यह मामला एक पति-पत्नी के बीच के कानूनी विवाद से संबंधित है, जहां पत्नी ने पति से अपने और बेटे के लिए भरण-पोषण की मांग की है।
घटना का सारांश:
पत्नी, श्वेता कुमारी, ने अपने पति, विश्वजीत कुमार, पर घरेलू हिंसा और क्रूरता का आरोप लगाते हुए अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए परिवार न्यायालय में आवेदन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पति, जो एक मरीन इंजीनियर हैं, उन्हें प्रताड़ित करता था, जिससे उन्हें अपना ससुराल छोड़ना पड़ा। श्वेता ने अपने बेटे के साथ अपने माता-पिता के घर में रहना शुरू किया और कोई स्थायी आय न होने के कारण, उन्होंने भरण-पोषण के लिए न्यायालय में याचिका दायर की।
न्यायालय का निर्णय:
परिवार न्यायालय ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में ₹12,000 प्रति माह (जिसमें पहले से दिए जा रहे ₹8,000 शामिल हैं) और बेटे के लिए ₹3,000 प्रति माह का भुगतान करें। साथ ही, कानूनी खर्चों के लिए ₹10,000 भी दिए जाएं।
पति का पक्ष:
विश्वजीत ने तर्क दिया कि:
- वह मरीन इंजीनियर की नौकरी छोड़ चुके हैं और अब एक प्राइवेट कंपनी में ₹12,000 प्रति माह की मामूली सैलरी पर काम कर रहे हैं।
- वह पहले से ही ₹8,000 प्रति माह पत्नी को दे रहे हैं और उनके पास खुद के लिए और अपने माता-पिता व बहन के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त धन नहीं बचता।
- पत्नी शिक्षित हैं और पूर्व में एक स्कूल में शिक्षिका थीं, इसलिए वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकती हैं।
पत्नी का पक्ष:
पत्नी ने कहा कि:
- उन्हें अपने बेटे की देखभाल के लिए 2015 में नौकरी छोड़नी पड़ी थी और अब उनके पास कोई आय का स्रोत नहीं है।
- पति की आय पहले ₹5 लाख प्रति माह थी, और उनके पास जमीन और अन्य संपत्तियां भी हैं।
न्यायालय की टिप्पणियां:
- कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य है कि पत्नी और बच्चे को पति के समान स्तर की जीवनशैली मिल सके।
- पति ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिया कि वह अब ₹12,000 की सैलरी पर काम कर रहे हैं।
- पत्नी और बच्चे की देखभाल करना पति की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, भले ही उसे इसके लिए शारीरिक श्रम क्यों न करना पड़े।
निष्कर्ष:
पटना उच्च न्यायालय ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि ₹12,000 का अंतरिम भरण-पोषण उचित है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति, जो एक योग्य और सक्षम व्यक्ति हैं, अपनी पत्नी और बच्चे की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आय अर्जित करने का प्रयास कर सकते हैं।
यह मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भरण-पोषण का कानूनी प्रावधान महिलाओं और बच्चों के जीवन स्तर को बनाए रखने में कितना महत्वपूर्ण है।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/NDQjMTA3MSMyMDE3IzEjTg==-D0–am1–XNPwJWSw=


