पटना उच्च न्यायालय (2022): आईओसीएल कर्मचारी के बेटे को नौकरी देने से इंकार — उच्च योग्यता होने के कारण ‘SABF’ योजना के तहत नियुक्ति अस्वीकृत

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना उच्च न्यायालय ने 2022 में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि सुपरएन्नुएशन बेनिफिट फंड स्कीम (Superannuation Benefit Fund Scheme – SABF) के तहत मृत कर्मचारी के आश्रित को तभी नौकरी दी जा सकती है जब वह योजना में बताई गई “prescribed qualification” यानी निर्धारित योग्यता को पूरा करता हो।

मामला इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की बरौनी रिफाइनरी से जुड़ा था। यहां के एक कर्मचारी की सेवा के दौरान 26 सितंबर 2018 को मृत्यु हो गई। उनकी पत्नी (याचिकाकर्ता नंबर 2) ने अपने पुत्र (याचिकाकर्ता नंबर 1) को इस योजना के तहत नौकरी के लिए नामांकित किया।

इस योजना के तीन विकल्प हैं —
R-1: विधवा को पेंशन जैसी मासिक राशि,
R-2A: 60 महीनों के वेतन के बराबर पुनर्वास अनुदान,
R-3: मृत कर्मचारी के पुत्र/पुत्री को नौकरी देने का विकल्प।

परिवार ने R-3 के अंतर्गत नौकरी का विकल्प चुना। वे चाहते थे कि मृतक के पुत्र को “स्टाफ कैटेगरी” में नौकरी दी जाए।

परंतु आईओसीएल ने 25 फरवरी 2019 को यह आवेदन खारिज कर दिया। इससे पहले 1 फरवरी 2019 को काउंसलिंग बैठक में कंपनी ने उन्हें कारण बताया —
पहला, पुत्र की उम्र ग्रेड-A अधिकारी के लिए निर्धारित सीमा से अधिक थी, भले ही ओबीसी वर्ग को दी गई तीन वर्ष की छूट को जोड़ा जाए।
दूसरा, और अधिक महत्वपूर्ण यह कि उसकी शैक्षणिक योग्यता (B.Tech in Electronics and Communication) “स्टाफ कैटेगरी” की नौकरी के लिए अनुपयुक्त थी।

आईओसीएल की भर्ती नीति (Workmen Recruitment Qualification – WRQ) में स्पष्ट लिखा है कि “स्टाफ कैटेगरी” में B.E., B.Tech., MBA, CA, LLB या MCA जैसे उच्च व्यावसायिक डिग्रीधारी उम्मीदवार पात्र नहीं हैं। यही नियम SABF योजना पर भी लागू होता है।

कंपनी ने परिवार को यह जानकारी बैठक के दौरान दी, जिसकी लिखित प्रति याचिकाकर्ता की पत्नी ने हस्ताक्षर कर प्राप्त की। इसके बावजूद परिवार ने 2020 में उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और आदेश की वैधता को चुनौती दिए बिना नौकरी के लिए निर्देश मांगा।

न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह याचिका निराधार है। अदालत ने माना कि SABF की धारा R-3(b) के अनुसार किसी भी नियुक्ति के लिए आश्रित को “prescribed qualification” यानी निर्धारित योग्यता पूरी करनी होती है। यह योग्यता WRQ नियमों में दी गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उच्च व्यावसायिक डिग्री वाले उम्मीदवार स्टाफ श्रेणी में नियुक्ति के पात्र नहीं हैं।

इसलिए, जब याचिकाकर्ता के पास B.Tech. डिग्री थी, तो वह इस श्रेणी के लिए योग्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल न्यूनतम योग्यता का लाभ नहीं ले सकता और अयोग्यता की शर्त को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

न्यायालय ने यह भी कहा कि परिवार ने 2019 में दी गई अस्वीकृति आदेश को कभी चुनौती नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले Amarjeet Singh v. Devi Ratan (2010) 1 SCC 417 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि जब किसी आदेश के परिणामस्वरूप कोई प्रभाव (जैसे नौकरी न मिलना) होता है, तो पहले मूल आदेश को ही चुनौती दी जानी चाहिए। केवल परिणाम को चुनौती देना विधिक रूप से मान्य नहीं है।

इस आधार पर न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से नौकरी की मांग असंवैधानिक है। कंपनी ने नीति के अनुसार और विधि सम्मत निर्णय लिया था। SABF के तहत नौकरी देना कोई अधिकार नहीं बल्कि एक वैकल्पिक लाभ है, जो केवल तभी दिया जा सकता है जब पात्रता पूरी हो।

अंततः न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता नौकरी के लिए पात्र नहीं था, और कंपनी को नियमों में ढील देने का कोई अधिकार नहीं था।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह फैसला सरकारी उपक्रमों और कर्मचारियों के परिवारों दोनों के लिए मार्गदर्शक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आश्रित को नौकरी देना कोई स्वाभाविक अधिकार नहीं है, बल्कि यह केवल नीति के अंतर्गत दी जाने वाली राहत है।

  • यह निर्णय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए यह सुनिश्चित करता है कि भर्ती नियमों में समानता बनी रहे और कोई भी अपवाद नियमों के खिलाफ न हो।
  • कर्मचारियों के परिवारों के लिए यह संदेश देता है कि किसी योजना के अंतर्गत लाभ लेने से पहले उसकी शर्तों को ध्यानपूर्वक समझना जरूरी है।
  • अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी आदेश को अस्वीकार किया जाता है, तो उसे समय पर चुनौती देना आवश्यक है। विलंब या चुप्पी कानूनी अधिकार को समाप्त कर देती है।
  • यह फैसला “नीति और दया” के बीच संतुलन बनाता है — दया से राहत दी जा सकती है, लेकिन नीति से ऊपर नहीं जाया जा सकता।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या B.Tech. डिग्रीधारी व्यक्ति SABF की धारा R-3 के तहत नौकरी पाने का अधिकारी है?
    ✘ नहीं, क्योंकि WRQ नियमों के अनुसार उच्च व्यावसायिक योग्यता वाले उम्मीदवार स्टाफ कैटेगरी के लिए अयोग्य हैं।
  • क्या कंपनी योग्यता नियमों में छूट दे सकती है?
    ✘ नहीं, क्योंकि SABF और WRQ दोनों बाध्यकारी हैं और इनमें कोई विवेकाधिकार नहीं है।
  • क्या याचिका उस स्थिति में स्वीकार्य है जब अस्वीकृति आदेश को चुनौती नहीं दी गई हो?
    ✘ नहीं, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बिना मूल आदेश को चुनौती दिए परिणाम को चुनौती नहीं दी जा सकती।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • Amarjeet Singh & Others v. Devi Ratan & Others, (2010) 1 SCC 417
  • P. Chitharanja Menon v. A. Balakrishnan, (1977) 3 SCC 255
  • Roshan Lal v. International Airport Authority of India, 1980 Supp SCC 449

मामले का शीर्षक

Petitioners v. Union of India & Others (नाम गुप्त रखे गए)

केस नंबर

Civil Writ Jurisdiction Case No. 10301 of 2020

उद्धरण (Citation)

2023 (1) PLJR 395

न्यायमूर्ति गण का नाम

माननीय न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से: श्री कुमार बृजनंदन, अधिवक्ता
  • निगम (IOCL) की ओर से: श्री अंकित कटियार, अधिवक्ता

निर्णय का लिंक

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