पटना हाईकोर्ट में रिट आदेश के खिलाफ अपील कैसे करें? (LPA की पूरी प्रक्रिया)- 2026

परिचय

अगर पटना हाईकोर्ट के किसी एकल न्यायाधीश (Single Judge) ने रिट याचिका में ऐसा आदेश दिया है जिससे आप संतुष्ट नहीं हैं और आपके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो आप उसी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने अपील कर सकते हैं।
इस अपील को Letters Patent Appeal (LPA) कहा जाता है।

LPA का मकसद यह देखना होता है कि क्या एकल न्यायाधीश का आदेश कानून के अनुसार सही है या नहीं। यह पूरी सुनवाई दोबारा कराने के लिए नहीं होती, बल्कि केवल गंभीर कानूनी गलती को सुधारने के लिए होती है।

1. LPA कब दाखिल की जा सकती है?

जब पटना हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा रिट याचिका (Article 226) में ऐसा आदेश पारित किया जाए जिससे:

  • आपके कानूनी अधिकार प्रभावित हों
  • आपको नुकसान हो
  • या प्रक्रिया में गलती हुई हो

तो उस आदेश के खिलाफ LPA दाखिल की जा सकती है।

किन मामलों में LPA आम तौर पर स्वीकार की जाती है?

LPA दाखिल की जा सकती है, जब:

  • आदेश से किसी व्यक्ति के अधिकार या जिम्मेदारी पर असर पड़ता हो
  • बिना सुनवाई या नोटिस दिए आदेश पारित कर दिया गया हो
  • अंतरिम (temporary) आदेश से भी बड़ा नुकसान हो रहा हो
  • कानून को गलत तरीके से लागू किया गया हो
  • जरूरी तथ्यों को नजरअंदाज किया गया हो
  • स्टे (stay) देने से मना कर दिया गया हो और उससे नुकसान हो रहा हो
  • रिकॉर्ड या कानून को गलत पढ़कर फैसला दिया गया हो

किन मामलों में LPA नहीं की जा सकती?

आम तौर पर LPA नहीं की जाती जब:

  • सिविल अपील के फैसले के खिलाफ पहले ही अपील का अधिकार सीमित हो
  • जज केवल प्रशासनिक निगरानी कर रहा हो, फैसला नहीं दे रहा हो
  • केवल तथ्यों से असहमति हो, कोई कानूनी गलती न हो
  • कानून में साफ लिखा हो कि LPA नहीं होगी
  • दूसरी अपील के फैसले के खिलाफ हो
  • सिर्फ मामूली या अस्थायी आदेश हो

सीधे शब्दों में, LPA को केस दोबारा लड़ने का मौका नहीं माना जाता।

LPA में कोर्ट फीस और खर्च

पटना हाईकोर्ट में LPA दाखिल करते समय सामान्यतः ये शुल्क लगते हैं:

  • मेमो ऑफ अपील पर ₹20
  • वकालतनामा पर ₹15
  • आदेश की प्रमाणित प्रति – प्रति पेज ₹5
  • हलफनामा (Affidavit) पर ₹20
  • वेलफेयर शुल्क ₹50

शुल्क समय-समय पर बदल सकता है, इसलिए फाइलिंग काउंटर से पुष्टि कर लेना बेहतर होता है।

3. LPA की फाइलिंग के लिए फॉर्मेट

LPA फाइल करते समय ये नियम मानने होते हैं:

  • कागज: A4 साइज, 75 GSM
  • प्रिंट: दोनों तरफ
  • फॉन्ट: Times New Roman
  • साइज: 14
  • लाइन स्पेसिंग: डबल
  • मार्जिन:
    • बायां: 4 सेमी
    • दायां: 4 सेमी
    • ऊपर: 2.5 सेमी
    • नीचे: 3.5 सेमी

गलत फॉर्मेट होने पर फाइल वापस हो सकती है।

4. LPA में कौन-कौन से दस्तावेज लगते हैं?

आमतौर पर वही कागज लगते हैं जो पहले केस में दाखिल हो चुके हों।

जरूरी दस्तावेज:

  • एकल न्यायाधीश के आदेश की प्रमाणित प्रति
  • मूल रिट याचिका की प्रति
  • पहले से दाखिल सभी हलफनामों की प्रतियां
  • अपील का सत्यापन करने वाला हलफनामा
  • पहचान पत्र
  • वकालतनामा

नया कागज जोड़ने के लिए कोर्ट से अनुमति जरूरी होती है।

5. अपील के मेमो में क्या-क्या लिखा होना चाहिए?

