रिट क्या है?
रिट उच्च न्यायालय की एक अंतर्निहित शक्ति है। जब किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तब उच्च न्यायालय एक विशेष आदेश देता है। यह आदेश सरकार या किसी प्राधिकरण को निर्देश देता है कि वह अधिकारों की रक्षा हेतु कुछ करे या न करे।
उच्च न्यायालय की शक्ति
उच्च न्यायालय को संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की शक्ति दी गई है। यह शक्ति मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु भी प्रयोग की जाती है। उच्च न्यायालय किसी भी सरकारी अधिकारी, विभाग या प्राधिकरण को वैध रूप से कार्य करने या अवैध कार्य से रोकने का आदेश दे सकता है।
सरल उदाहरण
यदि किसी छात्र को योग्य होने के बावजूद प्रवेश से वंचित किया जाता है
→ उच्च न्यायालय विद्यालय/कॉलेज को नियमों का पालन करते हुए प्रवेश देने का आदेश दे सकता है। (मैंडेमस)
यदि पुलिस किसी को बिना कारण के अवैध रूप से हिरासत में ले ले
→ उच्च न्यायालय पुलिस को उस व्यक्ति को अदालत में प्रस्तुत करने और अवैध हिरासत से मुक्त करने का आदेश दे सकता है। (हेबियस कॉर्पस)
यदि कोई सरकारी अधिकारी शक्ति का दुरुपयोग करे
→ उच्च न्यायालय ऐसे अधिकारी की गलत कार्रवाई को रद्द कर सकता है। (प्रोहिबिशन/सर्टियोरेरी)
यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बिना वैधानिक अधिकार के सरकारी अधिकारी बताता है
→ उच्च न्यायालय उसे ऐसा करने से रोक सकता है। (क्वो-वारंटो)
अनुच्छेद 226 कब लागू किया जा सकता है?
1. आपका अधिकार उल्लंघित हुआ हो
रिट तभी दायर की जा सकती है जब किसी सरकारी अधिकारी या विभाग ने आपके मौलिक या कानूनी अधिकार का स्पष्ट रूप से उल्लंघन किया हो।
2. कोई बेहतर या तेज उपाय उपलब्ध न हो
यदि समस्या का समाधान किसी अन्य आसान उपाय (जैसे अपील/शिकायत) से संभव हो, तो पहले उसे आज़माना चाहिए।
लेकिन यदि वे उपाय प्रभावी या उपयुक्त न हों, तो सीधे उच्च न्यायालय जाया जा सकता है।
3. आप स्वयं प्रभावित हुए हों
केवल उसी व्यक्ति को रिट दायर करने का अधिकार है जिसे प्रत्यक्ष नुकसान हुआ हो।
उदाहरण—
a) यदि किसी व्यक्ति को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया हो और उसके पास कोई अन्य उपाय न हो → वह मैंडेमस की रिट मांग सकता है।
b) यदि किसी को FIR या अभियोजन के बिना गिरफ्तार किया गया हो → वह हेबियस कॉर्पस की रिट मांग सकता है।
c) कॉलेज आपको सभी दस्तावेज जमा करने के बाद भी मार्कशीट न दे → आपका अधिकार उल्लंघित है।
d) पात्र होने के बाद भी छात्रवृत्ति की राशि न मिले → रिट दायर की जा सकती है।
रिट दायर करने से पूर्व आवश्यक दस्तावेज
1. अधिकारियों से संपर्क करने का प्रमाण
मैंडेमस रिट के लिए आवश्यक है कि आपने पहले संबंधित अधिकारी को आवेदन/शिकायत दी हो और उन्होंने अनदेखी की हो।
2. जिस आदेश को चुनौती देनी है उसकी प्रति
सर्टियोरेरी रिट के लिए संबंधित आदेश/नोटिस संलग्न करना आवश्यक है।
3. प्रतिवादियों (Opposite Party) का विवरण
नाम, पता, पहचान पत्र आदि का उल्लेख।
4. कोर्ट फीस का प्रमाण
रिट दायर करने हेतु कोर्ट फीस की रसीद जोड़नी होती है।
5. प्रतिवादियों को सूचित करने का प्रमाण
पोस्टल रसीद/एक्नॉलेजमेंट।
6. वकालतनामा (यदि वकील रखा है)
रिट किसके विरुद्ध दायर की जा सकती है?
