पटना उच्च न्यायालय का फैसला: ड्राइवर कांस्टेबल भर्ती में दस्तावेज़ असंगति पर नियुक्ति रद्द (2022)

निर्णय की सरल व्याख्या

पटना उच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस में ड्राइवर कांस्टेबल की भर्ती से जुड़ी एक अहम याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। यह मामला विज्ञापन संख्या 01/2016 से संबंधित था, जो केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा जारी किया गया था। एक उम्मीदवार की याचिका पर एकल न्यायाधीश ने पहले आदेश दिया था कि यदि उम्मीदवार ने परीक्षा पास की है और पात्रता रखता है, तो उसे नियुक्त किया जाए। परंतु इस आदेश के खिलाफ भर्ती पर्षद ने Letters Patent Appeal (LPA) दायर किया। दो न्यायाधीशों की पीठ — माननीय न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी और माननीय न्यायमूर्ति पुर्नेंदु सिंह — ने 4 नवंबर 2022 को यह अपील स्वीकार करते हुए एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द कर दिया और उम्मीदवार की याचिका खारिज कर दी।

यह भर्ती कुल 1,577 ड्राइवर कांस्टेबल पदों के लिए थी। इसमें न्यूनतम योग्यता 10+2 पास और विज्ञापन की तिथि (25 अगस्त 2016) से कम से कम एक वर्ष पुराना वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना आवश्यक था। चयन प्रक्रिया में शारीरिक परीक्षा (PET) और वाहन संचालन दक्षता परीक्षा (Driving Efficiency Test) शामिल थी। विज्ञापन में साफ चेतावनी दी गई थी कि आवेदन पत्र में दर्ज विवरण और मूल दस्तावेजों में कोई भी असंगति पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।

इस मामले में उम्मीदवार के मैट्रिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 03.06.1987 थी, जबकि उसके ड्राइविंग लाइसेंस में 05.06.1987 अंकित थी। यह अंतर दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान सामने आया। भर्ती बोर्ड ने इस अंतर को गंभीर त्रुटि मानते हुए उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी। उम्मीदवार ने यह तर्क दिया कि उसके लाइसेंस में जन्मतिथि की गलती परिवहन विभाग की लिपिकीय भूल थी और उसने बाद में इस गलती को सुधरवा लिया था। उसने यह भी कहा कि जांच समिति ने उसे ड्राइविंग टेस्ट में शामिल होने दिया था और उसने यह परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसलिए उसका चयन रद्द किया जाना अनुचित है।

दूसरी ओर, बोर्ड ने कहा कि विज्ञापन की शर्तें बहुत स्पष्ट थीं और सभी उम्मीदवारों ने आवेदन करते समय यह घोषणा की थी कि उनके सभी दस्तावेज़ सही हैं। आवेदन के साथ जुड़े Clause 22 में यह भी लिखा था कि कोई भी अंतर मिलने पर उम्मीदवारी स्वतः निरस्त हो जाएगी। बोर्ड ने कहा कि उम्मीदवार के पास आवेदन अवधि (29 अगस्त से 28 सितंबर 2016) के बीच पर्याप्त समय था ताकि वह अपने दस्तावेज़ों को सही करा सके। इसलिए बाद में जन्मतिथि सुधरवाने का कोई लाभ नहीं दिया जा सकता।

दो सदस्यीय पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जब नियम और शर्तें पहले से ही स्पष्ट हैं, तो उम्मीदवार की ज़िम्मेदारी होती है कि वह आवेदन करते समय अपने सभी दस्तावेज़ों को एक समान रखे। यदि उसने ऐसा नहीं किया, तो उसका आवेदन रद्द किया जाना पूरी तरह उचित है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Union of India v. Mahendra Singh (25 जुलाई 2022) का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। छोटे-छोटे अंतर या लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने यह भी पाया कि उम्मीदवार ने दो अलग-अलग ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत किए जिनमें विवरण असंगत थे। एक लाइसेंस किसी अन्य क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर का था और उसमें वैधता अवधि भी संदिग्ध थी। कोर्ट ने इसे फर्जी या अमान्य दस्तावेज़ मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि उम्मीदवार का दावा किसी भी आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सरल शब्दों में, उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि भर्ती विज्ञापन और उम्मीदवार की स्वयं की घोषणा यह कहती है कि दस्तावेज़ों में किसी भी प्रकार की असंगति मिलने पर उम्मीदवारी रद्द होगी, तो उस नियम से कोई छूट नहीं दी जा सकती। उम्मीदवार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके सभी दस्तावेज़—जैसे जन्मतिथि, प्रमाणपत्र, और लाइसेंस—एक समान हों। बाद में गलती सुधारने से स्थिति नहीं बदलती।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

