पटना हाईकोर्ट का 2023 का अहम फैसला: GST असेसमेंट पर राहत और नया मौका

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला उन व्यापारियों और करदाताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो किसी कारणवश समय पर GST रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए और बाद में उन पर टैक्स विभाग द्वारा एकतरफा (बेस्ट जजमेंट) असेसमेंट कर दिया गया।

इस मामले में याचिकाकर्ता एक पंजीकृत व्यापारिक इकाई थी, जिसने निर्धारित समय पर GST रिटर्न दाखिल नहीं किया। जब बार-बार नोटिस के बावजूद रिटर्न दाखिल नहीं हुआ, तो राज्य कर विभाग ने बिहार वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 62 के तहत असेसमेंट ऑर्डर पारित कर दिया। इसे आम भाषा में “एकतरफा असेसमेंट” कहा जाता है, जिसमें विभाग अपने अनुमान के आधार पर टैक्स तय कर देता है।

यह असेसमेंट आदेश सितंबर 2019 में पारित हुआ। इससे असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने कानून में दी गई अपील की प्रक्रिया अपनाई और धारा 107 के तहत अपील दायर की। लेकिन समस्या यह थी कि यह अपील कानून द्वारा तय अधिकतम समय सीमा से काफी देर से दायर की गई थी।

GST कानून में अपील के लिए एक निश्चित समय सीमा तय है। यदि उस समय सीमा में अपील नहीं की जाती, तो अपीलीय प्राधिकारी के पास उसे सुनने का अधिकार नहीं होता। इसी कारण, अगस्त 2022 में अपीलीय प्राधिकारी ने अपील को केवल देरी के आधार पर खारिज कर दिया, बिना मामले के गुण-दोष (merits) पर जाए।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने सीधे पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर असेसमेंट आदेश को चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने प्रारंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया कि जब कानून में अपील की पूरी व्यवस्था मौजूद है, तो सीधे रिट याचिका के माध्यम से असेसमेंट आदेश को चुनौती देना सामान्य रूप से स्वीकार्य नहीं है। खासकर तब, जब अपील केवल याचिकाकर्ता की देरी के कारण खारिज हुई हो।

लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ।

इसी बीच, केंद्र सरकार ने GST काउंसिल की सिफारिश पर 31 मार्च 2023 को नोटिफिकेशन संख्या 06/2023 जारी किया। यह नोटिफिकेशन उन करदाताओं के लिए एक विशेष राहत योजना (अमनेस्टी स्कीम) लेकर आया, जिनके खिलाफ धारा 62 के तहत असेसमेंट किया गया था।

इस नोटिफिकेशन के अनुसार, यदि:

  • धारा 62 के तहत असेसमेंट 28 फरवरी 2023 या उससे पहले किया गया हो, और
  • करदाता 30 जून 2023 तक लंबित GST रिटर्न दाखिल कर दे, और
  • संबंधित टैक्स व ब्याज (धारा 50 के तहत) जमा कर दे,

तो ऐसा माना जाएगा कि पहले किया गया असेसमेंट आदेश अपने आप वापस ले लिया गया है, चाहे:

  • अपील दायर की गई हो या नहीं, या
  • अपील खारिज हो चुकी हो।

हाईकोर्ट ने इस नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ा और समझा कि इसका उद्देश्य करदाताओं को सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा कानून के दायरे में लाना और लंबित विवादों को खत्म करना है।

इसी आधार पर, कोर्ट ने यह कहा कि याचिकाकर्ता को इस नोटिफिकेशन का लाभ लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसलिए कोर्ट ने न तो असेसमेंट आदेश को सीधे रद्द किया और न ही उसके गुण-दोष पर कोई टिप्पणी की, बल्कि याचिका को इस स्वतंत्रता के साथ निपटा दिया कि याचिकाकर्ता इस नोटिफिकेशन के अनुसार रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता नोटिफिकेशन की शर्तों का पालन करता है, तो पहले किया गया असेसमेंट अमान्य माना जाएगा और दोबारा असेसमेंट किया जाएगा।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला खास तौर पर छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए बहुत राहत देने वाला है।

  • यह स्पष्ट करता है कि GST कानून में समय सीमा का पालन बहुत जरूरी है, वरना कानूनी उपाय बंद हो सकते हैं।
  • साथ ही, यह दिखाता है कि सरकार और न्यायालय दोनों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि स्वैच्छिक अनुपालन (voluntary compliance) को बढ़ावा देना है।
  • ऐसे व्यापारी जिनकी अपील समय से न होने के कारण खारिज हो चुकी थी, उन्हें भी एक नया जीवनदान मिला।
  • सरकार के लिए यह फैसला राजस्व बढ़ाने और पुराने मामलों को निपटाने में सहायक है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या असेसमेंट आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट जाया जा सकता है?
    → सामान्यतः नहीं, जब वैकल्पिक अपील उपलब्ध हो।
  • क्या देरी से खारिज अपील के बाद भी राहत मिल सकती है?
    → हाँ, यदि बाद में सरकार द्वारा राहत देने वाला नोटिफिकेशन जारी किया गया हो।
  • नोटिफिकेशन 06/2023 का प्रभाव क्या है?
    → धारा 62 के अंतर्गत किए गए पुराने असेसमेंट स्वतः समाप्त माने जाएंगे, यदि शर्तें पूरी हों।
  • अंतिम निर्णय
    → याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को नोटिफिकेशन के तहत अनुपालन की अनुमति दी गई।

मामले का शीर्षक

Aditya Ceramics, Vs. The State of Bihar

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 877 of 2023

न्यायमूर्ति गण का नाम

  • माननीय मुख्य न्यायाधीश
  • माननीय न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता
  • राज्य कर विभाग की ओर से सरकारी अधिवक्ता

निर्णय का लिंक

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