“आंगनवाड़ी सेविका चयन विवाद: न्यायालय का निर्णय और उसके प्रभाव”

 

पृष्ठभूमि

यह मामला पटना उच्च न्यायालय के समक्ष सिविल रिट अधिकार क्षेत्र मामला संख्या 14898/2014 के रूप में प्रस्तुत हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता नीलू कुमारी ने आंगनवाड़ी सेविका के पद पर अपनी नियुक्ति की वैधता को चुनौती दी थी।

घटनाक्रम

  • प्रारंभिक चयन: उत्तरदाता संख्या 7, संगीता कुमारी, को संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र के लिए सेविका के रूप में चयनित किया गया था।

  • चयन रद्द: 11 जनवरी 2008 को दोपहर 12:35 बजे निरीक्षण के दौरान उनकी अनुपस्थिति के कारण उनका चयन रद्द कर दिया गया।

  • अपील और पुनः नियुक्ति: संगीता कुमारी ने अपने पिता के निधन के कारण अनुपस्थिति का कारण बताया, जिसे स्वीकार करते हुए अपीलीय प्राधिकारी ने उनके चयन को बहाल किया।

  • नीलू कुमारी की नियुक्ति: संगीता कुमारी के चयन रद्द होने के बाद, नीलू कुमारी को उक्त पद पर नियुक्त किया गया।

न्यायालय की कार्यवाही

  • पुनः सुनवाई: नीलू कुमारी को अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया, जिसके बाद पुनः संगीता कुमारी की नियुक्ति को बहाल किया गया।

  • कानूनी दृष्टांत: न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय Poonam vs. State of U.P. (2016) 2 SCC 779 का संदर्भ दिया, जिसमें प्रथम चयनित उम्मीदवार के अधिकारों की पुनः स्थापना पर बल दिया गया है।

निर्णय

न्यायालय ने माना कि संगीता कुमारी, जो प्रारंभिक चयनित उम्मीदवार थीं, को उनके पद पर पुनः स्थापित करना उचित है, क्योंकि उनका चयन रद्द करना विधिसम्मत नहीं था। नीलू कुमारी की नियुक्ति केवल संगीता कुमारी के चयन रद्द होने के कारण हुई थी, अतः संगीता कुमारी की पुनः नियुक्ति के लिए नीलू कुमारी को पद छोड़ना होगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया कि नीलू कुमारी के विरुद्ध कोई कलंक नहीं है, और भविष्य में चयन प्रक्रियाओं में उनका अनुभव उनके लिए लाभकारी होगा।

निष्कर्ष

यह निर्णय आंगनवाड़ी सेविका चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और न्यायसंगतता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि प्रथम चयनित उम्मीदवार के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है, और यदि उनका चयन रद्द करना अनुचित पाया जाता है, तो उन्हें पुनः स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया कि दूसरे उम्मीदवार के अधिकारों का सम्मान हो और भविष्य में उनके अवसर सुरक्षित रहें।

पूरा
फैसला पढ़ने के लिए यहां
क्लिक करें:

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTQ4OTgjMjAxNCMxI04=-MtB4je88Mjk=

 

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