यह मामला पटना उच्च न्यायालय में “एम/एस ओम साई ट्रेडिंग कंपनी व अन्य बनाम भारत सरकार” का है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने 6 फरवरी 2019 को उनके माल और वाहन की जब्ती को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब्त माल (कटे हुए सूखे सुपारी, जिनका वजन 15,865 किलोग्राम था) भारत में उत्पन्न हुए थे और इनका गंतव्य तमिलनाडु था। माल पर संदेह केवल उनके रंग और आकार के आधार पर किया गया, जिसे कस्टम अधिकारियों ने विदेशी मूल का माना।
अधिकारियों ने यह दावा किया कि माल नेपाल के जरिए अवैध रूप से भारत में लाया गया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई भी ठोस प्रमाण या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। याचिकाकर्ताओं के पास सभी आवश्यक जीएसटी दस्तावेज थे, और यह माल भारतीय सीमा के अंदर ही यात्रा कर रहा था।
मामले की सुनवाई के दौरान, यह सामने आया कि माल का नमूना “असुरक्षित भोजन” के रूप में वर्गीकृत किया गया, लेकिन यह प्रमाणित नहीं किया गया कि ये विदेशी मूल का है। अदालत ने यह भी देखा कि जब्ती का आधार केवल संदेह था, जिसे कानूनी रूप से “कारण से विश्वास” के रूप में मान्य नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि कस्टम एक्ट के तहत अधिकारियों को केवल तभी कार्रवाई करने की अनुमति है, जब वस्तुओं का अवैध आयात साबित हो। मामले में जब्त सामान भारत में उत्पन्न और वितरित किए गए थे, इसलिए यह कस्टम एक्ट के दायरे में नहीं आता।
अंततः, अदालत ने जब्ती को अवैध घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया और सामान और वाहन को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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