पटना हाई कोर्ट ने ठेकेदार की सुरक्षा राशि ज़ब्ती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाई कोर्ट ने एक निर्माण कंपनी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार द्वारा उसकी सुरक्षा जमा राशि और प्रदर्शन गारंटी ज़ब्त किए जाने को चुनौती दी थी। यह मामला प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत ग्रामीण सड़क निर्माण से जुड़ा हुआ था।

निर्माण कंपनी और विभाग के बीच अनुबंध वर्ष 2008-09 में हुआ था। लेकिन विभाग का आरोप था कि कंपनी ने काम समय पर और तय मानकों के अनुसार पूरा नहीं किया। इस कारण विभाग ने 6 अप्रैल 2015 को एक पत्र जारी कर कंपनी की जमा राशि ज़ब्त कर ली और बाद में 14 अक्टूबर 2014 को कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया।

कंपनी ने कोर्ट से निम्नलिखित मांगें की थीं:

  1. 6 अप्रैल 2015 को जारी पत्र को रद्द किया जाए, जिसमें उसकी सुरक्षा राशि ज़ब्त करने और सरकारी राशि की वसूली की बात कही गई थी।
  2. ज़ब्त की गई राशि वापस की जाए, क्योंकि कंपनी का दावा था कि यह ज़ब्ती अनुबंध की शर्तों के विरुद्ध है।
  3. कोर्ट यह घोषित करे कि विभाग अनुबंध के कुछ क्लॉज़ (Clause 53.1 और Clause 26) लागू नहीं कर सकता, क्योंकि कंपनी ने समय पर आवेदन दिए थे (Annexure-3 और 4), जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लेकिन कोर्ट ने देखा कि जब यह याचिका दायर की गई थी, उससे पहले ही विभाग ने संबंधित निर्णय (राशि ज़ब्ती और ब्लैकलिस्टिंग) ले लिए थे। कंपनी ने न तो इस पर याचिका संशोधित की, न ही कोई अलग याचिका दायर की।

कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लगभग एक दशक बीत जाने के बाद ऐसे मामलों को पुनः खोलना न्यायसंगत नहीं है, खासकर जब याचिकाकर्ता ने समय रहते उचित कानूनी रास्ता नहीं अपनाया।

इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह निर्णय सरकारी ठेकों में शामिल ठेकेदारों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि अगर विभाग द्वारा कोई अनुचित निर्णय लिया जाता है, तो उसे समय रहते चुनौती देना ज़रूरी है। देर से की गई कानूनी कार्रवाई, चाहे वह सही क्यों न हो, कोर्ट द्वारा खारिज की जा सकती है।

सरकारी विभागों के लिए भी यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि यदि उन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन किया है, तो कोर्ट उनके प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, खासकर जब दूसरी ओर से समय पर कोई आपत्ति नहीं आई हो।

यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि PMGSY जैसी सार्वजनिक योजनाओं में अनुशासन और कार्य की समयसीमा को कितना महत्व दिया जाता है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या ठेकेदार इतनी देर से प्रदर्शन गारंटी ज़ब्ती को चुनौती दे सकता है?
    ❌ नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब याचिका दायर हुई, तब तक निर्णय लिया जा चुका था और याचिका में इसका सीधा ज़िक्र भी नहीं था।
  • क्या ब्लैकलिस्टिंग आदेश को बिना सीधे चुनौती के अमान्य किया जा सकता है?
    ❌ नहीं। ब्लैकलिस्टिंग को चुनौती देने के लिए कोई संशोधन या नई याचिका नहीं दायर की गई थी।
  • क्या इतनी देरी के बाद कोर्ट से राहत मिल सकती है?
    ❌ नहीं। कोर्ट ने कहा कि “इतनी देरी के बाद राहत देना न्यायोचित नहीं होगा”।

मामले का शीर्षक

M/s Neel Dhruv Construction Company बनाम बिहार राज्य एवं अन्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 14295 of 2015

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजन्त्री
माननीय न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

श्री अजय कुमार सिंह, अधिवक्ता – याचिकाकर्ता की ओर से
श्री कुमार आलोक, SC-7 – प्रतिवादी की ओर से
श्री सत्येश्वर प्रसाद, AC to SC-7 – प्रतिवादी की ओर से

निर्णय का लिंक

https://www.patnahighcourt.gov.in/ShowPdf/web/viewer.html?file=../../TEMP/fcfeab8a-1f2d-4cc7-9c20-0db12adb3ea1.pdf&search=Blacklisting

यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी और आप बिहार में कानूनी बदलावों से जुड़े रहना चाहते हैं, तो Samvida Law Associates को फॉलो कर सकते हैं।”

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News