पटना हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: Sabka Vishwas Scheme में गलत तरीके से हुई अस्वीकृति पर मामला वापस भेजा गया (2022)

निर्णय की सरल व्याख्या

इस मामले में एक व्यवसायिक संस्था ने पटना हाई कोर्ट का दरवाज़ा इसलिए खटखटाया क्योंकि उसकी Sabka Vishwas (Legacy Dispute Resolution) Scheme, 2019 में दी गई आवेदन-पत्र (declaration) को विभाग के अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया था। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक माफी/राहत योजना थी, जिसका उद्देश्य पुराने सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी से जुड़े विवादों को समाप्त करना था।

योजना यह कहती है कि अगर कोई व्यापारी या टैक्स देने वाला व्यक्ति अपना लंबित टैक्स विवाद खत्म करना चाहता है, तो वह घोषणा देकर अपनी देय राशि का एक हिस्सा जमा कर सकता है और शेष पर ब्याज, पेनल्टी और कार्रवाई से छूट मिल सकती है। इसके लिए विभाग के अंदर एक Designated Committee बनाई गई थी, जो आवेदन की जांच करके अंतिम आदेश देती है।

यहाँ, याचिकाकर्ता (व्यवसायिक संस्था) के ख़िलाफ़ DGGI, Patna Zonal Unit द्वारा पुरानी टैक्स देनदारियों को लेकर कार्रवाई की जा रही थी। इसी प्रक्रिया के दौरान उसने Sabka Vishwas Scheme में आवेदन दाखिल किया। सरकारी पोर्टल पर मौजूद कागज़ात (Annexure-2, Annexure-3) के मुताबिक याचिकाकर्ता ने लगभग ₹72,50,000 रुपए पहले ही जमा कर दिए थे।

लेकिन इसके बावजूद, जो आदेश 20.02.2020 को Designated Committee ने जारी किया, उसमें इस जमा राशि का कोई उल्लेख ही नहीं था। और इसी आधार पर आवेदन को खारिज कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से कहा कि जब सरकारी रिकॉर्ड खुद यह दिखाते हैं कि रकम जमा की गई है, तो योजना के Clause 127 के अनुसार अधिकारी को जमा राशि की पुष्टि करके Discharge Certificate जारी करना चाहिए था।

विभाग ने कहा कि याचिकाकर्ता से और डॉक्यूमेंट मांगे गए थे (Annexure-3 में), और यह भी कहा कि शायद याचिकाकर्ता योजना के Clause 125 में बताई गई eligibility (योजना में शामिल होने की पात्रता) को पूरा नहीं करता। लेकिन यह बात अस्वीकृति आदेश में साफ तौर पर नहीं लिखी गई थी, बल्कि सिर्फ Counter Affidavit में बाद में कही गई थी।

हाई कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की जांच की और साफ तौर पर पाया कि:

  • राजस्व विभाग के अपने पोर्टल पर जमा राशि दिखाई दे रही है,
  • लेकिन उसी विभाग के आदेश में इस राशि का जिक्र तक नहीं है,
  • और मांगे गए दस्तावेज़ भी ठीक से बताए नहीं गए थे।

साथ ही, कोर्ट ने यह भी माना कि Clause 125 को लेकर जो पात्रता का सवाल विभाग ने उठाया है, वह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और इसका निर्णय Designated Committee ही करे, न कि हाई कोर्ट सीधे।

इसलिए, कोर्ट ने एक संतुलित आदेश दिया:

  1. 20.02.2020 का अस्वीकृति आदेश रद्द कर दिया गया।
  2. पूरी फाइल वापस Designated Committee को भेज दी गई ताकि वह सभी तथ्यों और कानून को ध्यान में रखते हुए नया आदेश दे सके।

कोर्ट ने यह भी कहा कि:

  • याचिकाकर्ता 25.01.2022 को कमेटी के समक्ष उपस्थित होगा और सभी आवश्यक दस्तावेज़ देगा।
  • कमेटी चार हफ्तों के भीतर तर्कपूर्ण, कारणयुक्त आदेश पारित करेगी।
  • यह भी स्पष्ट किया गया कि भले ही अब Sabka Vishwas Scheme की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन चूँकि याचिकाकर्ता ने समय पर आवेदन किया था, इसलिए अवधि समाप्त होने का बहाना बनाकर मामले को ख़ारिज नहीं किया जा सकता।