LPA के मेमो में होना चाहिए:

  • केस का पूरा शीर्षक (Cause Title)
  • आदेश की तारीख और विवाद का संक्षिप्त विवरण
  • किन कानूनी गलतियों के कारण अपील की जा रही है
  • आप कोर्ट से क्या राहत चाहते हैं
  • अंतिम प्रार्थना (Prayer)

नए मुद्दे आम तौर पर LPA में नहीं उठाए जाते।

6. LPA की समय सीमा (Limitation)

LPA सामान्यतः 30 दिन के अंदर दाखिल करनी होती है।

अगर देर हो जाए तो अलग से देरी माफी आवेदन (Condonation of Delay) देना पड़ता है, जिसमें कारण बताना होता है।

7. क्या LPA दाखिल करने से स्टे अपने-आप मिल जाता है?

नहीं।

स्टे के लिए अलग से आवेदन देना होता है।
कोर्ट स्थिति देखकर ही स्टे देती है।

8. LPA कौन दाखिल कर सकता है?

LPA दाखिल कर सकता है:

  • वह व्यक्ति जिसका अधिकार प्रभावित हुआ हो
  • जिसके खिलाफ आदेश गया हो
  • जिसे बिना सुने आदेश दिया गया हो

अगर कोई व्यक्ति केस में पार्टी नहीं था, फिर भी अगर आदेश से उसका अधिकार प्रभावित हुआ है, तो कोर्ट की अनुमति लेकर LPA कर सकता है।

9. LPA कैसे दाखिल की जाती है?

LPA दाखिल की जा सकती है:

व्यवहार में अधिकतर LPA वकील के माध्यम से ही दाखिल होती है।

10. LPA कोर्ट की शक्तियां और सीमाएं

कोर्ट क्या कर सकती है?

  • कानून की सही व्याख्या जांच सकती है
  • गंभीर गलती सुधार सकती है
  • अन्याय को रोक सकती है

कोर्ट क्या नहीं करती?

  • पूरा केस दोबारा नहीं सुनती
  • नए तथ्य स्वीकार नहीं करती
  • कानून के स्पष्ट प्रतिबंध को नहीं तोड़ती

निष्कर्ष

Letters Patent Appeal एक महत्वपूर्ण कानूनी उपाय है, लेकिन यह हर मामले में उपलब्ध नहीं होता। इसका उद्देश्य केवल गंभीर कानूनी गलती को सुधारना होता है, न कि केस को फिर से शुरू करना।

इसलिए LPA दाखिल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि मामला वास्तव में अपील योग्य है या नहीं। सही स्थिति में LPA न्याय दिलाने का मजबूत माध्यम बन सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. LPA दाखिल करने से क्या आदेश अपने-आप रुक जाता है?

नहीं। स्टे के लिए अलग से आवेदन जरूरी होता है।

2. क्या LPA में नए तर्क दिए जा सकते हैं?

आमतौर पर नहीं। वही बातें रखी जाती हैं जो पहले रखी गई थीं।

3. LPA कितने दिन में दाखिल करनी होती है?

आदेश की तारीख से 30 दिन के अंदर।

4. क्या बिना वकील के LPA की जा सकती है?

कानूनी रूप से संभव है, लेकिन व्यवहार में वकील की मदद जरूरी होती है।

professional photo

Sakshi Priya is a legal intern at Samvida Law Associates, where she actively contributes to both litigation support and legal research work. She assists the litigation team in drafting pleadings, preparing case briefs, organizing court records, and tracking procedural compliance in matters before the Patna High Court and subordinate courts.
Her work focuses on understanding court procedures, writ jurisdiction, appellate remedies, and filing practices, which helps ensure accuracy and efficiency in day-to-day litigation. She also supports legal awareness initiatives of Samvida by helping convert complex legal processes into simple, reader-friendly guides for litigants and the general public.
Through her internship, she is gaining practical exposure to court functioning, client interaction, and legal documentation, while contributing meaningfully to Samvida’s mission of improving access to legal information and justice in Bihar.

Facing a similar matter before the Patna High Court? Contact Samvida Law Associates.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News