बिहार कृषि उपज बाज़ार (निरसन) अधिनियम, 2006 – सरल शब्दों में समझाया गया

🔗 English Version: The Bihar Agriculture Produce Market (Repeal) Act, 2006 – Explained in Simple Terms

अधिनियम संख्या: राज्य अधिनियम (बिहार), राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित – 1 सितम्बर 2006
वर्ष: 2006
अंतिम अद्यतन (लेख): 12 नवम्बर 2025
आधिकारिक स्वच्छ PDF:https://drive.google.com/file/d/1_NkitEbgZJsfLwfwOdIWs8xBV4mRmUx-/view?usp=share_link

परिचय

बिहार कृषि उपज बाज़ार (निरसन) अधिनियम, 2006 के माध्यम से राज्य सरकार ने वर्ष 1960 का बिहार कृषि उपज बाज़ार अधिनियम तथा 1975 के नियमों को समाप्त (repeal) कर दिया।
इस अधिनियम के तहत सभी बाज़ार समितियाँ और विपणन बोर्ड समाप्त कर दिए गए, परंतु जो कार्यवाही, शुल्क या अनुशासनिक मामले पहले से चल रहे थे, उन्हें जारी रखने का प्रावधान रखा गया।
साथ ही, सभी संपत्तियाँ और देनदारियाँ राज्य सरकार में निहित की गईं तथा कर्मचारियों के लिए सेवा-संरक्षण योजना बनाने का प्रावधान जोड़ा गया।

अधिनियम की संरचना

धाराविषयसारांश
धारा 1संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभअधिनियम का नाम, पूरे बिहार में लागू, तुरंत प्रभाव से लागू।
धारा 2परिभाषाएँ“प्रशासक”, “विशेष पदाधिकारी”, “बोर्ड”, “बाज़ार समिति” आदि।
धारा 3निरसन एवं बचाव (Repeal & Savings)पुराने अधिनियम व नियमों को निरस्त किया गया, परंतु लंबित या प्रारंभ योग्य कार्यवाहियाँ जारी रहेंगी।
धारा 4संपत्ति एवं दायित्वों का हस्तांतरणसभी संपत्तियाँ एवं दायित्व राज्य सरकार में निहित; केवल कृषक/कृषि-सम्बंधित कार्य हेतु उपयोग।
धारा 5राज्य सरकार की शक्तियाँअधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आदेश या दिशा देने की शक्ति।
धारा 6कर्मचारी प्रावधानसेवा निरंतरता, तीन-सचिवों की समिति द्वारा सेवा-नियोजन / सेवानिवृत्ति / VRS योजना का निर्माण।

प्रमुख धाराएँ सरल भाषा में

धारा 1 – संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार व प्रारंभ

इसका नाम बिहार कृषि उपज बाज़ार (निरसन) अधिनियम, 2006 है। यह पूरे बिहार में लागू है और तत्काल प्रभाव से लागू हुआ।

धारा 2 – प्रमुख अधिकारी

  • प्रशासक (Administrator): जिला पदाधिकारी या समकक्ष पद।
  • विशेष पदाधिकारी (Special Officer): अनुमंडल पदाधिकारी या समकक्ष पद।
    ये दोनों अधिकारी सभी शेष कार्यवाहियों की देखरेख करते हैं।

धारा 3 – निरसन के साथ बचाव प्रावधान

  • कौन-सा कानून निरस्त हुआ: 1960 का अधिनियम और 1975 के नियम।
  • पूर्व की कार्यवाहियाँ सुरक्षित: सभी कार्य, दंड, मूल्यांकन या निर्णय वैध माने जाएंगे।
  • लंबित कार्यवाहियाँ: जिन्हें प्रारंभ किया जा चुका है या करने का निर्णय लिया गया है, वे जारी रहेंगी।
    • मूल प्राधिकारी – विशेष पदाधिकारी
    • अपील प्राधिकारी – प्रशासक
  • अनुशासनिक कार्यवाही: जो कार्यवाही निरसन तिथि तक प्रारंभ हो चुकी थी, वह जारी रहेगी।
    यदि चार्ज-शीट निरसन तिथि तक नहीं बनी, तो 365 दिनों के भीतर ही बनाई जा सकती है।

