निर्णय की सरल व्याख्या
पटना हाईकोर्ट ने 5 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण निर्णय में एक निजी निर्माण कंपनी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कंपनी ने बिहार के मुजफ्फरपुर में एक जमीन मालिक के साथ 2014 में एक विकास समझौता किया था, जिसके तहत निर्माणकर्ता ने 43% फ्लैट जमीन मालिक को देने के बदले में जमीन पर निर्माण किया। यह पूरा प्रोजेक्ट दिसंबर 2018 में पूरा हुआ।
GST विभाग ने 30 नवंबर 2023 को एक ऑर्डर पारित कर कंपनी पर ₹4.61 करोड़ का कर, ब्याज और पेनल्टी लगाने का आदेश दिया। कंपनी ने इस आदेश को चुनौती दी और यह तर्क दिया:
- कि यह कर गलत अधिसूचनाओं के आधार पर लगाया गया है।
- कि समझौता GST लागू होने से पहले हुआ था, इसलिए उस पर GST नहीं लगना चाहिए।
- कि पूरा निर्माण 2018 में पूरा हो गया था, जबकि सरकार की अधिसूचना 2019 की है।
हाईकोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कंपनी ने जमीन मालिक को जो निर्माण सेवाएं दीं, वे GST के तहत कर योग्य हैं। चूंकि निर्माण के बदले जमीन मालिक से “डेवलपमेंट राइट्स” के रूप में भुगतान प्राप्त हुआ था, यह एक “सप्लाई ऑफ सर्विस” है, और इस पर रिवर्स चार्ज मेकेनिज्म (RCM) के तहत कर बनता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कर “ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स” पर नहीं, बल्कि “कंस्ट्रक्शन सर्विस” पर लगाया गया है, जो कि पहले से ही 28 जून 2017 की अधिसूचना से कर योग्य थी।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह फैसला उन सभी रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए महत्वपूर्ण है जो जमीन मालिकों से समझौता करके निर्माण कार्य करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- यदि निर्माण कार्य GST लागू होने के बाद पूरा होता है, तो उस पर कर देय होगा, भले ही समझौता पहले हुआ हो।
- निर्माण सेवाएं और जमीन के अधिकार का आदान-प्रदान अलग-अलग कर योग्य क्रियाएं हैं।
- कर रिटर्न और अपील की वैधानिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करके सीधे कोर्ट में आना सही नहीं है।
सरकार के लिए यह निर्णय कर संग्रह को स्पष्ट और मजबूत करता है, और भविष्य में होने वाले ऐसे समझौतों के लिए कानूनी मार्गदर्शन देता है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)
- क्या GST लागू होने से पहले हुआ समझौता GST के अंतर्गत नहीं आएगा?
✅ नहीं। यदि निर्माण कार्य GST लागू होने के बाद पूरा हुआ है, तो वह कर योग्य है। - क्या डेवलपमेंट राइट्स के बदले निर्माण सेवाएं GST के तहत आती हैं?
✅ हाँ। यह “सप्लाई ऑफ सर्विस” मानी जाती है और इस पर रिवर्स चार्ज लागू होता है। - क्या यह कर आदेश समय सीमा के बाहर पारित हुआ?
❌ नहीं। यह आदेश GST अधिनियम की धारा 73(10) के तहत तीन साल की वैध सीमा के भीतर पारित हुआ है। - क्या हाईकोर्ट में सीधे याचिका दायर करना उचित था?
❌ नहीं। कोर्ट ने कहा कि पहले वैकल्पिक अपील उपायों का उपयोग करना चाहिए था।
पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय
- Commissioner of Income Tax vs. Balbir Singh Maini, (2018) 12 SCC 354
- Govind Saran Ganga Saran vs. Commissioner of Sales Tax, 1985 Supp SCC 205
न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय
- Super Poly Fabriks Ltd. vs. CCE, (2008) 11 SCC 398
- Prahitha Construction Pvt. Ltd. vs. UOI, 2024 SCC OnLine TS 3994
- M/S Adarsh Construction vs. State of Bihar, CWJC No. 18149/2023
- M/S Radhika Packing and Printers vs. State of Bihar, CWJC No. 18168/2023
मामले का शीर्षक
M/S Shashi Ranjan Constructions Pvt. Ltd. vs. Union of India & Others
केस नंबर
CWJC No. 6700 of 2024
न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद
माननीय श्री न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- श्री डी.वी. पाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता — याचिकाकर्ता की ओर से
- डॉ. कृष्ण नंदन सिंह, सहायक सॉलिसिटर जनरल; श्री अंशुमान सिंह, वरिष्ठ स्थायी वकील; श्री शिवादित्य धारी सिन्हा; श्री आलोक कुमार — भारत सरकार की ओर से
- श्री विकास कुमार, स्थायी वकील-11 — राज्य सरकार की ओर से
निर्णय का लिंक
MTUjNjcwMCMyMDI0IzEjTg==-j3nFDEkN8Rk= (1).pdf
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