“आरक्षण का अधिकार, दस्तावेज़ों की बाध्यता: पटना उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय”

 


पटना
उच्च न्यायालय में दायर सिविल
रिट याचिका संख्या 1087/2018 का निर्णय 

याचिकाकर्ता:
बिभा कुमारी (डॉ. सूरज प्रकाश
की पत्नी)

बनाम

प्रतिवादीगण:
बिहार राज्य, कृषि विभाग के
प्रधान सचिव, कृषि विभाग के
निदेशक, बिहार कर्मचारी चयन आयोग के
अध्यक्ष एवं सचिव 

मामले
का संक्षिप्त विवरण:

1. शैक्षणिक
योग्यता और पूर्व अनुभव:

याचिकाकर्ता
ने हैदराबाद कृषि विश्वविद्यालय से
बी.एससी (बागवानी) की डिग्री प्राप्त
की

मधुबनी
जिला कृषि कार्यालय में
विषय विशेषज्ञ के रूप में
संविदा पर 17.05.2010 से 18.07.2011 तक कार्य किया

याचिकाकर्ता
पिछड़ा वर्ग (अनुसूची-II नॉन क्रीमी लेयर)
से संबंधित थी

2. विज्ञापन
और आवेदन:

बिहार
कर्मचारी चयन आयोग ने
विज्ञापन संख्या 02010115 दिनांक 29.04.2015 के माध्यम से
4391 कृषि समन्वयक पदों के लिए
आवेदन मांगे

इनमें
से 781 पद अत्यंत पिछड़ा
वर्ग और 131 पद पिछड़ा वर्ग
की महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित
थे

आवश्यक
योग्यता: मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कृषि विज्ञान/पशुपालन/कृषि अभियांत्रिकी/बागवानी/वानिकी/डेयरी टेक्नोलॉजी में स्नातक

अंक
गणना का आधार: शैक्षणिक
योग्यता के लिए अधिकतम
70 अंक और कार्य अनुभव
के लिए अधिकतम 30 अंक 

3. याचिकाकर्ता
की स्थिति:

स्नातक
में 70.70% अंक प्राप्त किए

कुल
प्राप्तांक: शैक्षणिक योग्यता (70.70 x 0.7 =
49.49) + एक वर्ष का अनुभव
(10) = 59.49 अंक

ऑनलाइन
आवेदन के साथ सभी
आवश्यक दस्तावेज जमा किए

4. काउंसलिंग
और परिणाम:

– 08.04.2016 को
काउंसलिंग में भाग लिया

आयोग
ने 05.08.2016 को मेमो संख्या
2198 के माध्यम से सफल उम्मीदवारों
का पहला परिणाम जारी
किया, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम नहीं
था

याचिकाकर्ता
ने पिछड़ा वर्ग महिला श्रेणी
में विचार करने का अनुरोध
किया

– 24.01.2017 को
जारी दूसरे परिणाम में सामान्य श्रेणी
में स्थान 2001 पर नाम आया

– 24.11.2017 को
तीसरा परिणाम जारी हुआ

– 29.12.2017 को
चौथा परिणाम जारी किया गया

5. मुख्य
विवाद:

याचिकाकर्ता
का दावा: काउंसलिंग के समय नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
जमा किया था

आयोग
का पक्ष: काउंसलिंग के समय नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
प्रस्तुत नहीं किया गया

मनीषा
कुमारी (रोल नंबर 21511951) को
48.72 अंकों के साथ पिछड़ा
वर्ग महिला श्रेणी में चयनित किया
गया, जबकि याचिकाकर्ता के
59.49 अंक थे

6. न्यायालय
का विश्लेषण:

विज्ञापन
की शर्त 4 स्पष्ट थी कि काउंसलिंग
के समय नॉनक्रीमी
लेयर प्रमाण पत्र जमा
करने पर सामान्य श्रेणी
में माना जाएगा

याचिकाकर्ता
काउंसलिंग के समय नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
प्रस्तुत करने में विफल
रहीं

सामान्य
श्रेणी में स्थानांतरित होने
के बाद कटऑफ
मार्क्स से कम अंक
होने के कारण चयन
नहीं हो सका

7. समान
मामले का संदर्भ:

शशि
भूषण यादव का मामला
(CWJC No. 727/2018)

एकल
न्यायाधीश ने राम कुमार
गिजरोया बनाम दिल्ली अधीनस्थ
सेवा चयन बोर्ड के
निर्णय के आधार पर
याचिका स्वीकार की

आयोग
ने LPA No. 1311/2019 दायर की

खंडपीठ
ने एकल न्यायाधीश के
आदेश को निरस्त किया

8. महत्वपूर्ण
निर्धारण:

जाति
प्रमाण पत्र और नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
में अंतर है

जाति
जन्म से निर्धारित होती
है और नहीं बदलती

नॉनक्रीमी लेयर स्थिति परिवार
की आय पर निर्भर
करती है और समय
के साथ बदल सकती
है

इसलिए
काउंसलिंग के समय नवीनतम
नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
की आवश्यकता उचित है 

9. न्यायालय
का निर्णय:

याचिका
खारिज

आयोग
का निर्णय सही पाया गया

याचिकाकर्ता
काउंसलिंग के समय आवश्यक
प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं
कर सकीं

सामान्य
श्रेणी में स्थानांतरण के
बाद कटऑफ से
कम अंक होने के
कारण चयन नहीं हो
सका

न्यायालय
ने याचिकाकर्ता के प्रति सहानुभूति
व्यक्त की और सरकारी
नौकरी के अलावा अन्य
अवसरों की तलाश करने
का सुझाव दिया 

10. महत्वपूर्ण
कानूनी सिद्धांत:

आरक्षण
का लाभ लेने के
लिए निर्धारित समय पर सभी
आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है

जाति
प्रमाण पत्र और नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
की प्रकृति अलग है

विज्ञापन
में दी गई शर्तों
का पालन आवश्यक है

बाद
में दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा
सकते

11. निर्णय
का महत्व:

आरक्षण
संबंधी दस्तावेजों की समय पर
प्रस्तुति का महत्व स्पष्ट
किया

नॉनक्रीमी लेयर प्रमाण पत्र
की विशिष्ट प्रकृति को रेखांकित किया

चयन
प्रक्रिया में पारदर्शिता और
नियमों के पालन पर
बल दिया

भविष्य
के मामलों के लिए महत्वपूर्ण
न्यायिक दृष्टांत स्थापित किया

यह निर्णय भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी
दस्तावेजों की समय पर
प्रस्तुति के महत्व को
स्पष्ट करता है। साथ
ही यह जाति प्रमाण
पत्र और नॉनक्रीमी
लेयर प्रमाण पत्र के बीच
के अंतर को भी
रेखांकित करता है। न्यायालय
ने याचिकाकर्ता की परिस्थितियों के
प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए भी
कानून के अनुपालन को
प्राथमिकता दी। यह निर्णय
भविष्य में होने वाली
भर्तियों में आरक्षण संबंधी
दस्तावेजों की प्रस्तुति के
संबंध में एक महत्वपूर्ण
मार्गदर्शक के रूप में
काम करेगा।

पूरा
फैसला
पढ़ने
के
लिए
यहां
क्लिक
करें:

MTUjMTA4NyMyMDE4IzEjTg==-vrz7–am1–BI4mm0=

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News