता है कि पटना उच्च न्यायालय भरण-पोषण देने वाले की विभिन्न समयों पर अर्जन क्षमता का बारीकी से परीक्षण करता है। किसी बाद के, बढ़े हुए वेतन के आधार पर तय की गई अधिक भरण‑पोषण राशि को हमेशा ही वाद की मूल तिथि से प्रभावी नहीं किया जा सकता।

पत्नी के लिए, यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि जब पति का वेतन बढ़ता है तो न्यायालय भरण‑पोषण बढ़ा सकते हैं और Rs 15,000 प्रति माह जैसी युक्तिसंगत राशि, जहाँ आय उसका समर्थन करती हो, बरकरार रखी जा सकती है।

पति के लिए, यह स्पष्ट करता है कि यदि अंतिम भरण‑पोषण बहुत बाद के वर्ष के वेतन के आधार पर निर्धारित किया गया हो, तो न्यायालय प्रारंभिक तिथि को मूल दायर तिथि की बजाय अंतिम आदेश की तिथि तक सीमित कर सकता है, विशेषकर जब अंतरिम भरण‑पोषण पहले से दिया जा रहा हो।

समग्र रूप से यह निर्णय अंतरिम भरण‑पोषण के शीघ्र और सतत भुगतान को प्रोत्साहित करता है और यह भी दर्शाता है कि बकाया अवश्य वसूल किए जाएंगे, परन्तु राशि और अवधि, सिद्ध आय के आलोक में न्यायसंगत होनी चाहिए।

कानूनी प्रश्न और उनके उत्तर

  • प्रश्न: पति को धारा 125 Cr P C के तहत पत्नी को प्रति माह Rs 15,000 भरण‑पोषण किस तिथि से देना होगा?
    उत्तर: पटना उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि Rs 15,000 प्रति माह 09.05.2023 से देय है, जो कि परिवार न्यायालय के अंतिम आदेश की तिथि है, न कि 2015 में आवेदन दायर किए जाने की तिथि से।
  • प्रश्न: परिवार न्यायालय द्वारा पहले से निर्धारित अंतरिम भरण‑पोषण के संबंध में पति की देयता क्या है?
    उत्तर: पति को 01.09.2016 से 09.05.2023 की अवधि के लिए प्रति माह Rs 5,000 की दर से अंतरिम भरण‑पोषण देना होगा, और यदि कोई राशि बकाया है तो उसे दो माह के भीतर चुका देना होगा, जिसमें पहले से अदा की गई रकम का समायोजन किया जाएगा।

न्यायालय द्वारा उद्धृत मामले

  • प्रदत्त निर्णय पाठ में किसी भी पूर्ववर्ती न्यायिक मिसाल का उल्लेख या उस पर भरोसा नहीं किया गया है।

मामले का विवरण

मामला संख्या: Criminal Revision No. 574 of 2023 (Maintenance Case No. 125 of 2015 से उत्पन्न)

मामले का शीर्षक: Ajay Bihari Prasad Singh v. The State of Bihar & Punam Kumari

पीठ (Coram): माननीय श्री न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल

Citation: 2024(4) PLJR 589

अधिवक्ता: याचिकाकर्ता‑पति की ओर से: Ms Sudha, Advocate; प्रतिवादियों की ओर से: Mr Dilip Kumar No. 1

वाद का स्वरूप: धारा 125 Cr P C के तहत भरण‑पोषण कार्यवाही में, प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, वैशाली, हाजीपुर के आदेश के विरुद्ध आपराधिक पुनरीक्षण

निर्णय का लिंक: Patna High Court Judgment in Cr. Rev. No. 574 of 2023

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