यह केस पटना उच्च न्यायालय में सिविल रिट याचिका संख्या 13169/2021 के तहत दायर किया गया था। इसमें याचिकाकर्ताओं, बिश्नुदेव राय और पवन कुमार राउत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), पटना पीठ द्वारा 13 मई 2019 को दिए गए निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
भूमिका
यह मामला भारतीय रेलवे के ग्रुप-डी और ग्रुप-सी पदों के वेतनमान से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने यह दावा किया कि वे वर्षों से “कूरियर” (ग्रुप-सी) पद पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल “रिलीविंग अनस्किल्ड (RUS/Hamal)” (ग्रुप-डी) के वेतनमान के अनुसार भुगतान किया गया। उन्होंने उच्च वेतनमान और वेतन वृद्धि की मांग की थी।
मामले के संक्षिप्त तथ्य
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नियुक्ति और पदोन्नति का दावा:
- बिश्नुदेव राय (1993 में नियुक्त) और पवन कुमार राउत (1990 में नियुक्त) को रेलवे में अनुकंपा के आधार पर “रिलीविंग अनस्किल्ड (RUS/Hamal)” पद पर नियुक्त किया गया था, जो ग्रुप-डी का पद था।
- उनका दावा था कि 1994 से उन्हें “कूरियर” (ग्रुप-सी) के पद पर काम करने के लिए कहा गया।
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वेतनमान की मांग:
- छठे वेतन आयोग (2006) की सिफारिशों के तहत ग्रुप-डी और ग्रुप-सी पदों को मिला दिया गया।
- “कूरियर” पद के लिए वेतनमान ₹5200-20200 और ग्रेड पे ₹1800 निर्धारित किया गया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उन्हें ₹1900 ग्रेड पे मिलना चाहिए।
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प्रतिवादियों की दलीलें:
- रेलवे प्रशासन का कहना था कि याचिकाकर्ताओं को पहले से ही उचित वेतनमान दिया गया है और ₹1900 ग्रेड पे का उनका दावा गलत है।
- उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में समय पर दावा नहीं किया, बल्कि 2014 में पहली बार मांग उठाई, जो 20 साल देर से की गई थी।
न्यायालय का निर्णय
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उच्च वेतनमान की मांग अस्वीकार:
- न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता “कूरियर” पद के लिए निर्धारित वेतनमान (₹1800 ग्रेड पे) से अधिक की मांग नहीं कर सकते।
- वे छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत स्वीकृत वेतनमान से अधिक वेतन के हकदार नहीं हैं।
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पुरानी वेतन वृद्धि का दावा खारिज:
- न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 1994 से ही “कूरियर” पद के लिए वेतन वृद्धि का दावा नहीं किया और 2014 में पहली बार यह मुद्दा उठाया।
- यह विलंबित दावा था, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू नहीं:
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “समान कार्य के लिए समान वेतन” का सिद्धांत तभी लागू होता है, जब कर्मचारी वास्तव में उच्च पद की जिम्मेदारियां निभाते हैं।
- याचिकाकर्ताओं ने यह साबित नहीं किया कि “RUS/Hamal” और “कूरियर” पदों की जिम्मेदारियों में कोई महत्वपूर्ण अंतर है।
निष्कर्ष
पटना उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ताओं का दावा न तो कानूनी रूप से वैध है और न ही समय पर प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वेतन निर्धारण एक कार्यकारी विषय है, जिसे अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती।
महत्वपूर्ण संदेश
- सरकारी कर्मचारियों को वेतनमान और पदोन्नति संबंधी मुद्दों पर समय पर दावा करना चाहिए।
- “समान कार्य के लिए समान वेतन” सिद्धांत का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को यह साबित करना होगा कि वे उच्च पद की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
- न्यायालय कार्यकारी आदेशों में हस्तक्षेप तभी करता है, जब स्पष्ट रूप से भेदभाव या अन्याय दिखता हो।
इस प्रकार, यह मामला सरकारी नौकरियों में वेतनमान और पदोन्नति से जुड़े विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनता है।
पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
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https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTMxNjkjMjAyMSMxI04=-8oHHe6nFGTc=


