सारांश:
यह मामला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर तैनात बिनोद कुमार सिंह से संबंधित है, जिन्हें अपनी पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने और विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
बिनोद कुमार ने अपनी दूसरी शादी CRPF की कांस्टेबल सुनीता उपाध्याय के साथ की, जो उनकी पहली पत्नी के रहते हुए की गई थी। उनकी पहली पत्नी, रंजू सिंह, ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। विभागीय जांच के दौरान, बिनोद कुमार पर फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप भी सिद्ध हुआ। इन आरोपों के आधार पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
अपीलकर्ता ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ उच्च न्यायालय में चुनौती दी, यह दावा करते हुए कि उनकी पहली पत्नी ने दूसरी शादी के लिए सहमति दी थी। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी सहमति के बावजूद, यह कानून के अनुसार अवैध है कि कोई व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करे। अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।
पटना उच्च न्यायालय ने इस अपील को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि विभागीय और न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं पाई गई।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- प्रारंभिक आरोप: बिनोद कुमार पर दूसरी शादी करने और विभागीय जांच में फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप लगा।
- विभागीय कार्रवाई: जांच के दौरान आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
- कानूनी चुनौती: अपीलकर्ता ने बर्खास्तगी को चुनौती दी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
- कानूनी निष्कर्ष: अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के अनुसार पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना अवैध है।
यह निर्णय न केवल विभागीय अनुशासन के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि कानून का उल्लंघन व्यक्तिगत सहमति से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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