यह निर्णय बिहार में सरकारी नौकरियों के उम्मीदवारों और भर्ती संस्थाओं दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश है।

उम्मीदवारों के लिए संदेश यह है कि आवेदन करते समय सभी प्रमाणपत्रों और पहचान दस्तावेज़ों की पूरी जांच करें। जन्मतिथि, नाम या अन्य विवरण में थोड़ा सा अंतर भी आपकी उम्मीदवारी को रद्द कर सकता है, भले ही आपने सभी परीक्षाएँ पास की हों। आवेदन में दी गई हर जानकारी के समर्थन में दस्तावेज़ों का मेल होना जरूरी है।

भर्ती संस्थाओं और सरकारी विभागों के लिए यह फैसला एक राहत के समान है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि यदि विज्ञापन में सख्त शर्तें दी गई हैं और उम्मीदवार को पहले से चेतावनी दी गई है, तो अदालतें नियुक्ति के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं। यह फैसला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को भी मज़बूत करता है।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या जन्मतिथि में असंगति के कारण उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है, जबकि विज्ञापन में ऐसी चेतावनी दी गई थी — न्यायालय ने कहा “हाँ”, क्योंकि भर्ती की शर्तें सख्त और बाध्यकारी थीं।
  • क्या आवेदन के बाद लाइसेंस में जन्मतिथि सुधारने से पात्रता पर प्रभाव पड़ता है — न्यायालय ने कहा “नहीं”, पात्रता की जांच आवेदन की कट-ऑफ तिथि पर की जाती है।
  • क्या जब दस्तावेज़ों में असंगति और फर्जीवाड़े के संकेत हों, तब भी न्यायालय नियुक्ति का आदेश दे सकता है — न्यायालय ने कहा “नहीं”, ऐसी स्थिति में याचिका खारिज की जानी चाहिए।

पार्टियों द्वारा संदर्भित निर्णय

  • आदेश दिनांक 13.10.2015 और 27.04.2015, क्रमशः CWJC No. 13750 of 2015 और CWJC No. 4166 of 2015 में पारित, जिनका हवाला सख्त भर्ती प्रक्रिया पालन के लिए दिया गया।

न्यायालय द्वारा उपयोग में लाए गए निर्णय

  • Union of India v. Mahendra Singh, Civil Appeal No. 4807 (SLP No. 19886 of 2016 से उत्पन्न), निर्णय दिनांक 25 जुलाई 2022।

मामले का शीर्षक
Chairman, Central Selection Board of Constable & Anr. v. Aggrieved Person & Ors. (arising from CWJC No. 14087 of 2017)

केस नंबर
Letters Patent Appeal No. 1374 of 2018

उद्धरण (Citation)
2023 (1) PLJR 294

न्यायमूर्ति गण का नाम
माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. बी. बजंथरी
माननीय श्री न्यायमूर्ति पुर्नेंदु सिंह
(निर्णय दिनांक: 4 नवम्बर 2022)

वकीलों के नाम और किनकी ओर से पेश हुए

  • अपीलकर्ताओं (CSBC एवं अध्यक्ष) की ओर से: श्री संजय पांडेय, श्री बिनोद कुमार मिश्रा, श्री विवेक आनंद अमृतेश, श्री निशांत कुमार झा
  • याचिकाकर्ता/प्रतिवादी की ओर से: श्री राजेश रंजन, श्री वासी अहमद खान
  • राज्य बिहार की ओर से: श्री प्रभात कुमार वर्मा, अपर महाधिवक्ता (AAG-3)

निर्णय का लिंक
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