राज्य (State)
उदाहरण—
- रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन
- रीजनल रूरल बैंक
- बिहार स्टेट हाउसिंग बोर्ड
- स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन
- विश्वविद्यालय
- सरकारी अनुदान प्राप्त पब्लिक/प्राइवेट ट्रस्ट
जो राज्य नहीं माने जाते—
- को-ऑपरेटिव बैंक
- सोसायटी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत कॉलेज
- निजी संस्थान
- जीविका (BRLPS)
- बिहार स्टेट हाउसिंग कोऑपरेटिव्स
सरकारी एजेंसियाँ (बिहार में)
जैसे—
- BSPDCL
- BSRTC
- जल संसाधन विभाग
- शिक्षा विभाग
- विश्वविद्यालय सेवा आयोग
- विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव
स्थानीय प्राधिकरण
जैसे—
- नगर समिति
- जिला बोर्ड
- पोर्ट कमिश्नर्स की समिति
नोट:
आमतौर पर रिट निजी व्यक्तियों के विरुद्ध नहीं होती, परंतु उचित मामलों में अनुच्छेद 226 के अंतर्गत ‘किसी भी व्यक्ति’ के विरुद्ध जारी की जा सकती है।
वास्तविक उदाहरण
यदि बिहार में कोई दुकान/कंपनी सभी नियमों का पालन करने के बाद भी लाइसेंस प्राप्त नहीं कर पाती है, और शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती—
→ वह अनुच्छेद 226 के तहत पटना उच्च न्यायालय में रिट दायर कर सकती है।
यह सिद्धांत दर्शाता है — “जहाँ अधिकार है, वहाँ उपाय है।”
अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट दायर करने की लागत
कोर्ट फीस, वकालतनामा फीस, क्लेरिकल खर्च, फोटोकॉपी, बाइंडिंग, ई-फाइलिंग शुल्क आदि शामिल होते हैं।
| PURPOSE | FEES | ||||||
| Total Court Fees | |||||||
| Court fees for invoking Article 226 per writ petition per person | Rs. 250 | ||||||
| Vakalatnama fees (only if you have hired an advocate) | Rs. 15 | ||||||
| Court fees on one Affidavit | Rs. 20 | ||||||
| Total- | Rs. 285 | ||||||
| Statutory Fees For advocates welfare | |||||||
| Affidavit | Rs. 25 | ||||||
| Vakalatnama | Rs. 25 | ||||||
| Total | Rs. 50 | ||||||
| Clerk’s fee for filing (Tehrir) | Min. Rs. 500(with no upper limit) Final Fees would depend upon the bulkiness of the writ application along with supporting documents(annexures) and the complexity of the case. | ||||||
| Advocate fees (only if you have hired an advocate) | No Fixed Fees has been prescribed in law. An Advocate may charge as per the complexity/stroke nature of the matter and his/her standing at the bar | ||||||
| Other clerical costs involved | |||||||
| Photocopy | Depends on no. of pages | ||||||
| Binding | Depends on no. of pages | ||||||
| Scanning | Depends on no. of pages | ||||||
| E- Filing | Rs. 100-200 | ||||||
कौन रिट दायर कर सकता है (Locus Standi)
- सामान्यतः वही व्यक्ति रिट दायर कर सकता है जिसके अधिकारों का सीधे नुकसान हुआ हो।
- केवल सामान्य रुचि या परोक्ष हानि के आधार पर रिट स्वीकार नहीं होती।
अपवाद — PIL
यदि कोई गरीब/वंचित व्यक्ति अदालत नहीं पहुँच सकता, तो कोई अन्य व्यक्ति लोकहित में रिट दायर कर सकता है।
रिट याचिका में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?
- मांगी गई राहत (Prayer)
- ग्राउंड्स (कानूनी आधार)
- अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का विवरण
- नागरिकता व निवास विवरण
- तथ्य व दस्तावेज (Annexures)
- पूर्व में कोर्ट जाने का विवरण
- अंतरिम राहत की मांग (यदि आवश्यक)
- शपथपत्र (Affidavit)
- पहचान पत्र
- सिनॉप्सिस व लिस्ट ऑफ डेट्स
- प्रेजेंटेशन फॉर्म (Appendix A(i)/A(ii))
स्वरूप (Formatting Requirements) — पटना उच्च न्यायालय नियम 1916
- A4, 75 GSM, दोनों ओर प्रिंट
- Font: Times New Roman, Size 14
- Double spacing
- Margin: Left 4 cm, Right 4 cm, Top 2.5 cm, Bottom 3.5 cm
- पेज नंबरिंग 1 से शुरू
- Annexures को Petition के बाद क्रम जारी रखते हुए नंबर करें
- Index को नंबर नहीं दिया जाता
- Synopsis रोमन अंकों में
रिट दायर करने से पहले नोटिस
विपक्षी पक्ष/प्राधिकरण को नोटिस देना आवश्यक है।
इससे विवाद समाधान का अवसर मिलता है और अदालत अक्सर इसका प्रमाण मांग सकती है।
इंडेक्स और सिनॉप्सिस
- इंडेक्स = पूरी फ़ाइल की सामग्री सूची
- सिनॉप्सिस = तथ्यों, ग्राउंड्स और राहत का संक्षिप्त सार
शपथपत्र (Oath)
रिट के साथ शपथपत्र अनिवार्य है, जिसे आयुक्त/नोटरी के समक्ष सत्यापित किया जाता है।
रिट दायर करने की प्रक्रिया
1. ई-फाइलिंग
- पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
- दस्तावेजों की तैयारी
- अपलोड व ऑनलाइन शुल्क भुगतान
- स्क्रूटनी व सुधार
- ई-फाइलिंग नंबर प्राप्त
Guidance link: https://youtu.be/nB-ehVl0aKg
2. हार्ड कॉपी फाइलिंग
- 1+5 सेट प्रिंट
- फाइलिंग काउंटर पर जमा
- टोकन प्राप्त
- स्क्रूटनी
- दोष-सुधार
- केस रजिस्ट्रेशन
स्पीड पोस्ट, ईमेल या रसीद जैसे सबूत सुरक्षित रखें।


