(Cross-link: Read English Version)
अधिनियम संख्या: बिहार अधिनियम 13, 2006 (संशोधन अधिनियम 2007, 2010 व 2018 सहित)
अंतिम अद्यतन (महत्वपूर्ण संशोधन): 31 जुलाई 2018
Official Clean PDF (Samvida Edition): THE BIHAR FISH JALKAR MANAGEMENT ACT, 2006.pdf – Google Drive
1) परिचय
बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 राज्य सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी जलकروں—जैसे पोखर, आहर, नदी, नाला, चौर, झील, ऑक्स-बो झील आदि—की पहचान, वर्गीकरण, प्रबंधन और नीलामी की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
- बिहार में वैज्ञानिक मत्स्य उत्पादन बढ़ाना
- प्रशिक्षित और परंपरागत मछुआरों की आजीविका की रक्षा
- जलकروں की पारदर्शी और निष्पक्ष बंदोबस्ती
- अवैध व विनाशकारी मत्स्य शिकार को रोकना
2007, 2010 और 2018 के संशोधनों ने अपील प्रणाली, बंदोबस्ती अवधि, बैंक-आधारित भुगतान और अपराध प्रावधानों को और स्पष्ट किया।
2) अधिनियम की संरचना
| भाग/अध्याय | विषय | मुख्य विवरण |
|---|---|---|
| धारा 1–2 | प्रारंभिक प्रावधान | परिभाषाएँ – जलकर, मछुआरा, समिति, परिवार, जलकर सूची आदि |
| धारा 3 | जलकर सूची | प्रखंड-वार सूची, क्षेत्रफल, वर्गीकरण (उत्तम/मध्यम/सामान्य) |
| धारा 4 | रिज़र्व डिपॉज़िट निर्धारण | उत्पादन क्षमता, सरकारी बिक्री मूल्य और न्यूनतम जमा राशि निर्धारण |
| धारा 5–6 | अल्पकालीन व दीर्घकालीन बंदोबस्ती | 5 वर्ष (अल्पकालीन) और 10 वर्ष (दीर्घकालीन) की प्रक्रिया |
| धारा 7 | अल्पकालीन बंदोबस्ती | मछुआरा सहकारी समितियों से बंदोबस्ती, दस्तावेज़, समयसीमा |
| धारा 8 | सीमित बोली | समिति अनुपलब्ध/अयोग्य होने पर प्रक्रिया |
| धारा 10–12 | वितरण, पर्ता, पुनर्निर्धारण | सदस्य-वार वितरण, पर्ता घोषित करना, आपदा में छूट |
| धारा 13 | निषेध | बंद मौसम, जाल आकार, विस्फोटक/विष के प्रयोग पर रोक |
| धारा 14 | अपील व पुनरीक्षण | 2010 में संशोधित—अब अपील संभागीय आयुक्त के पास |
| धारा 17–20 | अपराध एवं दंड | छह माह तक कारावास या ₹500 जुर्माना; मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान |
3) मुख्य प्रावधान (सरल उदाहरण सहित)
धारा 2 – प्रमुख परिभाषाएँ
- जलकर – पोखर, तालाब, नदी, आहर, चौर, झील, नहर, ऑक्स-बो झील आदि, जहाँ मछली/मखाना/सिंघाड़ा का उत्पादन होता है।
- मछुआरा सहकारी समिति – केवल मछुआरों की सदस्यता वाली मान्यता प्राप्त समिति।
उदाहरण: किसी पंचायत का सरकारी पोखर जलकर माना जाएगा; किंतु मिश्रित (किसान+मछुआरा) सहकारी समिति मछुआरा समिति नहीं मानी जाएगी।
धारा 3–4 – जलकर सूची व रिज़र्व डिपॉज़िट
सरकार प्रत्येक जलकर के लिए:
- क्षेत्रफल
- उत्पादन क्षमता
- सरकारी बिक्री दर
- रिज़र्व डिपॉज़िट (उत्पादन मूल्य का 10–15%)
निर्धारित करती है।
उदाहरण: यदि किसी तालाब का वार्षिक उत्पादन मूल्य ₹1,00,000 है तो रिज़र्व डिपॉज़िट करीब ₹10,000–₹15,000 होगा।
