निर्णय की सरल व्याख्या
यह निर्णय वर्ष 2023 में पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया है, जो बिहार में GST के अंतर्गत व्यापार करने वाले कई छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मामले में मुख्य प्रश्न यह था कि अगर किसी व्यापारी के खिलाफ GST विभाग ने एकतरफा (ex parte) असेसमेंट आदेश पारित कर दिया हो, तो उसके खिलाफ सीधे हाईकोर्ट जाना कितना सही है, और क्या उसे कोई अन्य राहत मिल सकती है।
मामले के तथ्यों को सरल शब्दों में समझें।
याचिकाकर्ता एक एकल स्वामित्व (sole proprietorship) फर्म थी, जो बिहार में व्यवसाय कर रही थी। किसी कारणवश, याचिकाकर्ता समय पर GST रिटर्न दाखिल नहीं कर पाया। GST कानून के अनुसार, यदि कोई पंजीकृत व्यक्ति समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो विभाग को अधिकार है कि वह धारा 62, बिहार वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के अंतर्गत एकतरफा असेसमेंट आदेश पारित कर दे। इसे आम भाषा में “बेस्ट जजमेंट असेसमेंट” कहा जाता है।
इसी प्रावधान के तहत, विभाग ने दिनांक 18 दिसंबर 2019 को याचिकाकर्ता के विरुद्ध असेसमेंट आदेश पारित कर दिया।
कानून के अनुसार, इस आदेश के खिलाफ अपील का प्रावधान मौजूद है। याचिकाकर्ता ने समय पर अपील भी दाखिल की। लेकिन दुर्भाग्यवश, अपीलीय प्राधिकारी ने 12 दिसंबर 2020 को अपील को इस आधार पर खारिज कर दिया कि अपील के साथ असेसमेंट आदेश की प्रमाणित प्रति (certified copy) संलग्न नहीं की गई थी। अर्थात्, अपील को मामले की मेरिट (गुण-दोष) पर नहीं, बल्कि केवल तकनीकी कमी के आधार पर खारिज कर दिया गया।
इसके बाद, याचिकाकर्ता सीधे पटना हाईकोर्ट पहुंचा और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल कर असेसमेंट आदेश को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि जब GST कानून में अपील की पूरी व्यवस्था मौजूद है, तब सीधे रिट याचिका के माध्यम से असेसमेंट आदेश को चुनौती देना सामान्यतः स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि टैक्स मामलों में रिट याचिका एक वैकल्पिक उपाय नहीं हो सकती।
यहां तक तो मामला याचिकाकर्ता के खिलाफ जा सकता था। लेकिन न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाले पहलू पर ध्यान दिया।
न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 06/2023 दिनांक 31 मार्च 2023 का उल्लेख किया, जो GST काउंसिल की सिफारिश पर लाई गई थी। यह अधिसूचना उन सभी पंजीकृत व्यक्तियों के लिए लाई गई थी, जिनके खिलाफ धारा 62 के अंतर्गत 28 फरवरी 2023 तक एकतरफा असेसमेंट आदेश पारित हो चुके थे।
इस अधिसूचना के अनुसार:
- यदि करदाता निर्धारित समय के भीतर लंबित GST रिटर्न दाखिल कर देता है,
- और उस पर देय टैक्स, ब्याज एवं विलंब शुल्क का भुगतान कर देता है,
- तो पहले पारित किया गया असेसमेंट आदेश स्वतः निरस्त (deemed withdrawn) माना जाएगा,
- और विभाग को नए सिरे से कानून के अनुसार असेसमेंट करना होगा।
पटना हाईकोर्ट ने माना कि यह अधिसूचना याचिकाकर्ता के लिए एक प्रभावी और वैधानिक उपाय प्रदान करती है। इसलिए, न्यायालय ने असेसमेंट आदेश की वैधता पर विस्तार से चर्चा करने के बजाय, याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह उक्त अधिसूचना का लाभ उठाए।
इस प्रकार, न्यायालय ने न तो सीधे असेसमेंट आदेश को रद्द किया और न ही याचिकाकर्ता को बिना उपाय के छोड़ा, बल्कि उसे कानून द्वारा प्रदान की गई राहत अपनाने का रास्ता दिखाया।
निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर
यह निर्णय आम व्यापारियों और करदाताओं के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- यह स्पष्ट करता है कि टैक्स मामलों में सीधे हाईकोर्ट जाना अंतिम उपाय होता है, पहला नहीं।
- छोटे व्यापारियों को यह समझने में मदद करता है कि GST कानून में समय-समय पर राहत देने वाली योजनाएं और अधिसूचनाएं लाई जाती हैं।
- सरकार की मंशा को दर्शाता है कि वह केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि अनुपालन को बढ़ावा देना चाहती है।
- यह निर्णय करदाताओं को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाकर व्यावहारिक समाधान अपनाने की प्रेरणा देता है।
कानूनी मुद्दे और निर्णय
- क्या धारा 62 के असेसमेंट आदेश को सीधे अनुच्छेद 226 में चुनौती दी जा सकती है?
→ नहीं, जब वैधानिक अपील का प्रावधान उपलब्ध हो। - क्या तकनीकी कारण से खारिज अपील के बाद भी राहत संभव है?
→ हां, यदि कानून या अधिसूचना ऐसा अवसर देती हो। - नोटिफिकेशन 06/2023 का प्रभाव क्या है?
→ रिटर्न दाखिल करने पर पूर्व असेसमेंट आदेश स्वतः समाप्त हो जाएगा।
मामले का शीर्षक
| M/s Chandan Kumar Singh Vs. The Union of India, |
केस नंबर
Civil Writ Jurisdiction Case No. 4791 of 2023
न्यायमूर्ति गण का नाम
- माननीय मुख्य न्यायाधीश
- माननीय श्री न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद
वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए
- याचिकाकर्ता की ओर से: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता
- भारत संघ की ओर से: अपर सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता
- राज्य की ओर से: राज्य अधिवक्ता एवं सरकारी वकील
निर्णय का लिंक
MTUjNDc5MSMyMDIzIzEjTg==-ikeXr7dkXcw=
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