यदि दोबारा निर्णय याचिकाकर्ता के विरुद्ध होता है, तो उसे Clause 128 सहित अन्य कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता रहेगी।

अंततः, याचिका को इन निर्देशों के साथ निपटा दिया गया।

निर्णय का महत्व और इसका प्रभाव आम जनता या सरकार पर

इस फैसले के कई महत्वपूर्ण संदेश हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने टैक्स विवादों के समाधान के लिए किसी राहत योजना का सहारा लिया है या भविष्य में लेंगे:

  1. समय पर दिए गए आवेदन को विभाग बिना वजह अस्वीकार नहीं कर सकता – भले ही योजना की अवधि खत्म हो गई हो।
    यह बात उन हजारों व्यवसायियों के लिए राहत है, जिनके आवेदन समय पर डाले गए थे लेकिन विभाग ने गलती से या अधूरी जांच के कारण सही आदेश नहीं दिया।
  2. विभाग को अपने ही रिकॉर्ड के अनुसार फैसला देना होगा।
    अगर सरकारी पोर्टल दिखा रहा है कि पैसा जमा हुआ है, और अधिकारी आदेश में कहते हैं कि पैसा जमा नहीं हुआ – तो यह आदेश टिक नहीं सकता।
  3. कमेटी का आदेश तर्कपूर्ण होना चाहिए।
    केवल एक लाइन लिखकर आवेदन खारिज करना कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं है।
  4. निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण का उदाहरण।
    कोर्ट ने न तो सीधे याचिकाकर्ता को पूरी राहत दे दी, न ही विभाग की दलीलों को नज़रअंदाज़ किया।
    कोर्ट ने कहा कि सही निर्णय लेने वाले अधिकारी खुद इस मुद्दे की दोबारा जाँच करें।
  5. भविष्य के टैक्स विवाद समाधान योजनाओं के लिए मार्गदर्शन।
    चाहे GST आधारित कोई नई योजना आए या अन्य टैक्स से जुड़ी कोई राहत योजना — यह मामला बताता है कि:
    • विभाग को पारदर्शिता रखनी चाहिए,
    • स्पष्ट दस्तावेज़ मांगने चाहिए,
    • और एक कारणयुक्त आदेश देना चाहिए।

कानूनी मुद्दे और निर्णय

  • क्या Designated Committee ने जमा राशि को नज़रअंदाज़ करके गलत आदेश दिया?
    • हाँ। कोर्ट ने पाया कि विभाग के रिकॉर्ड जमा राशि दिखा रहे थे, लेकिन आदेश में उसका कोई उल्लेख नहीं था।
  • क्या याचिकाकर्ता की पात्रता (Clause 125) का सवाल महत्वपूर्ण था?
    • हाँ। कोर्ट ने माना कि पात्रता का प्रश्न विभाग को ही तय करना चाहिए, न कि कोर्ट।
  • क्या आदेश को रद्द करके मामला वापस भेजना आवश्यक था?
    • हाँ। कोर्ट ने आदेश निरस्त किया और दोबारा विचार का निर्देश दिया, ताकि सही कानूनी प्रक्रिया का पालन हो सके।
  • क्या योजना की अवधि समाप्त हो जाने से दोबारा विचार रुक जाएगा?
    • नहीं। अगर आवेदन समय पर हुआ था, तो योजना की समाप्ति कोई बाधा नहीं है।

मामले का शीर्षक

Expression Buildtech Private Limited vs. Union of India & Ors.

Case Number

Civil Writ Jurisdiction Case No. 455 of 2021

माननीय न्यायाधीशगण

  • माननीय मुख्यमहाधिवक्ता न्यायाधीश (Hon’ble the Chief Justice Sanjay Karol)
  • माननीय न्यायाधीश श्री एस. कुमार (Hon’ble Mr. Justice S. Kumar)

वकीलों के नाम और पक्षकार

  • याचिकाकर्ता की ओर से: श्री D. V. Pathy, अधिवक्ता
  • प्रतिवादी (केंद्र सरकार/राजस्व) की ओर से:
    • Dr. K. N. Singh, Additional Solicitor General
    • श्री Anshuman Singh, अधिवक्ता

निर्णय का लिंक

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