धारा 4 – संपत्तियों और दायित्वों का निहित होना

  • सभी संपत्तियाँ व दायित्व: राज्य सरकार में निहित होंगे।
  • कब्ज़ा/हिफ़ाज़त: प्रशासक या विशेष पदाधिकारी तत्काल कब्ज़ा व अभिरक्षा लेंगे।
  • उपयोग का उद्देश्य: अचल संपत्तियाँ केवल कृषक या कृषि-सम्बंधित कार्यों (जैसे विपणन, भंडारण, प्रसंस्करण) हेतु उपयोग होंगी।

धारा 5 – राज्य सरकार की शक्तियाँ

राज्य सरकार को इस अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति के लिए आदेश या दिशा देने की सामान्य शक्ति प्राप्त है।

धारा 6 – कर्मचारियों का प्रावधान

  • सभी कर्मचारी समान वेतन व भत्तों पर सेवा में बने रहेंगे जब तक कि शासन द्वारा निर्धारित योजना लागू नहीं होती।
  • तीन सचिवों की समिति दो माह के भीतर योजना तैयार करेगी — जिसमें समायोजन, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) आदि का प्रावधान होगा।
  • योजना के लागू होने के तीन माह के भीतर उसका पूर्ण कार्यान्वयन किया जाएगा।

बिहार में व्यावहारिक प्रभाव

  • व्यापारियों के लिए: यदि बाज़ार शुल्क से जुड़ी कार्यवाही निरसन से पहले शुरू हुई थी, तो वह विशेष पदाधिकारी के समक्ष जारी रहेगी।
  • बाज़ार भूमि उपयोग: सभी संपत्तियाँ अब राज्य सरकार की हैं और उनका उपयोग केवल कृषि / कृषक हित के लिए किया जा सकता है।
  • कर्मचारियों के लिए: सेवा संरक्षित है; समायोजन या सेवानिवृत्ति योजना शासन द्वारा तय की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1️⃣ क्या निरसन के बाद पुराने मामलों का अंत हो गया?
नहीं। जो भी मूल्यांकन या दंड कार्यवाही पहले शुरू हो चुकी थी, वह जारी रहेगी।

2️⃣ अब बाज़ार समितियों की संपत्ति किसकी है?
सभी संपत्तियाँ अब राज्य सरकार की हैं और उनका उपयोग केवल कृषि से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है।

3️⃣ क्या सरकार उन भूमियों को अन्य कार्यों में उपयोग कर सकती है?
नहीं, अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अचल संपत्ति केवल कृषक/कृषि-सम्बंधित कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी।

4️⃣ कर्मचारियों का क्या हुआ?
वे सेवा में बने रहेंगे; शासन द्वारा बनाई गई योजना के अनुसार उनका समायोजन या सेवानिवृत्ति होगी।

5️⃣ अनुशासनिक कार्यवाही की समय-सीमा क्या है?
यदि चार्ज-शीट निरसन तिथि तक नहीं बनी है, तो 365 दिनों के भीतर ही बनाई जा सकती है।

सारांश

इस अधिनियम द्वारा बिहार में APMC (कृषि उपज मंडी व्यवस्था) को समाप्त कर दिया गया। परंतु यह अधिनियम राज्य के अधिकार, लंबित कार्यवाहियों और कर्मचारियों के संरक्षण को सुनिश्चित करता है।
संपत्तियों को राज्य के अधीन कर दिया गया है और उनका उपयोग केवल कृषि से संबंधित कार्यों में किया जा सकता है।
यह संक्रमणकालीन कानून है जो पुराने मामलों को समाप्त किए बिना, उन्हें प्रशासनिक स्तर पर निपटाने की व्यवस्था देता है।

न्यायिक उदाहरण

1️⃣ Bihar Agriculture Marketing Board Employees Association बनाम बिहार राज्य (पटना उच्च न्यायालय) – अदालत ने निरसन अधिनियम को वैध ठहराया और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा को मान्यता दी।
2️⃣ नंद कुमार बनाम बिहार राज्य (सुप्रीम कोर्ट, 2014) – अदालत ने तीन सचिवों की समिति द्वारा तैयार की जाने वाली योजना की वैधता को स्वीकार किया।

संबंधित कानून

  • बिहार कृषि उपज बाज़ार अधिनियम, 1960 (निरस्त)
  • बिहार कृषि बाज़ार यार्ड भूमि अंतरण अधिनियम, 2017 (बाद का कानून जो बाज़ार भूमि के उपयोग को नियंत्रित करता है)

निष्कर्ष व अस्वीकरण

🗣️ यह लेख Samvida Law Associates की “Bihar Laws Series” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बिहार के कानूनों को सरल भाषा में आम नागरिकों तक पहुँचाना है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है; इसे कानूनी परामर्श न माना जाए।

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