धारा 5 – अल्पकालीन (5 वर्ष) व दीर्घकालीन (10 वर्ष) बंदोबस्ती
- अल्पकालीन बंदोबस्ती अब 5 वर्ष की होती है।
- विकासात्मक कार्यों हेतु 10 वर्ष तक दीर्घकालीन बंदोबस्ती दी जा सकती है।
धारा 6 – दीर्घकालीन बंदोबस्ती
इसका उद्देश्य है:
- पर्ता या उपेक्षित जलकऱों का विकास
- गहराई बढ़ाना, मेड़/इनलेट/आउटलेट सुधारा जाना
- बैंक/सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स
प्रशिक्षित मछुआरों को प्राथमिकता मिलती है।
धारा 7 – मछुआरा सहकारी समिति से बंदोबस्ती
- समिति अविकालक/अवितर्कित होनी चाहिए।
- आवेदन, ऑडिट रिपोर्ट, वार्षिक आमसभा की कार्यवाही अनिवार्य।
- दो किस्तों में भुगतान की सुविधा, परंतु समिति को यह सुविधा अपने सदस्यों को भी देनी होगी।
- 2018 संशोधन के बाद सभी भुगतान केवल बैंक खाते से।
महत्वपूर्ण: समिति अपने सदस्यों के पट्टा-अवधि में स्वतः परिवर्तन नहीं कर सकती—यह अब दंडनीय अपराध है।
धारा 8 – सीमित बोली
समिति अयोग्य होने पर या बंदोबस्ती न लेने पर, नोटिस देकर सीमित बोली कराई जाती है।
बोली केवल उन लोगों को दी जाती है जो पूरे रिज़र्व डिपॉज़िट की राशि जमा करते हैं।
धारा 10–12 – वितरण, पर्ता, छूट
- गांव-वार निष्पक्ष वितरण आवश्यक।
- दो बार सीमित बोली असफल होने पर जलकर पर्ता घोषित हो सकता है।
- बाढ़/सूखा/महामारी में Collector/डिप्टी डायरेक्टर की संस्तुति पर छूट/पुनर्निर्धारण संभव।
धारा 13 – मत्स्य निषेध
- नदी मत्स्य शिकार 15 जून–15 अगस्त बंद मौसम।
- 4 सेमी से कम जाल प्रतिबंधित।
- विस्फोटक/विष/रसायन का प्रयोग दंडनीय अपराध।
- 2018 संशोधन: नदी-जलाशयों में अवरोध लगाने पर रोक केवल बंद मौसम अवधि में लागू।
धारा 14 – अपील
2010 संशोधन के बाद:
- जिला मत्स्य पदाधिकारी/उप निदेशक के आदेश के विरुद्ध अपील संभागीय आयुक्त के पास होती है।
- अपील 30 दिनों के भीतर, निष्पादन 2 माह के भीतर।
4) बिहार में व्यावहारिक प्रभाव
मछुआरों के लिए
- सहकारी समिति में शामिल होने से बंदोबस्ती पाने की संभावना बढ़ती है।
- प्रशिक्षण प्रमाणपत्र से दीर्घकालीन बंदोबस्ती में प्राथमिकता।
- बंद मौसम पालन अनिवार्य—उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई।
सहकारी समितियों के लिए
- नियमित ऑडिट, चुनाव, AGM अनिवार्य।
- पट्टा-वितरण में पारदर्शिता; बिना अनुमति अवधि बढ़ाना/घटाना अपराध।
- सभी भुगतान बैंक के माध्यम से।
जिला प्रशासन के लिए
- DFO (जिला मत्स्य पदाधिकारी) संपूर्ण प्रक्रिया के नोडल अधिकारी।
- कलेक्टर/उप विकास आयुक्त विभिन्न समितियों के सदस्य/अध्यक्ष।
अन्य संस्थाओं के लिए
- यह अधिनियम केवल मत्स्य संसाधन विभाग के जलकऱों पर लागू होता है।
- जिला परिषद/राजस्व विभाग के जलकऱों पर स्वतः लागू नहीं, पर वे चाहें तो इसकी प्रक्रिया अपनाते हैं।
5) FAQs – जनता द्वारा पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न
Q1. क्या यह अधिनियम सभी तालाबों/नदियों पर लागू होता है?
