पटना उच्च न्यायालय का फैसला : ड्यूटी के दौरान रेलवे कर्मचारी की मृत्यु पर विधवा को एक्स-ग्रेशिया मुआवजा देने का निर्देश — कल्याणकारी योजनाओं की उदार व्याख्या पर ज़ोर (2023)

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना उच्च न्यायालय का यह निर्णय उन मामलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ सरकारी या रेलवे कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है, लेकिन विभाग तकनीकी आधारों पर एक्स-ग्रेशिया (ex-gratia) मुआवजा देने से इनकार कर देता है।

इस मामले में याचिकाकर्ता एक रेलवे कर्मचारी की विधवा थीं। उनके पति पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) में सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स/प्लानिंग) के पद पर कार्यरत थे। दिनांक 14–15 जून 2016 की रात और सुबह वे रेलवे सेफ्टी कमिश्नर (CRS) निरीक्षण से जुड़े तकनीकी कार्य के लिए नारायणपुर–गौछारी सेक्शन में ड्यूटी पर तैनात थे।

दिनांक 15.06.2016 की सुबह लगभग 7:15 बजे, जब वे रेलवे ट्रैक पर माप-जोख (measurement work) का कार्य कर रहे थे, तभी वे अचानक संतुलन खोकर रेलवे ट्रैक पर गिर पड़े और उन्हें चोट आई। रेलवे अस्पताल के फार्मासिस्ट द्वारा तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर उन्हें पहले सिविल अस्पताल, बेगूसराय, फिर हार्ट केयर अस्पताल और अंत में ग्लोबल अस्पताल, बेगूसराय ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

मृतक कर्मचारी की पत्नी ने रेल पुलिस में यू.डी. केस दर्ज कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह दर्ज था कि मृतक को एंटी-मॉर्टम चोटें थीं और साथ ही हार्ट संबंधी समस्या (Acute Myocardial Infarction) भी पाई गई। रेलवे अधिकारियों द्वारा तैयार संयुक्त जांच रिपोर्ट दिनांक 15.06.2016 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि कर्मचारी की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई।

इसके बावजूद, रेलवे प्रशासन ने यह कहकर एक्स-ग्रेशिया मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि मृत्यु का कारण हार्ट अटैक था, न कि कोई दुर्घटना।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का रुख

रेलवे के इस निर्णय से आहत होकर विधवा ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), पटना पीठ में याचिका दायर की।

CAT ने अपने आदेश दिनांक 12.10.2018 में यह तो माना कि कर्मचारी की मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई, लेकिन यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नियमों के अनुसार मुआवजा देना संभव नहीं है। हालाँकि CAT ने यह भी कहा कि रेलवे चाहे तो कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभ देने पर विचार कर सकता है।

इसके बाद रेलवे ने पुनः विचार करते हुए भी 26.12.2018 और फिर 28.12.2022 को आदेश पारित कर मुआवजा देने से मना कर दिया।

इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने पटना उच्च न्यायालय में वर्तमान रिट याचिका (CWJC No. 10062 of 2022) दायर की।

उच्च न्यायालय के समक्ष मुख्य प्रश्न

उच्च न्यायालय के समक्ष मुख्य सवाल यह था कि—

क्या रेलवे कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान अचानक गिरने (accidental fall) के बाद हुई मृत्यु को “ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाजन्य मृत्यु” माना जाएगा, भले ही मेडिकल रिपोर्ट में हार्ट अटैक का उल्लेख हो?

उच्च न्यायालय का विश्लेषण और तर्क

माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी और न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने पूरे मामले का गहराई से विश्लेषण किया।

न्यायालय ने पाया कि—

  • यह विवादित नहीं है कि मृतक कर्मचारी ड्यूटी पर था।
  • यह भी निर्विवाद है कि वह रेलवे ट्रैक पर गिरा और उसे चोट आई।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम चोटें दर्ज हैं।
  • रेलवे की संयुक्त रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मृत्यु रेलवे ड्यूटी के दौरान हुई।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी एक्स-ग्रेशिया योजना (Office Memorandum दिनांक 11.09.1998 तथा संशोधित RBE No. 139/2016) एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य ड्यूटी के दौरान मृत कर्मचारियों के परिवार को आर्थिक सहारा देना है।

न्यायालय ने कहा कि—

  • “दुर्घटनाजन्य मृत्यु” का अर्थ केवल वही नहीं है जहाँ सीधी चोट से मृत्यु हो।
  • यदि ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना (जैसे गिरना) के बाद घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू होती है और अंततः मृत्यु होती है, तो उसे योजना से बाहर नहीं किया जा सकता।
  • दुर्घटनाजन्य गिरावट और उसके बाद आया हार्ट अटैक एक ही घटनाक्रम का हिस्सा माना जाएगा।

अदालत ने यह भी कहा कि योजना में कहीं यह शर्त नहीं है कि चोट कितनी गंभीर होनी चाहिए। महत्वपूर्ण यह है कि मृत्यु ड्यूटी के दौरान हुई दुर्घटना से जुड़ी हो।

पटना उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय

उच्च न्यायालय ने यह माना कि—

  • CAT और रेलवे प्रशासन का निर्णय अत्यधिक तकनीकी और गलत था।
  • कल्याणकारी योजना की संकीर्ण व्याख्या की गई, जो स्वीकार्य नहीं है।

अतः न्यायालय ने—

  • CAT का आदेश दिनांक 12.10.2018 रद्द किया,
  • रेलवे के अस्वीकृति पत्र दिनांक 26.12.2018 और 28.12.2022 को भी रद्द किया,
  • और रेलवे प्रशासन को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार एक्स-ग्रेशिया एकमुश्त मुआवजा प्रदान करें।

रेलवे को यह भुगतान तीन माह की अवधि के भीतर करने का निर्देश दिया गया।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह निर्णय उन सभी सरकारी और रेलवे कर्मचारियों के परिवारों के लिए अत्यंत राहतकारी है, जिनकी ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है।

इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि—

  • कल्याणकारी योजनाओं की व्याख्या उदार और मानवीय दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।
  • विभाग तकनीकी बहाने बनाकर मृत कर्मचारियों के परिवारों को लाभ से वंचित नहीं कर सकते।
  • यदि ड्यूटी के दौरान कोई दुर्घटना घटनाक्रम का कारण बनती है, तो मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह निर्णय प्रशासन को यह भी याद दिलाता है कि कल्याण योजनाओं का उद्देश्य राहत देना है, न कि विवाद खड़ा करना।

कानूनी मुद्दे और निर्णय (बुलेट में)

  • क्या ड्यूटी के दौरान गिरने के बाद हुई मृत्यु पर एक्स-ग्रेशिया मिल सकता है?
    ➤ हाँ। यदि गिरना दुर्घटना का हिस्सा है और उसी से घटनाक्रम शुरू हुआ।
  • क्या केवल हार्ट अटैक बताकर मुआवजा रोका जा सकता है?
    ➤ नहीं। दुर्घटना और मृत्यु के बीच संबंध को समग्र रूप से देखा जाएगा।
  • क्या CAT और रेलवे का निर्णय सही था?
    ➤ नहीं। दोनों आदेश रद्द किए गए।

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

सरकारी कार्यालय ज्ञापन और रेलवे बोर्ड परिपत्र (RBE No. 139/2016)

मामले का शीर्षक

दिवंगत रेलवे कर्मचारी की विधवा बनाम भारत संघ एवं अन्य

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 10062 of 2022

उद्धरण (Citation)

2023 (1) PLJR 542

न्यायमूर्ति गण का नाम

  • माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
  • माननीय न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री संतोष कुमार, अधिवक्ता
  • प्रतिवादी (रेलवे) की ओर से: श्री राकेश कुमार सिन्हा, CGC

निर्णय का लिंक

https://patnahighcourt.gov.in/viewjudgment/MTUjMTAwNjIjMjAyMiMxI04=-5SoPz9YLp–ak1–

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