नहीं, केवल मत्स्य संसाधन विभाग के अधीन जलकऱों पर लागू होता है।
Q2. दीर्घकालीन बंदोबस्ती की अधिकतम अवधि कितनी है?
10 वर्ष। इससे अधिक का अधिकार किसी को नहीं है।
Q3. समिति सदस्य के पट्टा की अवधि committee खुद बदल सकती है?
नहीं। यह अब अपराध है (2018 संशोधन)।
Q4. DFO के आदेश के विरुद्ध अपील कहाँ?
संभागीय आयुक्त के पास।
Q5. बंद मौसम में मछली पकड़ने का परिणाम?
छह माह तक कारावास या ₹500 जुर्माना या दोनों।
6) महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय
(1) 10 वर्ष से अधिक विस्तार का अधिकार नहीं
पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दीर्घकालीन बंदोबस्ती की सीमा अधिनियम में 10 वर्ष निर्धारित है; अनुबंध की किसी भी शर्त से यह सीमा नहीं बढ़ सकती।
(2) अपील का मंच – अब संभागीय आयुक्त
2010 संशोधन के बाद DFO/उप निदेशक के आदेशों पर अपील का सही मंच संभागीय आयुक्त है।
(3) अधिनियम का क्षेत्र
अधिनियम केवल मत्स्य संसाधन विभाग के जलकऱों पर लागू; जिला परिषद/राजस्व विभाग स्वतंत्र हैं, पर प्रक्रिया अपना सकते हैं।
7) संबंधित कानून
- बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम 2007, 2010, 2018
- बिहार सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1935
- बिहार स्वावलंबी सहकारी समाज अधिनियम, 1996
8) सारांश
बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 राज्य के सरकारी जलकऱों के प्रबंधन का मूल कानून है। यह जलकऱों की पहचान, वर्गीकरण, रिज़र्व डिपॉज़िट निर्धारण, मछुआरा सहकारी समितियों को पारदर्शी बंदोबस्ती, और मत्स्य संरक्षण से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करता है।
अल्पकालीन बंदोबस्ती 5 वर्ष और दीर्घकालीन बंदोबस्ती अधिकतम 10 वर्ष तक सीमित है। विभाजन, बैंक भुगतान, ऑडिट, AGM, निषेध प्रावधान, बंद मौसम, और अपराध-दंड प्रणाली इसे अधिक प्रभावी बनाते हैं।
संशोधनों ने प्रमुख सुधार किए—जैसे समिति द्वारा बिना अनुमति पट्टा अवधि बदलना अब अपराध है; सभी भुगतान बैंक से; अपील मंच को संभागीय आयुक्त स्तर पर लाना आदि। अदालतों ने भी यह स्पष्ट किया कि 10 वर्ष से अधिक की बंदोबस्ती अप्रासंगिक है और अधिनियम केवल मत्स्य विभाग के जलकऱों पर लागू होता है।
यह अधिनियम उत्पादन बढ़ाने, मछुआरों की आजीविका सुरक्षित रखने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करता है।
निष्कर्ष एवं Disclaimer
🗣️ यह लेख Samvida Law Associates के सार्वजनिक कानूनी जागरूकता प्रयास का हिस्सा है। व्यक्तिगत कानूनी समस्याओं के लिए सदैव किसी योग्य अधिवक्ता से सलाह लें।
Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी हेतु है; इसे कानूनी सलाह न माना जाए।


